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क्या नए म्यूटेंट वायरस में बदल गए हैं कोरोना के लक्षण? AIIMS डायरेक्टर से जानें सारे सवालों के जवाब

एयरोसोल ट्रांसमिशन में हमें और ध्यान रखने की जरूरत है. पहले लोग ड्रॉपलेट को मेन मानते थे और एयरोसोल को ज्यादा महत्व नहीं देते थे. लेकिन अब माना जा रहा है कि ये दोनों महत्वपूर्ण हैं. सर्फेस वाला अब उतना महत्वपूर्ण नहीं है.

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एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया (फाइल फोटो)
एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कोरोना से देश में मचा है हाहाकार
  • लगातार तीसरे दिन दो लाख से अधिक मामले आए
  • कोरोना से बचने के लिए जान लें सुझाव

देश में कोरोना की वजह से हाहाकर मचा हुआ है. राज्य सरकारें अपनी तरफ से संक्रमण रोकने के लिए कई तरह की सख्ती दिखा रही हैं. लेकिन एक नागरिक के तौर पर हम सभी लोगों को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी. और जिम्मेदारी निभाने के लिए जरूरी है कि हमें कोरोना से जुड़े सभी सवालों के जवाब मालूम हों. आजतक ने AIIMS निदेशक रणदीप गुलेरिया से बात की और आम लोगों से जुड़े सभी महत्वपूर्ण सवाल उनके सामने रखे.  

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सवाल- अगर कोई शख्स किसी कोरोना संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आया और वह Asymptomatic हो तो उसे क्या करना चाहिए?
जवाब- अगर आप Asymptomatic हैं और आपकी टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आई है तो आपको देखना चाहिए कि आपको कोमोरबिडिटी (सहरुग्णता) तो नहीं है. यानी कि आपको शुगर, हार्ट या ब्लडप्रेशर की तकलीफ है तो उसे कंट्रोल करें. इसके अलावा घर पर आइसोलेशन की व्यवस्था है तो फिर घर पर ही आइसोलेट हो जाएं. इसके अलावा आपको सैचुरेशन मॉनिटरिंग करनी है. आपकी ऑक्सीजन सैचुरेशन कितनी है. अपने आप को हाइड्रेट करके रखें. पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स अच्छी मात्रा में लें और अपना तापमान भी मॉनिटर करते रहें. 

इसके अलावा डॉक्टर से भी सलाह करें. क्योंकि उनके साथ टच में रहना बहुत जरूरी है. क्योंकि अगले कुछ दिनों में अगर आपके अंदर कुछ लक्षण दिखते हैं तो फिर आप डॉक्टर से कॉन्टैक्ट कर सकते हो. कुछ जगह पर दवाइयां दी जाती हैं. कुछ मल्टी विटामिन दी जाती हैं. विटामिन सी दी जाती हैं. इसके अलावा और कई दवाई देते हैं तो आप डॉक्टर से संपर्क कर आप दवाई ले सकते हैं. 

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सवाल- मेरी उम्र 80 साल है लेकिन लक्षण गंभीर नहीं हैं, सांस भी सामान्य चल रही है, ऑक्सीजन लेवल भी ठीक है तो क्या मुझे अस्पताल जाना चाहिए?
जवाब- ये बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा हो जाता है कि लक्षण सामान्य हैं लेकिन मैं हाई रिस्क कैटेगरी में हूं. इस स्थिति में अगर आप घर पर भी आइसोलेट हो सकते हैं. लेकिन अगर आप कोविड सेंटर जा सकते हैं तो बेहतर होगा. ताकि आपपर नजदीकी निगरानी की जा सके. अगर आपके घर पर आइसोलेशन की व्यवस्था है और आप किसी अस्पताल के संपर्क में हैं, जिससे कि हालात बिगड़ने पर तुरंत अस्पताल भेजा जा सकता है तो फिर आप होम आइसोलेशन में रह सकते हैं. आप बुजुर्ग हैं तो आपके लिए ज्यादा बेहतर होगा कि आप कोविड सेंटर में रहें, जिससे कि हालात बिगड़ने पर आपकी ठीक से देखभाल की जा सके. 

सवाल- मुझे कोविड था और अब रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है तो फिर ठीक होने के कितने दिनों बाद लोगों से मिलना सही रहेगा?
जवाब- रिसर्च में कहा गया है कि अगर आपको पॉजिटिव हुए दस दिन हो चुके हैं और दो तीन दिनों से आपको बिल्कुल बुखार नहीं रहा हो. आपमें कोरोना के कोई भी लक्षण नहीं दिख रहा हो तो आप लोगों से मिल सकते हैं. आपका RTPCR तब भी पॉजिटिव हो सकता है. क्योंकि RTPCR डेड वायरस को भी पिक करता है. स्टडी में दिखाया गया है कि आप पूरी तरह स्वस्थ हैं. दस दिनों से आपमें कोई लक्षण नहीं दिख रहे हैं तो आप पूरी तरह से नॉन इनफेक्शियस हैं और लोगों से मिल सकते हैं. 

