चीन में बढ़ते कोरोना मामलों के बीच केंद्र सरकार ने भारत बायोटेक की नेजल वैक्सीन iNCOVACC को बूस्टर डोज के रूप में मंजूरी दे दी है. कोविन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध इस वैक्सीन को 18 साल से ज्यादा उम्र के लोग बूस्टर डोज के तौर पर लगवा सकेंगे. सरकार ने इस वैक्सीन की कीमत भी तय कर दी है. नाक से ली जाने वाली इस वैक्सीन को क्या चौथे डोज के रूप में लगवा सकेंगे, इसको लेकर एक्सपर्ट्स का मानना है कि चौथा डोज लेना फायदेमंद नहीं होगा.
कोविड वर्किंग ग्रुप के अध्यक्ष डॉक्टर एनके अरोड़ा ने एक निजी टीवी चैनल से बातचीत में बताया कि इंट्रानेजल वैक्सीन पहले बूस्टर के तौर पर लगाई जा सकती है. अगर किसी व्यक्ति को पहले से ही प्रिकॉशनरी डोज लग चुकी है तो वो इंट्रानेजल वैक्सीन के लिए एलिजिबल नहीं होगा. ये वैक्सीन उनके लिए ही है जिन्होंने प्रिकॉशनरी डोज अभी तक नहीं लिया है.
चौथा डोज कितना कारगर?
चीन में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए भारत में वैक्सीनेशन कार्यक्रम ने एक बार फिर जोर पकड़ा है. इसी बारे में बात करते हुए डॉ. अरोड़ा ने बताया कि CoWIN प्लेटफॉर्म किसी भी तरह की चौथी डोज नहीं स्वीकार करेगा. उन्होंने कहा, “अगर आप चौथा डोज लेना चाहते हैं तो वो इतना कारगर नहीं होगा. जब कोई व्यक्ति बार-बार वैक्सीन लगवाता है तो उसका शरीर उस एंटीजन के लिए प्रतिक्रिया देना बंद कर देता है. या उसका उतना असर नहीं होता है. यही वजह है कि वैक्सीन 6 महीने के अंतराल में दी जाती है. लेकिन बाद में लोगों ने इसे 3 महीने के अंतराल पर लेना शुरू कर दिया. उसका उतना पॉजिटिव असर देखने को नहीं मिला. इसलिए अभी चौथा डोज लेना उतना फायदेमंद नहीं होगा.”
'चौथे डोज के रूप में न लें नेजल वैक्सीन'
इसके अलावा कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रोफेसर विकास मिश्रा ने बताया कि जिन्होंने वैक्सीन की दोनों डोज और उसके बाद बूस्टर डोज लगवा ली हैं, वो भूलकर भी चौथे डोज के रूप में नेजल वैक्सीन को न लें. ऐसा करने पर एंटीजन सिंक फिनोमेना हो सकता है. मतलब यह कि शरीर में अत्यधिक एंटीजन होने से उसके खिलाफ एंटीबॉडी नहीं बन पाएगी. ऐसे में कोरोना वायरस हमला करेगा तो एंटीबॉडी उस एंटीजन की पहचान नहीं करा पाएगा, इससे कोरोना वायरस से संक्रमित होने का खतरा रहेगा.
सरकार ने तय की नेजल वैक्सीन की कीमत
केंद्र सरकार ने नेजल वैक्सीन iNNOVACC को कोविन प्लेटफॉर्म पर लिस्ट कर दिया है और बूस्टर डोज के रूप में लेने के लिए मंजूरी भी दे दी है. सरकार ने इसकी कीमत भी तय कर दी है. निजी बाजारों के लिए नेजल वैक्सीन की कीमत 800 रुपये तय की गई है. वहीं सरकारी अस्पतालों में यह 325 रुपए में उपलब्ध होगी. जानकारी के मुताबिक नेजल वैक्सीनेशन जनवरी के चौथे सप्ताह में शुरू किया जाएगा.
कैसे दी जाएगी वैक्सीन?
यह वैक्सीन नाक के जरिए स्प्रै करके दी जाती है, मतलब वैक्सीन लेने वाले की बांह पर टीका नहीं लगाया जाता. इसकी दो खुराक दी जाती हैं. इस इंट्रानेजल वैक्सीन को भारत में 18 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए बूस्टर डोज के लिए इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए CDSCO से भी मंजूरी मिल गई है. वैक्सीन को वाशिंगटन विश्वविद्यालय, सेंट लुइस के साथ साझेदारी में विकसित किया गया था.