देश में कोरोना वैक्सीनेशन की धीमी होती रफ्तार के बीच एक अच्छी खबर है. टीके के उत्पादन को बढ़ाने के लिए रूस ने बड़ी पहल की है. भारत की सबसे बड़ी फार्मा कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट के साथ रूस अपनी वैक्सीन स्पुतनिक-वी का टेक्नोलॉजी को शेयर करने के लिए तैयार हो गया है. अब कोविशील्ड के अलावा सीरम में स्पुतनिक-वी का भी उत्पादन होगा.
आपको बता दें कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से रूस की वैक्सीन स्पुतनिक-V बनाने के लिए भी परीक्षण लाइसेंस की अनुमति मांगी थी. ड्रग कंट्रोलर ने शुरुआती अनुमति दे दी है. सीरम पहले से ही कोविशील्ड (Covishield) का उत्पादन कर रही है.
फिलहाल, भारत में स्पुतनिक-वी का उत्पादन डॉ रेड्डीज लेबोरेटरीज द्वारा भी किया जा रहा है. स्पुतनिक को DCGI द्वारा आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी दी गई है. इस रूसी वैक्सीन का इस्तेमाल 14 मई से शुरू हुआ था. स्पुतनिक अब तक 50 से अधिक देशों में रजिस्टर्ड है. एक स्टडी के मुताबिक, इस वैक्सीन की प्रभावकारिता (दोनों डोज) 97.6 फीसदी है.
उधर, सीरम ने पहले ही बता दिया है कि वह जून में 10 करोड़ कोविशील्ड वैक्सीन के डोज का निर्माण और आपूर्ति कर सकेगी. सीरम नोवावैक्स वैक्सीन का निर्माण भी कर रही है, जिसके लिए अमेरिका से नियामक मंजूरी का इंतजार है.
भारत सरकार की ओर से इस साल में ही वैक्सीनेशन के अभियान को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. अभी तक देश में 22 करोड़ के आस-पास वैक्सीन की डोज़ दी जा चुकी हैं. जून में करीब 12 करोड़ डोज़ उपलब्ध होंगी, लेकिन जुलाई-अगस्त से हर महीने 20-25 करोड़ डोज़ उपलब्ध होने के आसार हैं.