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सवाल- नए म्यूटेंट वायरस में क्या कोरोना के लक्षण और कुछ जुड़े हैं?
जवाब- ज्यादातर लक्षण वही हैं. जुकाम, नजला, गले में खराश, शरीर में दर्द और खांसी होना. लेकिन कुछ लोगों में देखा गया है कि उन्हें सांस से जुड़ी दिक्कत नहीं होती है. उनका पेट खराब रहता है. जैसे- लूज मोशन, डायरिया, उल्टी और बुखार हो गया. इस दफा ऐसे भी पेशेंट देखे जा रहे हैं. पहले भी देखे गए थे लेकिन इस बार ऐसे लक्षण वाले मरीजों के प्रतिशत ज्यादा हैं, जिन्हें गैस्ट्रीक के लक्षण ज्यादा हैं. इसलिए अगर आपको लूज मोशन, डायरिया, उल्टी और बुखार जैसे लक्षण हों तो बेहतर होगा कि आप अपना टेस्ट करा लें, भले ही आपको सांस से जुड़ी कोई समस्या नहीं है. 

सवाल- लांसेट के आर्टिकल में कहा गया है कि यह डिजीज एयरबोर्न है. क्या एयरबोर्न होना अभी की बड़ी बात है? क्या सर्फेस से ट्रांसमिशन हो रहा है?
जवाब- पिछले आठ-नौ महीने से डिबेट चल रही है- एयरबोर्न vs ड्रॉपलेट इंफेक्शन? दोनों के बीच में क्या अंतर है यह समझना जरूरी है. जब हम ड्रॉपलेट इंफेक्शन की बात करते हैं तो वह थोड़े बड़े साइज के हो गए. 5 माइक्रोन से ज्यादा बड़े. ड्रॉपलेट हैं जो बोलने से, खांसने से, छींकने से बाहर निकलता है. अगर कोई कोरोना संक्रमित व्यक्ति ऐसा करता है तो उसके मुंह या नाक से ड्रॉपलेट निकलते हैं, क्योंकि इनका साइज बड़ा है तो ये हवा में नहीं तैरता. वो सीधे सर्फेस पर आ जाता है. इसलिए सर्फेस इंफेक्शन की बात कही गई थी. वहीं एयरबोर्न को एयरोसोल ट्रांसमिशन कहते हैं. इसमें वायरस छोटे छोटे होते हैं. ये 5 माइक्रोन से कम होते हैं इसलिए बहुत देर तक हवा में तैरते हुए रह सकते हैं. यह जमीन पर गिरते नहीं है. 

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यानी कि एयरोसोल ट्रांसमिशन में हमें और ध्यान रखने की जरूरत है. पहले लोग ड्रॉपलेट को मेन मानते थे और एयरोसोल को ज्यादा महत्व नहीं देते थे. लेकिन अब माना जा रहा है कि ये दोनों महत्वपूर्ण हैं. सर्फेस वाला अब उतना महत्वपूर्ण नहीं है. इसलिए बार बार सर्फेस को धोना या साफ करना उतना महत्वपूर्ण नहीं है. हमें अपने हाथ बार बार धोने चाहिए. अब सब्जियां धोना और कपड़े धोना बहुत महत्वपूर्ण नहीं है. एयरबोर्न होने से एक चीज का ध्यान ज्यादा रखने की आवश्यकता है कि घर के अंदर क्रॉस वेंटिलेशन हो. खिड़कियां खोल कर रखें, जिससे कि अगर कमरे के अंदर वायरस है तो वह खिड़की से बाहर निकल जाए. स्वच्छ हवा का आना बेहद जरूरी है. मास्क हमेशा लगाकर रखें, भले ही आपकी दूरी ज्यादा हो.    

सवाल- क्या तीसरी लहर की आशंका है?

जवाब- आउटडोर एनवायरनमेंट बेहतर है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि बाहर हमलोग भीड़ लगाएं. क्योंकि भीड़ भी सुपरस्प्रेडिंग बन सकती है. अगर किसी को एक्सरसाइज करना है तो वह बाहर करें या खुली जगह पर करें. अगर कमरे में करते हैं तो क्रॉस वेंटिलेशन होनी चाहिए. मेरा मानना है कि तैयारी पूरी करनी चाहिए. हमें किसी भी तरह की ढील नहीं देनी चाहिए. दूसरी लहर भी ढील की वजह से देखने को मिल रही है. इसलिए कोविड प्रोटोकॉल का पालन करें. 

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सवाल- खाने से संक्रमण होता है?
जवाब- खाने से वायरस नहीं फैलता है. अगर बाहर से कुछ मंगवाते हैं तो बेहतर है कि डिब्बे को गुनगुने पानी से धो लें. सब्जियां धोकर फ्रीज में रखने के बाद या स्टोर करने के बाद हाथ जरूर साफ करें. 
 

 

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