अगर आपका ब्लड ग्रुप ओ (O) है और रीसस निगेटिव यानी आरएच फैक्टर निगेटिव है तो आपको कोरोना का रिस्क कम है. इतना ही नहीं इसकी वजह से आप कभी भी कोरोना की वजह से गंभीर रूप से बीमार नहीं पड़ेंगे या आपकी मौत होगी. कनाडा के वैज्ञानिकों ने ये दावा किया है. इसकी रिपोर्ट जर्नल एनल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन में प्रकाशित हुई है. (फोटोः गेटी)
कनाडा के टोरंटो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 225,556 लोगों के ब्लड ग्रुप का अध्ययन किया है. इनके ब्लड ग्रुप का अध्ययन जनवरी 2007 से लेकर दिसंबर 2019 तक किया गया. इसके बाद इनके ब्लड सैंपल्स को लैब में टेस्ट किया गया. शोधकर्ताओं का मकसद था सभी ब्लड ग्रुप और आरएच फैक्टर्स पर कोरोना संक्रमण का अध्ययन करना. (फोटोः गेटी)
स्टडी के मुताबिक 225,556 लोगों में से 1328 लोगों को गंभीर कोरोना संक्रमण हुआ था. ये सभी लोग AB, A या बी ब्लडग्रुप से संबंधित थे. इनमें से अधिकतर लोगों के आरएच फैक्टर भी पॉजिटिव थे. इस वजह से इनके अंदर कोरोना संक्रमण ज्यादा देखा गया. जबकि, ब्लड ग्रुप ओ (O) है और रीसस निगेटिव यानी RH निगेटिव लोगों को कोरोना संक्रमण कम हुआ. इनमें से कोई भी गंभीर रूप से बीमार नहीं हुआ. न ही किसी की मौत हुई. (फोटोः गेटी)
द स्टेट्समैन में छपी खबर के अनुसार अब वैज्ञानिक ये पता करने की कोशिश कर रहे हैं कि ब्लडग्रुप के अनुसार लोगों को वैक्सीन देकर उन्हें कोरोना वायरस से बचाया जा सकता है या नहीं. अगर ऐसा संभव हुआ तो बहुत से लोगों को इस महामारी से बचाना आसान होगा. क्योंकि इसमें सिर्फ उन्हीं लोगों को वैक्सीन दी जाएगी जिनके संक्रमित होने का खतरा ज्यादा है. (फोटोः गेटी)
गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में चीन से भी इसी तरह की एक स्टडी सामने आई थी. उसमें भी चीन के जिनइंतान अस्पताल को शोधकर्ताओं ने खुलासा किया था कि ब्लड ग्रुप ए (Blood Group A) कोरोना वायरस से जल्दी संक्रमित हो सकता है, बल्कि ब्लड ग्रुप ओ (Blood Group O) को संक्रमित होने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है. (फोटोः गेटी)
चीन ने वैज्ञानिकों ने यह अध्ययन वुहान में किया था. वुहान चीन के हुबेई प्रांत की राजधानी है. यहीं से पूरी दुनिया में कोविड-19 कोरोना वायरस का संक्रमण फैला था. वुहान में वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस से संक्रमित 2173 लोगों पर अध्ययन किया. इनमें से 206 लोगों की मौत कोरोना वायरस की वजह से हुई थी. ये लोग हुबेई प्रांत के तीन अस्पतालों में भर्ती थे. (फोटोः गेटी)
कोरोना वायरस की वजह से मारे गए 206 लोगों में से 85 लोगों का ब्लड ग्रुप ए था. यानी करीब 41 फीसदी. जबकि, 52 लोगों का ब्लड ग्रुप ओ था. यानी करीब 25 फीसदी. 2173 लोगों में से ब्लड ग्रुप ए वाले लोग ज्यादा संक्रमित भी थे. इसमें से 32 फीसदी ब्लड ग्रुप ए के थे जबकि 26 फीसदी ही ब्लड ग्रुप ओ वाले लोग थे. (फोटोः गेटी)
रिसर्च में शामिल किए गए सभी लोगों में से ब्लड ग्रुप ए के 38 फीसदी लोग संक्रमित हुए थे, जबकि ब्लड ग्रुप के सिर्फ 26 फीसदी लोग ही इस कोरोना वायरस से प्रभावित हुए थे. शोधकर्ताओं ने अपने शोध से परिणाम यह निकाला कि ब्लड ग्रुप ओ के कोरोना वायरस से मरने की आशंका बाकी ब्लड ग्रुप से कम है. साथ ये संक्रमित भी देर से होते हैं. वहीं, ब्लड ग्रुप ए वालों के कोरोना से मरने की आशंका ज्यादा है. (फोटोः गेटी)
वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि जब सार्स-सीओवी-2 (SARS-COV-2) का हमला हुआ था, तब भी ब्लड ग्रुप ओ के लोग कम बीमार पड़े थे, जबकि बाकी ब्लड ग्रुप के लोग काफी ज्यादा प्रभावित हुए थे. चीन तियानजिन स्थित स्टेट की लेबोरटरी ऑफ एक्सपेरीमेंडल हीमैटोलॉजी के वैज्ञानिक गाओ यिंगदाई ने कहा है कि यह रिसर्च इस बीमारी का इलाज खोजने में मदद करेगी. (फोटोः गेटी)
गाओ यिंगदाई ने कहा है कि अगर आपका ब्लड ग्रुप ए है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. इसका मतलब ये नहीं है कि आप 100 फीसदी कोरोना से संक्रमित हो ही जाएंगे. ब्लड ग्रुप ओ वाले भी लापरवाही न बरतें. इससे पहले भी कई अध्ययन आ चुके हैं कि ब्लड ग्रुप ए, बी और एबी वालों को ब्लड ग्रुप ओ की तुलना में दिल की बीमारियां होने का खतरा ज्यादा रहता है. (फोटोः गेटी)