अमेरिका सहित दुनियाभर में कोरोना वायरस की वैक्सीन तैयार करने के लिए तेजी से काम हो रहा है. तेजी से बढ़ते संक्रमण और राजनीतिक वजहों से वैज्ञानिकों पर जल्दी वैक्सीन तैयार करने का दबाव है. लेकिन कई एक्सपर्ट ने चेतावनी दी है कि वैक्सीन तैयार करने की जल्दी नुकसानदायक साबित हो सकती है. अमेरिका में पहले भी गलत वैक्सीन का एक बड़ा हादसा हो चुका है, जब वैक्सीन लगाने वाले 40 हजार बच्चे बीमार हो गए थे.
अमेरिका में बड़े पैमाने पर गलत पोलियो वैक्सीन लगाने का मामला 1955 का है. वॉशिंटगन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी वैज्ञानिकों को यह पता चल चुका था कि वैक्सीन में जिंदा वायरस है, बावजूद इसके उन अधिकारियों तक ये बात नहीं पहुंची जो कंपनियों को वैक्सीन उत्पादन के लिए लाइसेंस दे रहे थे. बाद में पोलियो के रहस्यमय मामले सामने आने लगे तो सरकार ने वैक्सीन वापस मंगाने का फैसला किया, तब तक काफी देर हो चुकी थी.
असल में 1954 में वैज्ञानिक बर्निस ई एड्डी ने जांच के लिए पोलियो वैक्सीन के छह सैंपल बंदरों को लगाए. इसकी वजह से तीन बंदर पैरालाइज हो गए. वह समझ गईं कि ये वैक्सीन खतरनाक है, उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के लेबोरेटरी ऑफ बायोलॉजिक्स कंट्रोल के प्रमुख को इस बात की जानकारी दी. लेकिन वैक्सीन कंपनियों को लाइसेंस देने वाले अधिकारी तक ये बात नहीं पहुंची.
पोलियो वैक्सीन जोनस साल्क नाम के वैज्ञानिक ने तैयार की थी. वैक्सीन तैयार होते ही सरकार ने कई कंपनियों को जल्दबाजी में वैक्सीन उत्पादन का लाइसेंस दे दिया. लेकिन वैक्सीन उत्पादन करने वाली एक कंपनी कटर लेबोरेटरीज की वैक्सीन में दिक्कत थी. उसमें मृत वायरस की जगह जिंदा वायरस मौजूद थे. इसकी वजह से वैक्सीन लगाते ही बच्चे पोलियो ग्रस्त होने लगे. कई परिवारों में बच्चों के बाद बड़े लोग भी संक्रमित हो गए.
वॉशिंटगन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिक बर्निस ई एड्डी की चेतावनी के बावजूद तकरीबन 1.2 लाख बच्चों को कटर लेबोरेटरीज की खराब वैक्सीन लगा दी गईं. इनमें से करीब 40 हजार बच्चे पोलियो के शिकार हो गए. 51 बच्चे पैरालाइज्ड हो गए. कम से कम 5 बच्चों की मौत हो गई. अमेरिका में वैक्सीन एजुकेशन सेंटर के डायरेक्टर पॉल ए ऑफिट इसे अमेरिकी इतिहास की एक सबसे बड़ी जैविक त्रासदी बताते हैं.