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सवालों में मोदी सरकार की वैक्सीन पॉलिसी, विपक्ष के बाद अब कोर्ट भी कड़क

भारत में जारी वैक्सीनेशन की धीमी रफ्तार को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं. पहले विपक्षी पार्टियां केंद्र को निशाने पर ले रही थीं, अब सुप्रीम कोर्ट ने भी वैक्सीन नीति को लेकर गंभीर प्रश्न पूछे हैं.

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केंद्र सरकार की वैक्सीन नीति पर खड़े हो रहे हैं सवाल (फोटो: पीएम मोदी, PIB)
केंद्र सरकार की वैक्सीन नीति पर खड़े हो रहे हैं सवाल (फोटो: पीएम मोदी, PIB)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • वैक्सीनेशन को लेकर निशाने पर केंद्र सरकार
  • विपक्ष लगातार कर रहा है तीखा वार
  • सुप्रीम कोर्ट ने भी मांगी पूरी डिटेल्स

कोरोना की दूसरी लहर के असर को कम करने के लिए और तीसरी लहर के प्रकोप से बचने के लिए देश में वैक्सीनेशन का काम जारी है. अबतक पूरे देश में 22 करोड़ से अधिक वैक्सीन की डोज़ लगाई जा चुकी हैं. लेकिन जिस तरह से वैक्सीन नीति को आगे बढ़ाया जा रहा है, उसपर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. 

केंद्र सरकार द्वारा तैयार की गई इस नीति पर अब लगातार निशाना साधा जा रहा है, विपक्ष पहले ही केंद्र की वैक्सीन नीति को फेल करार दे रहा था और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार से सख्त सवाल पूछ लिए हैं. ऐसे में सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चलाने का दावा करने वाली केंद्र सरकार इस वक्त अपनी ही वैक्सीन नीति को लेकर चौतरफा घिरती हुई नज़र आ रही है. 

वैक्सीन नीति पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
देश में जारी टीकाकरण अभियान को लेकर सर्वोच्च अदालत ने सख्त रुख अपनाया. केंद्र को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 18 से 44 साल के उम्र के लिए लागू मौजूदा वैक्सीन नीति तर्कहीन और मनमानी है. अदालत ने ये भी पूछा कि आम बजट में वैक्सीन के लिए जिन 35 हजार करोड़ रुपये का ऐलान हुआ था, उनका इस्तेमाल यहां क्यों नहीं किया जा रहा है.  

वैक्सीनेशन में हो रही देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब देश के नागरिकों के अधिकार संकट में हो, तब अदालत इस तरह मूकदर्शक नहीं बन सकती है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने अब केंद्र की वैक्सीन नीति का पूरा हिसाब-किताब मांग लिया है. अब केंद्र को बताना होगा कि उसने कब-कब वैक्सीन खरीदी, पूरे देश को वैक्सीन लगाने के लिए उसका क्या प्लान है. अदालत में ये जवाब दो हफ्ते में देने होंगे. 

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क्लिक करें: 'मनमानी और तर्कहीन' है ये वैक्सीन पॉलिसी, 18-44 ऐज ग्रुप के टीकाकरण पर SC की तल्ख टिप्पणी

अभी देश में वैक्सीनेशन के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन को तवज्जो दी जा रही है, सुप्रीम कोर्ट ने इसपर भी सवाल खड़े किए हैं. अदालत का कहना है कि देश के ग्रामीण इलाकों में बड़ा तबका ऐसा है, जिसकी पहुंच इंटरनेट तक नहीं है. ऐसे में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कैसे होगा और फिर टीका कैसे लग पाएगा. SC ने कहा कि केंद्र को अपनी वैक्सीन नीति में बदलाव करना चाहिए और लोगों की परेशानियों को देखते हुए इसे तैयार करना चाहिए.

केंद्र पर हमलावर है विपक्ष
कोरोना संकट से निपटने की बात हो या फिर वैक्सीनेशन का काम, विपक्षी पार्टियों की ओर से केंद्र पर जमकर निशाना साधा गया है. भारत में अभी दो वैक्सीन का इस्तेमाल बड़े स्तर पर हो रहा है, शुरुआत में केंद्र ने इन वैक्सीन की खरीद कर राज्यों को सौंपी, लेकिन जब 18 प्लस के लिए टीकाकरण खोला गया तो राज्यों को खुद वैक्सीन लेने की छूट दी गई. लेकिन कई राज्यों सरकारों का आरोप है कि वैक्सीन निर्माताओं से वैक्सीन मिल नहीं रही है, क्योंकि वो केंद्र को प्राथमिकता के तौर पर सप्लाई कर रहे हैं.

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फोटो: PTI

दिल्ली, तमिलनाडु, राजस्थान, ओडिशा, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्य सरकारों ने वैक्सीन ना मिलने का आरोप लगाया. दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, ओडिशा में तो 18 प्लस के लिए टीकाकरण रोकने की नौबत आ गई और देश में वैक्सीनेशन की रफ्तार धीमी पड़ गई. जब राज्य सरकारों ने ग्लोबल टेंडर निकाले तो विदेशी कंपनियों ने ये कहते हुए इनकार कर दिया कि वो सिर्फ केंद्र को वैक्सीन देंगे. 

क्लिक करें: 35 हजार करोड़ के फंड का इस्तेमाल 18 से 44 साल की आबादी को फ्री वैक्सीन देने में क्यों नहीं हो सकता? SC ने केंद्र से पूछा

राज्य सरकारों से इतर राजनीतिक दल भी केंद्र की नीति पर सवाल खड़े कर रहे हैं. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी लगातार वैक्सीनेशन के मुद्दे पर आक्रामक रुख अपना रहे हैं और केंद्र से देशव्यापी मुफ्त टीकाकरण अभियान चलाने की बात कर रहे हैं. राहुल गांधी ने वैक्सीन नीति में केंद्र से अपील की है कि सारी वैक्सीन केंद्र इकट्ठा करे और उसके बाद राज्यों को दे, ताकि राज्य अलग-अलग वैक्सीन लेने ना जाएं.

सिर्फ राहुल गांधी ही नहीं, बल्कि ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, एमके स्टालिन समेत कई विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार से यही मांग की है. हालांकि, दूसरी ओर बीजेपी लगातार आरोप लगा रही है कि विपक्षी पार्टियों के शासित राज्यों में वैक्सीन की बर्बादी हो रही है, इसलिए रफ्तार धीमी है. 

कैसे दूर होगा वैक्सीन का संकट?
अब केंद्र सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती कम वक्त में ज्यादा वैक्सीन उपलब्ध करवाना है. केंद्र ने जिस तरह कई देशों को वैक्सीन दी, उसपर देश में कई तरह के सवाल खड़े हुए. लेकिन अब केंद्र का दावा है कि साल के अंत तक टीकाकरण पूरा हो जाएगा. दिसंबर तक भारत के पास 216 करोड़ वैक्सीन की डोज़ उपलब्ध होंगी. 

अभी देश में 22 करोड़ वैक्सीन लग चुकी हैं, जून में करीब 12 करोड़ डोज़ उपलब्ध होंगी. वहीं, जुलाई-अगस्त में ये संख्या 20-25 करोड़ डोज़ तक पहुंचेंगी. उसके बाद संख्या तेजी से बढ़ती जाएगी. केंद्र का लक्ष्य है कि जुलाई-अगस्त से देश में एक दिन में एक करोड़ वैक्सीन की डोज़ लगाई जाए. हालांकि, मौजूदा रफ्तार को देखते हुए ये लक्ष्य पाना काफी मुश्किल लगता है. 

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