चीन में कोरोना का संक्रमण जिस तेजी से बढ़ रहा है, वैसा वहां पहले कभी नहीं देखा. वहां महामारी आउट ऑफ कंट्रोल हो चुकी है. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी माना था कि कोरोना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है.
हालांकि, इन सबके बावजूद चीन कोरोना को लेकर आंकड़े नहीं दे रहा है. पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट ने उसकी पोल खोल दी है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन की वीकली रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में एक हफ्ते में कोरोना के नए मामलों में करीब 50 फीसदी का इजाफा हुआ है. रिपोर्ट बताती है कि 26 दिसंबर से 1 जनवरी के बीच में कोरोना के 2.18 लाख से ज्यादा नए मामले सामने आए हैं. जबकि, इससे 12 से 18 दिसंबर के बीच 1.47 लाख नए मामले सामने आए थे. इस हिसाब से चीन में कोरोना के नए मामले 48 फीसदी से ज्यादा बढ़ गए हैं.
इतना ही नहीं, चीन कोरोना से होने वाली मौतों के जो आंकड़े दे रहा है वो भी बहुत कम है. WHO की रिपोर्ट बताती है कि 26 दिसंबर से 1 जनवरी के बीच चीन में कोरोना से 648 मौतें हुईं हैं.
इन सबके अलावा चीन में अस्पतालों में भर्ती होने वाले कोरोना मरीजों की संख्या भी 48 फीसदी बढ़ गई है. बीते हफ्ते चीन के अस्पतालों में साढ़े 22 हजार नए मरीज भर्ती हुए हैं.
जिनपिंग ने माना था- बड़ी चुनौती बनी हुई है
नए साल पर राष्ट्र के नाम संबोधन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने माना था कि कोरोना बड़ी चुनौती बना हुआ है.
जिनपिंग ने कहा था, कोरोना के खिलाफ लड़ाई में हम नए फेज में आ चुके हैं और ये अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है.
हालांकि, इस दौरान भी उन्होंने अपनी कोविड पॉलिसी की तारीफ की थी. उन्होंने कहा था कि कोविड की शुरुआत से ही हमने अपने लोगों और उनकी जिंदगी को सबसे ऊपर रखा. विज्ञान पर आधारित नीति अपनाई और लोगों की जिंदगियां बचाने के लिए सब जरूरी कदम उठाए.
चीन ने सारी पाबंदियां भी हटाईं
चीन में जहां संक्रमण तेज रफ्तार से बढ़ रहा है, बावजूद इसके वहां सारी पाबंदियां हटने वालीं हैं. चीन में 8 जनवरी से अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए क्वारनटीन रहना जरूरी नहीं होगा. इससे पहले तीन साल तक चीन में आने वाले यात्रियों को दो हफ्ते तक क्वारनटीन रहना जरूरी था.
चीन ने कोविड-19 को 2020 से खतरनाक संक्रामक बीमारी की 'A' कैटेगरी में रखा था. इसे ब्यूबोनिक प्लेग और हैजा के बराबर माना था. लेकिन अब कोविड-19 को 'B' कैटेगरी में डाला जाएगा. यानी, चीन में अब कोविड-19 खतरनाक संक्रामक बीमारी नहीं रहेगी.
इसके पीछे चीन का तर्क है कि कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट ज्यादा खतरनाक नहीं है. चीन के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि ओमिक्रॉन, डेल्टा की तरह जानलेवा और खतरनाक नहीं है.
इतना ही नहीं, चीन अब कोरोना के मामलों का रिकॉर्ड भी नहीं रखेगा. चीन में नए साल कोरोना के नए मामलों का हिसाब-किताब नहीं रखा जाएगा.
तीन महीने, तीन लहरों का खतरा!
चीन के महामारी विशेषज्ञ वू जुन्यो ने पिछले महीने दावा किया था कि चीन में तीन महीने में तीन लहरें आ सकतीं हैं. उन्होंने दावा किया कि चीन अभी पहली लहर का सामना कर रहा है और इसका पीक मिड-जनवरी में आ सकता है.
उन्होंने कहा कि 21 जनवरी से चीन का लूनार न्यू ईयर भी शुरू हो रहा है और इस वजह से लोग ट्रैवल करेंगे, जिस कारण दूसरी लहर शुरू होगी. इस दौरान लाखों लोग ट्रैवलिंग करते हैं. इसलिए जनवरी के आखिर से दूसरी लहर शुरू हो सकती है जो मिड-फरवरी तक चलेगी.
जबकि, तीसरी लहर फरवरी के आखिर से शुरू होने का अंदेशा है. वू जुन्यो का कहना है कि हॉलीडे के बाद लोग फिर से ट्रैवल करेंगे और इस कारण तीसरी लहर शुरू हो सकती है. तीसरी लहर फरवरी के आखिर से मिड-मार्च तक चल सकती है.
हाल ही में अमेरिका के एक रिसर्च इंस्टीट्यूट ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि 2023 में चीन में कोरोना विस्फोट हो सकता है और अगले साल 10 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो सकती है.