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बिहार में थमी कोरोना की रफ्तार, यूपी में अब भी बढ़ रहे केस

ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि यूपी की तुलना में बिहार ने अपनी जनसंख्या के अनुपात में ज्यादा संख्या में टेस्ट किए हैं. यूपी में टेस्ट की वास्तविक संख्या भले ज्यादा है लेकिन जनसंख्या के अनुपात में ये बेहद कम है. वास्तव में यूपी ने किसी भी अन्य राज्य की तुलना में ज्यादा टेस्ट किए हैं, लेकिन यह संख्या प्रदेश की आबादी और इसके केसलोड के हिसाब से पर्याप्त नहीं है.

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यूपी में लगातार बढ़ रहे कोरोना केस (सांकेतिक-पीटीआई)
यूपी में लगातार बढ़ रहे कोरोना केस (सांकेतिक-पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बिहार में एक्टिव केसों की संख्या करीब 13,000
  • यूपी में एक्टिव केस की संख्या 63,000 से ज्यादा
  • बिहार में आबादी के अनुपात में केस और मौतें कम

दक्षिणी भारतीय राज्यों की तुलना में उत्तर प्रदेश और बिहार में कोरोना मामलों की संख्या कम है. हालांकि, जनसंख्या के लिहाज से उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य और बिहार तीसरा सबसे बड़ा राज्य है. लेकिन इन दोनों राज्यों में कोरोना की पर्याप्त टेस्टिंग नहीं हो रही है.

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आम तौर पर किसी भी चर्चा में यूपी और बिहार का जिक्र एक साथ आता है, लेकिन कोरोना वायरस के मामले में दोनों के हालात अलग हैं.

covid19india.org की ओर से जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त के पहले हफ्ते तक बिहार और यूपी में हर दिन जुड़ने वाले नए केसों की संख्या में ज्यादा अंतर नहीं था,  लेकिन 10 अगस्त के बाद से दोनों के रास्ते अलग हो गए. बिहार में हर दिन नए केस की संख्या तेजी से नीचे आई है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह लगातार बढ़ रही है.

बिहार में नियंत्रण में कोरोना संकट

नतीजतन, अब बिहार में एक्टिव कोरोना केसों की संख्या सिर्फ 13,000 के करीब है, जबकि यूपी में एक्टिव केस 63,000 से ज्यादा हैं. कम मृत्यु दर और कम नए केस और तेजी से रिकवरी के चलते बिहार एक्टिव केस की संख्या अब जुलाई के अंत के स्तर पर पहुंच गई है.

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ऐसा इसलिए नहीं हुआ है क्योंकि बिहार अपेक्षाकृत छोटा राज्य है. उत्तर प्रदेश की तुलना में बिहार में, इसकी जनसंख्या के अनुपात में केस और मौतें कम हैं. यूपी की तुलना में यहां इसकी जनसंख्या के अनुपात में मौतें भी कम हैं.

ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि यूपी की तुलना में बिहार ने अपनी जनसंख्या के अनुपात में ज्यादा संख्या में टेस्ट किए हैं. यूपी में टेस्ट की वास्तविक संख्या भले ज्यादा है लेकिन जनसंख्या के अनुपात में ये बेहद कम है. वास्तव में यूपी ने किसी भी अन्य राज्य की तुलना में ज्यादा टेस्ट किए हैं, लेकिन यह संख्या प्रदेश की आबादी और इसके केसलोड के हिसाब से पर्याप्त नहीं है.

जुलाई की शुरुआत में यूपी, बिहार की तुलना में तीन गुना ज्यादा टेस्ट कर रहा था और इसका टेस्ट पॉजिटिविटी रेट (TPR) कम था. लेकिन सितंबर की शुरुआत से यूपी, बिहार की तुलना में दोगुने से भी कम टेस्ट करने लगा और इसका पॉजिटिविटी रेट बिहार से ज्यादा हो गया.

स्वास्थ्य सुविधाओं में काफी सुधार

बिहार अपने मौजूदा सुधार के पीछे बेहतर टेस्टिंग को जिम्मेदार ठहराता है. राज्य के स्वास्थ्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कुछ दिन पहले एक इंटरव्यू में इंडिया टुडे की डाटा इंटेलीजेंस यूनिट (DIU) को बताया था कि राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं में काफी सुधार किया गया है जिससे कोरोना का ग्राफ नीचे लाने में मदद मिली.

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प्रत्यय अमृत ने कहा, "पिछले एक महीने में ही हमने 3,500 डॉक्टरों और 4,000 नर्सों की नियुक्ति की. हमने वर्क रोटेशन की घोषणा की ताकि हमारे फ्रंटलाइन वर्कर्स, हेल्थकेयर स्टाफ, पुलिस और अन्य कर्मियों को पर्याप्त आराम भी मिल सके. हमने सभी डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को एक महीने का बोनस वेतन भी दिया है." उन्होंने कहा कि बिहार ने टेस्ट सुविधा को लोगों तक पहुचाया है और सुरक्षा अभियान पूरे जोरों पर है.

शुक्रवार को 24 घंटे में 86,000 से ज्यादा केस दर्ज हुए और 1000 से ज्यादा मौतें हुईं. इसके साथ ही भारत में कोरोना केसों की संख्या 58 लाख से ज्यादा हो गई है. महामारी अब तक कुल 92,290 लोगों की जान ले चुकी है.

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