कोरोना वायरस संकट के बीच राहत की खबर है. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक देश के कई राज्यों में कोरोना वायस के मामले में तेजी से कमी देखी जा रही है. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक भारत में कोरोना का पीक बीती सात मई को था. इसके बाद से कोरोना के नए मामलों में 69 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है.
टेस्टिंग बढ़ी, पॉजिटिविटी घटी
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 531 जिलों में अप्रैल 28 से चार मई तक रोजाना 100 से ज्यादा मामले दर्ज किए जा रहे थे. 10 मई के बाद से सक्रिय मामलों में 18 लाख से ज्यादा की कमी देखी गई है. पिछले तीन सप्ताह में भारत में कोरोना टेस्टिंग तेजी से बढ़ाई गई है लेकिन इस दौरान भी संक्रमण दर में कमी देखी गई है. भारत में संक्रमण दर 8.31 प्रतिशत है. भारत में अब डेली पॉजिटिविटी रेट 6.62 प्रतिशत है. यह अप्रैल 21 के बाद से न्यूनतम है.
सक्रिय मामले 50 प्रतिशत तक कम
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि सक्रिय मामले 50 प्रतिशत तक कम हो गए हैं. एक दिन में सक्रिय मामलों में 1.3 लाख की कमी देखी गई है. 30 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में एक हफ्ते तक मामले लगातार कम हुए हैं. यह पॉजिटिव ट्रेंड है. उन्होंने आगे बताया कि बीते 24 घंटे में 1,27,000 मामले दर्ज किए गए हैं. 28 मई के बाद से देश में कोरोना के नए मामले दो लाख से कम रिपोर्ट हुए हैं. देश में संक्रमण दर में गिरावट देखी गई है. उन्होंने कहा कि ठीक हुए मामले अब रोजाना के संक्रमित मामलों से ज्यादा हैं. अब देश में रिकवरी बढ़ गई है और यह 92 प्रतिश है.एक सप्ताह में औसतन 20 लाख टेस्ट किए हुए हैं.
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वैक्सीन की कमी नहीं- ICMR
ICMR के डॉक्टर बलराम भार्गव ने कहा कि वैक्सीन की किल्लत नहीं है. जुलाई और अगस्त के मध्य तक हमारे पास प्रतिदिन एक करोड़ लोगों को वैक्सीनेट करने के लिए पर्याप्त वैक्सीन होगी. हमें पूरा विश्वास है कि दिसंबर तक हम देश की पूरी जनसंख्या को वैक्सीन लगा देंगे.नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वीके पॉल ने कहा कि वैक्सीन के डोज के शेड्यूल में कोई बदलाव नहीं है. कोविशील्ड की दो डोज दी जाएगी. कोवैक्सीन के लिए भी यही नियम है. पहली डोज के बाद दूसरी डोज 12 सप्ताह के बाद दी जाएगी.
वैक्सीन के मिश्रण को लेकर डॉ. वीके पॉल ने कहा कि अन्य देशों में इस पर रिसर्च जारी है. यह विज्ञान का मामला है. यह मसला अभी हल नहीं हुआ है. हम इसपर रिसर्च प्रोग्राम की तरह काम कर सकते हैं. विज्ञान को इसे सुलझाने दीजिए. तबतक वैक्सीन की मिक्सिंग नहीं की जाएगी.