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बिहार: कोरोना काल में उप-स्वास्थ्य केंद्र की तस्वीर देखकर रह जाएंगे हैरान, रखा जा रहा पशुओं का चारा

कोरोना महामारी में जहां राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमराई हुई हैं, वहीं एक ऐसे उप-स्वास्थ्य केंद्र की तस्वीर सामनें आई है, जिसके भवन में पशुओं का चारा रखा जा रहा है. 

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 उप-स्वास्थ्य केंद्र में रखा जा रहा पशुओं का चारा
उप-स्वास्थ्य केंद्र में रखा जा रहा पशुओं का चारा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सहरसा के बनगांव में है उप-स्वास्थ्य केंद्र 
  • 2007 में सीएम नीतीश ने किया था उद्घाटन
  • बिना डॉक्टर और नर्स के खंडहर बना भवन

बिहार के सहरसा जिले में बनगांव स्थित उप-स्वास्थ्य केंद्र की तस्वीर हैरान करने वाली है. यहां न तो डॉक्टर हैं और ना हीं नर्स. बदहाली पर आंसू बहा रहे इस उप-स्वास्थ्य केंद्र के बाहर कचड़े का अंबार दिखा, तो वहीं भवन के कमरों में पशुओं का चारा. 2007 में इस उप-स्वास्थ्य केंद्र का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था. 

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सीएम नीतीश ने किया था उद्घाटन
सहरसा के बनगांव स्थित उप-स्वास्थ्य केंद्र 15 साल में खंडहर हो चुका है. बताया गया है कि 2007 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बनगांव के इस उप स्वास्थ्य केंद्र का उद्घाटन किया था और यह स्वास्थ्य केंद्र तकरीबन 6.5 लाख की लागत से बनाया गया था. स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां पर ना कभी डॉक्टर आते हैं और ना हीं नर्स आती हैं. इसी कारण से यह असामाजिक तत्वों का ठिकाना भी बन चुका है.

रखा जा रहा पशुओं का चारा 
हालात अब इतने बदत्तर हो चुके हैं कि गांव के लोगों ने अब इस स्वास्थ्य केंद्र का इस्तेमाल पशुओं का चारा रखने के लिए करना शुरू कर दिया है. बता दें यह उप स्वास्थ्य केंद्र बिहार के कला एवं संस्कृति मंत्री और सहरसा विधायक आलोक रंजन के क्षेत्र में आता है. इस बाबत जब मंत्री आलोक रंजन से बात की गई तो उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के कारण इस उप स्वास्थ्य केंद्र का उपयोग नहीं हो पा रहा है. हालांकि, उन्होंने कहा कि हालात सुधरते ही वह सुनिश्चित करेंगे कि इस उप स्वास्थ्य केंद्र को फिर से कार्यरत किया जाए.

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दूसरे स्वास्थ्य केंद्र की भी हालत खराब 
वहीं बनगांव में ही एक अन्य उप स्वास्थ्य केंद्र की भी हालत ऐसी ही जर्जर है. इस स्वास्थ्य केंद्र पर भी ना कभी डॉक्टर आते हैं ना हीं नर्स. यहां के स्थानीय युवाओं का कहना है कि उन्होंने कुछ दिन पहले बनगांव के इन दोनों उप स्वास्थ्य केंद्रों को चलाने के लिए सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाया था, जिसके बाद सरकार की नींद खुली और एक स्वास्थ्य केंद्र को दुरुस्त करने की कवायद शुरू की गई है.


 

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