देश में कोरोना की दूसरी लहर का कहर थमता नजर आ रहा है, लेकिन तीसरी लहर की आशंका के चलते लोगों में अभी भी डर है. एक्सपर्ट लगातार आगाह कर रहे हैं कि तीसरी लहर बच्चों के लिए घातक हो सकती है. ऐसे में वैक्सीनेशन अभियान को जोरों पर चलाया जा रहा है.
इस बीच ऑक्सफोर्ड से जॉन रेडक्लिफ हॉस्पिटल के डॉक्टर अमित गुप्ता ने 'आजतक' से खास बातचीत में बताया कि यूके में 25 फीसदी हेल्थ वर्कर में वैक्सीन को लेकर हिचक है. साथ ही उन्होंने कोरोना की तीसरी लहर और बच्चों पर इसके खतरे जैसे तमाम सवालों के जवाब भी दिए.
यूके में 25 फीसदी हेल्थ वर्कर में वैक्सीन को लेकर हिचक
जॉन रेडक्लिफ हॉस्पिटल के डॉक्टर डॉ अमित गुप्ता ने कहा कि वैक्सीन को लेकर हिचक बड़ी आम चीज है. उन्होंने बताया कि यूके में 12 से 14 हजार हेल्थ वर्कर के बीच वैक्सीन को लेकर सर्वे किया गया, जिसमें सामने आया कि 25 फीसदी लोगों में वैक्सीन को लेकर हिचक है.
डॉ अमित गुप्ता ने कहा कि जब डॉक्टर्स में हिचक है तो हम क्यों न मान के चलें कि समाज में ऐसा नहीं होगा. इस हिचक को खत्म करने का तरीका यही है कि वैक्सीनेशन का डाटा पारदर्शी तरीके से सामने रखा जाया.
वैक्सीन के असर के बारे में लोगों को बताया जाए कि इससे किसे नुकसान हुआ, किसकी जान गई और कितने स्वस्थ हैं. ताकि लोगों में कोई शक न हो. इससे लोगों का वैक्सीन पर विश्वास बढ़ेगा.
क्या है कोरोना की तीसरी लहर का सच?
इस सवाल के जवाब में जॉन रेडक्लिफ हॉस्पिटल के डॉ अमित गुप्ता ने कहा कि जब कोरोना की दूसरी लहर पीक पर थी और रोजाना 3 लाख के करीब केस आ रहे थे, तो ऐसा नहीं था कि उससे बच्चे अछूते रहे हों. बच्चे भी संक्रमित हो रहे थे. लेकिन अभी ऐसा कोई डाटा नहीं आ पाया है, जिससे पता चले कि कितने बच्चे संक्रमित हुए और कितनों की हालत गंभीर हुई या कितनों को अस्पताल में भर्ती या फिर ऑक्सीजन सपोर्ट में रखना पड़ा.
बच्चों के लिए कितना डरने की जरूरत?
इसके जवाब में उन्होंने कहा कि तीसरी लहर से पहले हमने काफी स्वास्थ्य ढांचा सुधार लिया होगा, बड़ी आबादी को वैक्सीन लग चुकी होगी, अस्पतालों पर बोझ कम होगा. ऐसे में सरकार को हड़बड़ी में बच्चों के हॉस्पिटल बनाने या बहुत ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए. लेकिन हमें सतर्क जरूर रहना है, लापरवाह नहीं होना है. डॉ गुप्ता ने आगे कहा कि अभी तक के तीनों वैरिएंट ने बच्चों पर कोई खास असर नहीं डाला है, ऐसे में भविष्य में क्या होता है, ये कहना थोड़ा मुश्किल है.
सभी उम्र के बच्चों को एक ही वैक्सीन लगाना सही होगा?
इस सवाल के जवाब में डॉ अमित गुप्ता ने कहा कि अमेरिका में फाइजर वैक्सीन दी जानी शुरू हो गई है, यूके में भी इसकी शुरुआत हो रही है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है बच्चों में कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है, अभी वैक्सीनेशन का मुख्य उद्देश्य वायरस के प्रसार को रोकना है. उन्होंने कहा कि बच्चों में जो भी दिक्कतें आ रही हैं, वो करीब 10 प्लस उम्र वालों को आ रही है. ऐसे में हो सकता है बच्चों के लिए वैक्सीन की एक स्टैंडर्ड डोज सेट कर दिया जाए. हालांकि, इस पर अभी रिसर्च हो रहा है.