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उत्तर प्रदेश में कोरोना ने ग्रामीण इलाकों में पैर पसारना शुरू कर दिए हैं. संक्रमित मरीजों की संख्या इस कदर बढ़ी है कि स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई हैं. उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के ग्रामीण इलाकों में संक्रमण की तीव्रता ज्यादा देखी जा रही है. महामारी का डर कह लीजिए या जागरूकता, गांव-गांव में लोगों के चेहरे पर मास्क दिखाई देने लगा है. जब डर सताने लगे तो आखिरी विश्वास ईश्वर पर होता है. ऐसे में यूपी में महाराजगंज सुदूर ग्रामीण इलाकों में लोग पूजा-पाठ के जरिए इस संक्रमण से निजात पाने के लिए प्रार्थना कर रहे हैं.
सूर्य को दे रहे अर्घ्य
आस्था और अंधविश्वास या विज्ञान और विश्वास के बीच लड़ाई लंबी है, जहां मदद नहीं पहुंच पा रही है, वहां डर के बीच लोगों को विश्वास का सहारा है. इसी विश्वास के साथ महाराजगंज जिले के गौनरिया गांव में लोगों ने 9 दिनों का अनुष्ठान शुरू कर दिया है. 9 दिनों के इस अनुष्ठान में गांव के सभी महिलाएं और पुरुष गांव से बाहर खेतों में उगते सूरज और डूबते सूरज को अर्घ्य देकर महामारी से निजात पाने के लिए प्रार्थना कर रहे हैं.
गांव की प्रधान भारती भी उन महिलाओं में शामिल हैं, जो सूरज को अर्घ्य देने के लिए महिलाओं की टोली में निकली हैं. भारती का कहना है, "यह विश्वास है कि पूजा पाठ से किसी ईश्वर की शक्ति लगे और यह कोरोना वायरस भाग जाए. भगवान को किसी ने देखा नहीं है, लेकिन यह विश्वास है कि यह पूजा पाठ करने से महामारी खत्म हो जाएगी."
9 दिन का है अनुष्ठान
गांव के रहने वाले बाबू राम बताते हैं यह 9 दिनों का अनुष्ठान है, जिसमें सुबह उगते सूरज को और शाम डूबते सूरज को अर्घ्य दिया जाता है, जिसमें आदिशक्ति की पूजा की जाती है और यह मान्यता है कि पूजने से गांव की हर महामारी हर मुसीबत से आदिशक्ति रक्षा करेंगी. आस्था मजबूत जरूर है, लेकिन नियमों की अनदेखी महामारी बढ़ाएगी इससे गांव वाले वाकिफ हैं. बड़ी संख्या में ग्रामीण एक लाइन से खड़े तो हैं, लेकिन उनके बीच जरूरी सामाजिक दूरी दिखाई पड़ती है. हालांकि कई लोग ऐसे दिखे, जिनके चेहरे पर मास्क नहीं दिखा, उन लोगों ने बताया कि मास्क पहनना भूल गए, आगे से पहनेंगे.
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तीन दिन से चल रहा अनुष्ठान
महराजगंज जिले के इस गांव में 3 दिनों से यह अनुष्ठान चल रहा है, जो अगले 6 दिनों तक जारी रहेगा. आसपास के जितने गांव हैं हर जगह लोग डरे हुए हैं. महराजगंज के कई ग्रामीण इलाकों में लोगों को बुखार की शिकायत है और संक्रमण फैलता जा रहा है. स्थानीय निवासी सत्येंद्र पटेल कहते हैं, "लोगों में डर भी है और जागरूकता भी. क्योंकि आसपास जो हम तस्वीरें देख रहे हैं उसमें बहुत सारे लोगों की मौत हुई है और लोग बीमार हैं. हमारी मान्यता है कि पहले भी जब ये महामारी आई तो इस पूजा पाठ से ठीक हो गई, इसलिए यहां लोग उसी मान्यता के अनुसार प्रार्थना कर रहे हैं."
ईश्वरीय चमत्कार की उम्मीद
ग्रामीण इलाकों में ईश्वर के प्रति विश्वास और महामारी के डर के बीच लोगों को लगता है कि कोई ईश्वरीय चमत्कार होगा और उनके गांव को इस संक्रमण से बचा लेगा. देश के कई हिस्सों में अनुष्ठान, पूजा पाठ, हवन की तस्वीरें सामने आई हैं. इन कर्मकांड से लोगों को उम्मीद है कि वह संक्रमण से बच जाएंगे, लेकिन विज्ञान कहता है कि जब तक महामारी से बचने वाले नियमों का पालन नहीं होगा, कोई भी हमारी मदद नहीं कर सकता. आस्था अपनी जगह है विज्ञान अपनी जगह.