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चेन्नई में कैंसर के 20 मरीजों ने दी कोरोना को मात, सरकारी अस्पताल में हुआ इलाज

कोरोना वायरस से संक्रमित एक स्वस्थ व्यक्ति का इलाज करना उतनी बड़ी चुनौती नहीं है. लेकिन जब कोई व्यक्ति पहले से ही किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हो और कोरोनो वायरस से संक्रमित हो जाए तो कोरोना का इलाज चुनौतीपूर्ण हो जाता है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • इलाज के बाद कोरोना से ठीक हुए कैंसर मरीज
  • डॉक्टरों के सामने दोहरी चुनौती
  • चेन्नई के अस्पताल में 20 मरीजों को मिला जीवनदान

कैंसर खुद में एक घातक बीमारी है और जब कैंसर मरीज कोरोनावायरस से संक्रमित हो जाए तब चिंता और बढ़ जाती है क्योंकि इन दोनों का एक साथ होना और ज्यादा जानलेवा हो सकता है लेकिन, चेन्नई के राजीव गांधी गवर्नमेंट हॉस्पिटल के 20 कैंसर मरीजों ने कोरोना का मात दे दी है.

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एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अस्पताल में भर्ती 29 कैंसर रोगियों में से 20 अब सफलतापूर्वक कोरोना से ठीक हो गए हैं. सात कोरोना संक्रमित कैंसर रोगियों का अभी भी अस्पताल में इलाज चल है, जबकि दो की मत्यु हो गई.

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कोरोना वायरस से संक्रमित एक स्वस्थ व्यक्ति का इलाज करना बड़ी चुनौती नहीं है. लेकिन जब कोई व्यक्ति पहले से ही किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हो और कोरोनो वायरस से संक्रमित हो जाए तो कोरोना का इलाज चुनौतीपूर्ण हो जाता है.

राजीव गांधी गवर्नमेंट हॉस्पिटल की डीन जयंती रंगराजन ने कहा कि ऐसे व्यक्ति पहले से ही मनोवैज्ञानिक चुनौती से गुजर रहे होते हैं, नतीजतन, इलाज में में जटिलताएं बढ़ जाती हैं."

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उन्होंने कहा कि कैंसर से पीड़ित व्यक्ति का इम्यूनिटी लेवल कम होता है और इसलिए कोरोना वायरस संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है.

जयंती रंगराजन ने कहा कि कोरोना और कैंसर की दवाओं के कोई इंटरैक्शन नहीं है.

उन्होंने कहा कि कैंसर रोगियों को उच्च कैलोरी और प्रोटीन से भरपूर विशेष आहार दिए गए. रंगराजन के अनुसार, सबसे कम उम्र की कैसर रोगी 13 वर्षीय एक लड़की थी और सबसे ज्यादा उम्र के एक 73 वर्षीय बुजुर्ग थे.

 

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