ये सवाल लगातार उठता है कि कोरोना वैक्सीन लगने के बाद कोई शख्स कितने दिन तक कोरोना वायरस से सुरक्षित रह सकता है. एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि कम से कम छह महीने. यानी अगर आपने वैक्सीन लगवाई है या कोरोना से रिकवर कर चुके हैं तो आप कम से कम 180 दिनों तक कोविड-19 के हमले से बच सकते हैं. आइए जानते हैं कि ये स्टडी किसने की है और इसका निष्कर्ष क्या है? (फोटोःगेटी)
यूके बायोबैंक (UK Biobank) ने ब्रिटेन कोरोना की पहली लहर से संक्रमित हुए सभी मरीजों पर स्टडी की. साथ ही ये भी जांच की कि एंटीबॉडी कितने दिन रहती है. इस स्टडी में पता चला कि अगर आपने एक बार वैक्सीन लगवा ली या फिर आप कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके हैं यानी कोरोना से रिकवर कर चुके हैं. तो आप छह महीने तक कोरोना के दोबारा होने वाले संक्रमण से सुरक्षित रह सकते हैं. (फोटोःगेटी)
समाचार एजेंसी रॉयटर्स में प्रकाशित खबर के अनुसार यूके बायोबैंक (UK Biobank) की चीफ साइंटिस्ट और प्रोफेसर नाओमी एलेन कहती हैं कि ज्यादातर लोगों में कोरोना वायरस के खिलाफ शरीर में एंटीबॉडी छह महीने तक रहती है. चाहे वह रिकवरी के बाद विकसित हुई हो या फिर वैक्सीन लगवाने के बाद. (फोटोःगेटी)
नाओमी एलेन ने बताया इस स्टडी में जितने लोग शामिल थे, वो सभी कोरोना से रिकवर हो चुके थे. इनमें से 99 फीसदी के पास तीन महीने तक कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी थी. जबकि बाकी 88 प्रतिशत लोगों के पास छह महीने तक कोरोना वायरस से बचाने वाली एंटीबॉडी शरीर में मौजूद थी. यानी कुछ ही लोग ऐसे बचेंगे जिनकी एंटीबॉडी समय से पहले खत्म या कमजोर हो जाएगी. (फोटोःगेटी)
नाओमी के अनुसार एंटीबॉडी तीन महीने रहेंगे या छह महीने यह सब लोगों के खान-पान, संक्रमण से बचने के उपाय, सतर्कता और इम्यूनिटी पर निर्भर करता है. अगर किसी को इस बीच दोबारा संक्रमण होता भी है तो वह उस स्तर का भयावह नहीं होगा, जैसा उसे पहले हो चुका होगा. यह कमजोर हो सकता है. (फोटोःगेटी)
नाओमी एलेन कहती हैं कि उनकी स्टडी यूनाइटेड किंगडम और आइसलैंड में हुई कई स्टडीज से मेल खाती है. बाकी स्ट्डीज में इस तरह की बातें आई थीं कि कोरोना से रिकवर हुए मरीजों के शरीर में एंटीबॉडी तीन से 9 महीने तक टिक सकता है. यानी आप अपनी इम्यूनिटी को अपने खान-पान से बचा सकते हैं. कोरोना संबंधी नियमों से खुद को दोबारा संक्रमण से दूर रख सकते हैं. (फोटोःगेटी)
पिछले महीने यूके के हेल्थकेयर वर्कर्स पर की गई एक स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ था कि ये लोग कोरोना के दोबारा हमले से कम से कम पांच महीने तक सुरक्षित रह सकते हैं. लेकिन ये लोग कोरोना मरीजों के साथ इतना ज्यादा समय बिताते हैं कि इनके शरीर में एंटीबॉडी जल्दी कमजोर पड़ सकते हैं. क्योंकि इनके पास कोरोना के नए रूप के हमले का डर ज्यादा रहता है. (फोटोःगेटी)