कोरोना वायरस की देसी वैक्सीन बनाने 'कोवैक्सीन' यूके स्ट्रेन पर असरदार है. इसलिए लोगों को इस बात से घबराने की जरूरत नहीं है कि कोरोना का यूके स्ट्रेन उन्हें परेशान कर सकता है. ये दावा किया गया है इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की स्टडी में. आइए जानते हैं कि ICMR के इस दावे के पीछे क्या वजह है? (फोटोः FB/भारत बायोटेक)
ICMR ने बताया कि कोरोना वायरस के यूके स्ट्रेन के जीनोम में 17 म्यूटेशन मिले हैं. इनमें से 8 म्यूटेशन उसके स्पाइक रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन (RBD) यानी कोरोना वायरस की बाहरी कंटीली प्रोटीन की परत में मिले हैं. यही परत हमारे शरीर की कोशिकाओं में मिलने वाले एंजियोटेंसिन कन्वर्टिंग एंजाइम (ACE2) रिसेप्टर से जुड़ता है. (फोटोः FB/भारत बायोटेक)
ICMR ने ये कोवैक्सीन (Covaxin) की यूके स्ट्रेन पर होने वाले असर की स्टडी उन लोगों पर की जो यूके स्ट्रेन से संक्रमित होकर भारत आए थे. यूके स्ट्रेन से संक्रमित 38 लोगों को कोवैक्सीन (Covaxin) की डोज दी गई. इसके बाद देखा गया कि ये वैक्सीन यूके स्ट्रेन से संक्रमित लोगों पर असरदार है. (फोटोः FB/भारत बायोटेक)
ICMR की स्टडी में ये बात स्पष्ट होती नजर आ रही है कि कोवैक्सीन (Covaxin) भारत में फैले कोरोनावायरस के स्ट्रेन और यूके स्ट्रेन पर असरकारक है. ये कोरोनावायरस की बाहरी कंटीली प्रोटीन की परत को निष्क्रिय करने में सक्षम है. यानी अगर कोरोना वायरस का स्ट्रेन म्यूटेशन करता भी है तो भी कोवैक्सीन (Covaxin) असरकारक होगी. (फोटोः FB/भारत बायोटेक)
कोवैक्सीन (Covaxin) को लेकर कुछ दिन पहले इस तरह की बातें भी उठी थीं कि ये कोरोना के खिलाफ कम असरकारक है. साथ ही इसका क्लीनिकल ट्रायल अभी जारी है. इसलिए इस वैक्सीन को लगवाने को लेकर लोग दुविधा में थे. इसके बाद इसे बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक ने फैक्टशीट जारी की थी. (फोटोःपीटीआई)
भारत बायोटेक ने इस फैक्टशीट में वैक्सीन को लेकर बरती जाने वाली सावधानियों की लिस्ट जारी की थी. साथ ही कहा था कि आप जब अपने वैक्सीनेशन सेंटर पर जाएं तो अधिकारी को अपने से जुड़ी दिक्कतों को जरूर सामने रखें. (फोटोःपीटीआई)