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सिगरेट पीने से कोविड संक्रमण का कितना खतरा? नॉन स्मोकर्स कितने सेफ? 6 राज्यों में एम्स गोरखपुर की स्टडी में सामने आये से फैक्ट

एम्स गोरखपुर की एक स्टडी में सामने आया है कि जो लोग सिगरेट पीने वालों के संपर्क में रहते हैं, उनमें कोविड से गंभीर बीमारी होने का खतरा ज्यादा रहता है. ये स्टडी देश के 6 राज्यों में की गई थी. स्टडी में सामने आया कि नॉन-स्मोकर्स को गंभीर बीमारी होने का खतरा सेकंड हैंड स्मोकर्स के मुकाबले कम होता है.

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नॉन-स्मोकर्स की तुलना में पैसिव स्मोकर्स में गंभीर कोविड का खतरा ज्यादा होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
नॉन-स्मोकर्स की तुलना में पैसिव स्मोकर्स में गंभीर कोविड का खतरा ज्यादा होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

सिगरेट नहीं पीते हैं, लेकिन स्मोकिंग करने वालों के साथ रहते हैं तो आपके लिए कोविड ज्यादा खतरनाक हो सकता है. चौंकाने वाली ये जानकारी एम्स गोरखपुर की एक रिसर्च में सामने आई है. ये स्टडी 6 राज्यों में की गई थी. 

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ये स्टडी पैसिव स्मोकिंग और कोविड की गंभीरता के बीच लिंक को जानने के लिए की गई थी. स्टडी में सामने आया कि घर या वर्कप्लेस में स्मोकर्स के साथ रहने वालों में गंभीर कोविड होने का खतरा ज्यादा रहता है. 

पैसिव स्मोकिंग या सेकंड हैंड स्मोक उसे कहते हैं जब आप किसी स्मोकिंग करने वाले के साथ रहते हैं, क्योंकि ऐसे में सिगरेट का धुंआ आपके अंदर भी जाता है. 

एम्स गोरखपुर की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. सुरेखा किशोर ने बताया कि हमारी स्टडी में सामने आया है कि स्मोकिंग न करने वालों की तुलना में सेकंड हैंड स्मोकर्स में कोविड ज्यादा गंभीर हो सकता है.

इस स्टडी को करने का मकसद ये था कि ये पता लगाया जा सके कि घर या वर्कप्लेस में सेकंड हैंड स्मोकर्स और नॉन-स्मोकर्स में कोविड कितना गंभीर हो सकता है? 

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स्टडी में क्या सामने आया?

- रिसर्च में सामने आया कि स्मोकिंग से कोविड-19 संक्रमण की संभावना और बीमारी की गंभीरता बढ़ जाती है. 

- स्टडी में बताया गया है कि सेकंड हैंड स्मोक में सात हजार से ज्यादा केमिकल होते हैं, जिससे लंग कैंसर, दिल से जुड़ी बीमारियां और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं और इससे कोविड की गंभीरता बढ़ती है.

- इस स्टडी में 18 साल और उससे ज्यादा उम्र के उन मरीजों को शामिल किया गया था, जो कोविड की वजह से गंभीर रूप से बीमार हुए थे. साथ ही उन मरीजों का डेटा भी लिया गया था जिनमें हल्के या मध्यम लक्षण थे. ये मरीज जनवरी 2020 से फरवरी 2022 के बीच अस्पतालों में भर्ती हुए थे.

- इसमें सामने आया कि जो लोग घर में पैसिव स्मोकिंग के संपर्क में आते हैं, उनमें कोविड की गंभीर होने का खतरा नॉन-स्मोकर्स की तुलना में 3.3 गुना ज्यादा होता है. इसी तरह से जो लोग वर्कप्लेस में सेकंड हैंड स्मोकिंग के संपर्क में आते हैं, उनमें गंभीर कोविड का खतरा 2.19 गुना ज्यादा है.

 

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