कोविड-19 से उच्च मृत्यु दर वाले नौ राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश को निर्देश दिया गया है कि वो मृत्यु दर को कम करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाएं. प्रदेशों को सलाह दी गई कि वे अपने सभी जिलों में मृत्यु दर को एक प्रतिशत से कम रखने की दिशा में कदम उठाएं और इसके लिए कुछ उपाय भी सुझाएं. इन राज्यों को कोविड अस्पतालों में उपलब्ध बेड की संख्या और एम्बुलेंस सुविधाओं के बारे में आम लोगों को अवगत कराने और कम से कम समय में एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराना सुनिश्चित कराने को कहा गया है.
गुरुवार को स्वास्थ्य सचिवों के साथ समीक्षा बैठक की गई. जिसमें इन दस राज्यों के मुख्य सचिव भी मौजूद थे. यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए की गई. इस बैठक में कैबिनेट सचिव राजीव गौबा, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण, आईसीएमआर के महानिदेशक और नीति आयोग में सदस्य (स्वास्थ्य) सहित महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, गुजरात, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, पंजाब, आंध्र प्रदेश और जम्मू एवं कश्मीर राज्य के मुख्य और स्वास्थ्य सचिव शामिल हुए.
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने दस प्रदेशों में कोविड-19 की वर्तमान स्थिति को लेकर एक प्रजेंटेशन भी दिया. प्रजेंटेशन में उच्च मृत्यु दर वाले जिलों और कोविड संक्रमण के लिए परीक्षण, संक्रमित मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों का पता लगाने, निगरानी, बीमारी की रोकथाम करने सहित कार्यनीतियों को और बेहतर बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है.
स्वास्थ्य सचिव ने एक बयान जारी करते हुए कहा, 'यह पाया गया कि पिछले दो सप्ताह के दौरान देश भर में कोविड-19 बीमारी से मरने वालों में 89 प्रतिशत मौतें इन 10 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में हुई हैं. इसलिए, इन राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को निरंतर और कठोर सतर्कता बरतने की जरूरत है, ताकि इसके संक्रमण के प्रसार को रोकने के साथ-साथ इससे होने वाली मौत की घटनाओं को कम करने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें.'
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इन राज्यों को सुझाव दिया गया है कि वे प्रभावी नियंत्रण, संक्रमित लोगों के संपर्क में आने वालों का पता लगाने और निगरानी पर बल दें. इसके साथ ही उनसे नए संक्रमित रोगियों के कम से कम 80 प्रतिशत मामलों में मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों का पता लगाकर उनका 72 घंटों के अंदर परीक्षण सुनिश्चित करने को कहा है.
इन राज्यों को सुझाव दिया गया कि संक्रमण या पुष्टि दर को पांच प्रतिशत से कम रखने के लक्ष्य के साथ सभी जिलों में प्रति दिन प्रति दस लाख की आबादी पर कम से कम 140 परीक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए. एक सुझाव यह भी दिया गया कि सभी राज्य नियंत्रण क्षेत्र व स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों पर एंटीजन परीक्षण कराएं और बीमारी के लक्षण वाले मरीजों के परीक्षण में पुष्टि नहीं होने के बाद फिर से उनकी आरटी-पीसीआर जांच कराएं.