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केरलः बाढ़ में बह गया था पुल, नदी पार कर आदिवासियों तक पहुंचाई राहत

वायनाड के एसपी और उनकी टीम आदिवासी कॉलोनियों में किराने का सामान पहुंचा रही है. पुलिस के जवान पैदल चलकर ही आदिवासी घरों में आवश्यक सामान पहुंचा रहे हैं.

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वायनाड की नेत्रा कॉलोनी में सामान बांटते पुलिस के जवान (फोटो- गोपी उन्नीथन)
वायनाड की नेत्रा कॉलोनी में सामान बांटते पुलिस के जवान (फोटो- गोपी उन्नीथन)

  • आदिवासी इलाकों में किराने का सामान बांट रही पुलिस
  • पैदल घुम कर आदिवासी घरों को आवश्यक सामान पहुंचा

देश में लागू लॉकडाउन के बीच सभी राज्य अपने स्तर पर लोगों को राहत पहुंचा रहे हैं. लॉकडाउन के दौरान लोग घरों में कैद हैं. लिहाजा केरल में पुलिस प्रशासन दूर दराज के आदिवासी बहुल गांवों में किराने का सामान पहुंचा रहा है.

वायनाड के पुलिस निरीक्षक (एसपी) और उनकी टीम आदिवासी कॉलोनियों में किराने का सामान पहुंचा रही है. पुलिस के जवान पैदल चलकर आदिवासी घरों को आवश्यक सामान पहुंचा रहे हैं.

बाढ़ में बह गया था पुल

दरअसल, केरल में पिछले साल आई बाढ़ की वजह से वायनाड के थिरुन्नेली वन रेंज की नेत्रा कॉलोनी मेनलैंड से कट गई. पिछले साल आई बाढ़ ने इस बस्ती को जोड़ने वाले पुल को भी बहा दिया था.

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कोरोना संकट के बाद केरल सरकार ने राज्य में सभी परिवारों को मुफ्त चावल और किराने का सामान देने की घोषणा की थी. इसी के तहत पुलिस के जवान और एसपी किराने का सामान आदिवासी समुदाय के घरों तक पहुंचा रहे हैं.

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पुल न होने की वजह से सामानों की आपूर्ति करने के लिए एसपी और उनकी टीम ने अपने आधिकारिक वाहनों के जरिये नदी पार करने का फैसला किया. वायनाड जिले में राज्य की सबसे ज्यादा जनजातीय आबादी रहती है.

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वायनाड के एसपी और आईपीएस आर. इलंगो ने बताया कि सरकार की तरफ से आदिवासियों के साथ अच्छा तालमेल बनाए रखने के लिए निर्देश हैं. कोरोना संकट के दौरान हम उनके बीच जागरूकता पैदा करने और आवश्यक सामानों की आपूर्ति करने के लिए नियमित रूप से जा रहे हैं.

आईपीएस आर इलंगो ने बताया कि हम नियमित तौर पर आदिवासी रिहायशी इलाकों में जा रहे हैं. बाढ़ के बावजूद एक छोटा सा पुल बचा हुआ है, लेकिन उस पर भारी वाहन को नहीं ले जाया जा सकता है. इसलिए हम नदी पार करके सामानों की आपूर्ति कर रहे हैं.

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