अमेरिका में बंदरों की भारी कमी हो गई है जिसकी वजह से कोरोना वायरस की वैक्सीन तैयार करने में देरी हो सकती है. अटलांटिक मैगजीन में छपी खबर के मुताबिक, अमेरिकी रिसर्चर्स ने चेतावनी दी है कि देशभर में बंदरों की भारी कमी हो गई है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोरोना महामारी की वजह से रिसर्च के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले जानवरों की कमी पैदा हुई है. अमेरिका के नेशनल प्राइमेट रिसर्च सेंटर के मुताबिक, बायोमेडिकल रिसर्च के लिए सबसे अधिक Rhesus प्रजाति के बंदरों का इस्तेमाल होता है.
कैलिफोर्निया के नेशनल प्राइमेट रिसर्च सेंटर के कोइन वैन रोम्पे ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर बंदरों की भारी कमी हो गई है. रिसर्च फर्म बायोइक्वल के सीईओ मार्क लेविस ने कहा कि हमें अब Rhesus बंदर नहीं मिल रहे हैं. वे पूरी तरह से गायब हो गए हैं.
खबर के मुताबिक, कोरोना महामारी की वजह से बंदरों की मांग बढ़ी है, लेकिन चीन से होने वाली आपूर्ति में भारी गिरावट आ गई है. पिछले साल अमेरिका में आयात किए गए 35 हजार बंदरों में से 60 फीसदी चीन से भेजे गए थे. लेकिन कोरोना वायरस की वजह से चीन ने बंदरों का निर्यात बंद कर दिया था.
दूसरी ओर, कोरोना वायरस से संक्रमित किए गए बंदरों को रखने के लिए विशेष प्रकार की एनिमल बायोसेफ्टी लेवल-3 लैब की जरूरत होती है. ताकि कोरोना संक्रमण फैले नहीं. अमेरिका में ऐसी लैब की संख्या सीमित है. रिसर्चर्स का कहना है कि कोरोना वायरस की टेस्टिंग के लिए बंदर काफी उपयोगी हैं क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम करीब करीब इंसानों जैसा ही है.