एक स्टडी से पता चला है कि फाइजर-बायोएनटेक की कोरोना वैक्सीन ब्रिटेन में पाए गए अधिक संक्रामक कोरोना वायरस वैरिएंट से भी सुरक्षा प्रदान कर सकती है. ब्रिटेन में मिले अधिक संक्रामक वैरिएंट की वजह से इंग्लैंड में कोरोना के मामले काफी अधिक बढ़ गए हैं और मृतकों की संख्या में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है. इसकी वजह से ब्रिटेन के बड़े हिस्से में लॉकडाउन भी लागू करना पड़ा है.
फाइजर की वैक्सीन नए वैरिएंट से सुरक्षा देती है या नहीं, यह जानने के लिए ब्रिटेन में मिले वैरिएंट B117 के गुण वाले एक सिंथेटिक वायरस का इस्तेमाल किया गया और लैब में स्टडी की गई. इस स्टडी को bioRxiv.org पर प्रकाशित किया गया है, लेकिन अभी इसका रिव्यू किया जाना बाकी है.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, स्टडी के 11 लेखकों में बायोएनटेक के को-फाउंडर ऊर साहिन और केजलेम टुरेसी भी शामिल हैं. इस स्टडी से यह उम्मीद जगी है कि कोरोना के नए वैरिएंट्स से सुरक्षा देने में फाइजर की वैक्सीन कारगर साबित होगी और नए सिरे से वैक्सीन तैयार करने की जरूरत नहीं होगी.
स्टडी के लिए वैक्सीन की खुराक पाने वाले 16 लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए थे और फिर सैंपल को सिंथेटिक वायरस से एक्सपोज किया गया. इस दौरान देखा गया कि ब्लड में मौजूद एंटीबॉडी BNT162b2, सिंथेटिक वायरस को न्यूट्रलाइज करने में सफल रही.
बायोएनटेक ने कहा है कि साउथ अफ्रीकी कोरोना वैरिएंट पर वैक्सीन का क्या प्रभाव पड़ता है, इसको लेकर भी कुछ दिन में स्टडी प्रकाशित की जाएगी. वैज्ञानिकों का मानना है कि साउथ अफ्रीकी कोरोना वैरिएंट अधिक संक्रामक है, हालांकि यह वैरिएंट लोगों को अधिक बीमार नहीं करता. वहीं, एस्ट्राजेनका, मॉडर्ना और अन्य वैक्सीन कंपनियां भी नए कोरोना वैरिएंट के ऊपर वैक्सीन के प्रभाव को जांचने के लिए स्टडी कर रही है और अब तक इन कंपनियों की ओर से नए वैरिएंट को लेकर कोई डेटा जारी नहीं किया गया है.