उत्तर प्रदेश में पिछले 24 घंटों में 30 हजार मामले दर्ज होने के साथ-साथ राज्य में कोविड से मरने वालों की संख्या भी बढ़ गई है. इस बीच यूपी में श्मशान घाटों में मासूम लोगों को लूटने का सिलसिला भी शूरू हो गया है. आलम ये है कि कोरोना से मरने वाले लोगों के परिजनों के पास अंतिम संस्कार में बताई गई राशि का भुगतान करने के अलावा कोई रास्ता नहीं रह गया है. (प्रतीकात्मक फोटो) (इनपुट-रोशन जायसवाल/उस्मान चौधरी)
वाराणसी के हरिश्चंद्र घाट पर 35 वर्षीय राजेश सिंह अपने चाचा के अंतिम संस्कार के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे. हरिश्चंद्र एक छोटा सा डिपार्टमेंटल स्टोर चलाते हैं. आज तक से बात करते हुए उन्होंने बताया कि उनके चाचा की मौत कोरोना से हुई थी. घाट पर मौजूद प्रबंधक ने दाह संस्कार के लिए उनसे 11,000 रुपये मांगे. जब राजेश सिंह ने कहा कि अंतिम संस्कार की लागत 5,000 रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए, तो इस पर प्रंबधक ने जबाव दिया कि अपने परिजन के शव के साथ आप वापस चले जाएं. राजेश सिंह का कहना है कि यहां अंतिम संस्कार की दरें तय नहीं हैं और परिवार की हैसियत के हिसाब से लोगों से शुल्क लिया जा रहा है. (प्रतीकात्मक फोटो)
एक अन्य, 35 वर्षीय पीड़ित ने बताया कि उन्होंने अपनी चाची के अंतिम संस्कार के लिए 21,000 रुपये का शुल्क दिया था. दूसरी बार, जब उनकी दादी का निधन हुआ तो उनसे 25000 रुपये का शुल्क लिया गया. दोनों बार उन्होंने मजबूरी में इतनी बड़ी रकम का भुगतान किया क्योंकि उनके पास कोई और रास्ता नहीं था. उनका कहना है कि कोरोना सकंट के नाम पर और अंतिम संस्कार के अतिरिक्त वेटिंग के नाम पर यहां के पुजारी और प्रबंधक अपनी इच्छा के अनुसार रकम वसूल रहे हैं. उन्होंने बताया कि ओवरचार्जिंग के बाद भी, सेवाएं संतोषजनक नहीं हैं क्योंकि ये लोग लकड़ी की पर्याप्त सामग्री उपल्बध नहीं करा पाते हैं जिससे अक्सर आंशिक रूप से जली हुई लकड़ी अंतिम संस्कार में भर देते हैं. (प्रतीकात्मक फोटो)
दूसरी ओर, काशी के मणिकर्णिका घाट पर शवों की तादाद में इजाफा हुआ है. यहां दाह संस्कार भी महंगा हो गया है. जहां पहले 3000-4000 रुपये एक दाह संस्कार में खर्च होते थे, अब वही 12000-15000 रुपये हो गए हैं. श्मशान में लकड़ी प्रदान करने वाले अरुण सिंह का कहना है कि लकड़ी की कीमत पिछले कुछ दिनों में दोगुनी हो गई है. उन्होंने यह भी कहा कि कई दुकानदार अनुष्ठान से संबंधित वस्तुओं की मनमानी कीमत ले रहे हैं और दाह संस्कार के लिए उच्च कीमत भी वसूल रहे हैं. (प्रतीकात्मक फोटो)
इसी तरह, मेरठ में भी कोरोना से मरने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है. इस सब के बीच यहां से भी कई शिकायतें आ रही हैं कि श्मशान में अधिक पैसे की मांग की जा रही है. 40 साल के दुष्यंत रोहता कहना है कि सूरजकुंड श्मशान घाट पर मनमाने तरीके से पैसे वसूले जा रहे हैं. लकड़ी, पूजन सामग्री की कीमतें 10,000 तक बढ़ाई जा रही हैं. अंतिम संस्कार करने वाले 15 से 20 हजार तक की मांग कर रहे हैं. उनके चाचा की कोरोना से मृत्यू हो गई थी जिसके बाद उनके अंतिम संस्कार के लिए उन्होंने 5100 रुपये दिए जो कि नियम के अनुसार 500 रुपये होना चाहिए. (प्रतीकात्मक फोटो)
इसी समय, सूरजकुंड में पुजारियों के अपने तर्क हैं. पुरोहित रवि शर्मा का कहना है कि उनके पास पीपीई किट भी उपलब्ध नहीं थी. वे शरीर को भी उठाते हैं और अंतिम संस्कार भी करते हैं. रवि शर्मा का कहना है कि लोग अपनी इच्छा के अनुसार पैसा देते हैं. उन्होंने कहा कि वह अपना जीवन दांव पर लगाकर कोविड के शव का अंतिम संस्कार करते हैं. उन्होंने कहा कि ओवरचार्ज करने का आरोप गलत है. (प्रतीकात्मक फोटो)