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अमेरिका के बाद यूरोप में भी कोरोना से 'महा-तबाही' का अलर्ट, WHO ने चेताया

डेल्टा वैरिएंट की वजह से यूरोप के कई देशों में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. इस बीच डब्ल्यूएचओ ने सोमवार को कहा कि अगर हालात नहीं सुधरे तो 1 दिसंबर तक 2 लाख मौतें हो जाएंगी.

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यूरोप में तेजी से बढ़ रहा है कोरोना. (फाइल फोटो-PTI)
यूरोप में तेजी से बढ़ रहा है कोरोना. (फाइल फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • यूरोप में जून 2020 में पहली लहर काबू में आ गई थी
  • यूके, फ्रांस, जर्मनी, इटली में जुलाई 2020 से दूसरी लहर शुरू

दुनियाभर में कोरोना का संक्रमण (Coronavirus) एक बार फिर से बढ़ता जा रहा है. अमेरिका में कोरोना (Covid 19) ने फिर से तबाही मचानी शुरू कर दी है. वहां की आधी से ज्यादा आबादी पूरी तरह से वैक्सीनेट (Vaccinate) हो चुकी है, उसके बावजूद कोरोना के मामले (Covid Cases) तेजी से बढ़ रहे हैं. अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों और मरने वालों की संख्या भी बढ़ रही है. इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने यूरोप (Europe) में भी कोरोना की 'महातबाही' की चेतावनी दी है.

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डब्ल्यूएचओ यूरोप के डायरेक्टर हांस क्लूज ने दिसंबर तक यूरोप में 2 लाख से ज्यादा और मौतें होने की आशंका जताई है. सोमवार को उन्होंने बताया कि यूरोप में एक बार फिर से मौतों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, खासकर गरीब देशों में. उन्होंने बताया, 'पिछले हफ्ते इन देशों में मौतों की संख्या में 11% की बढ़ोतरी हुई है. अगर यही हाल रहा तो 1 दिसंबर तक यूरोप में 2.36 लाख से ज्यादा मौतें होंगी.' यूरोप में अब तक 12.69 लाख कोविड मौतें (Covid Deaths) हो चुकी हैं.

डेल्टा वैरिएंट है संक्रमण बढ़ने की वजह?

कोरोना संक्रमण का डेल्टा वैरिएंट (Delta Variant) घातक होता जा रहा है. अमेरिका में भी इसी वैरिएंट की वजह से मामले बढ़ रहे हैं और डब्ल्यूएचओ का कहना है कि यूरोप में भी मामले बढ़ने की पीछे यही वैरिएंट है. WHO के मुताबिक, यूरोप में अब तक कोरोना के करीब 6.5 करोड़ मामले आ चुके हैं. यूरोप के 53 में से 33 देशों में पिछले 14 दिनों में कोरोना के मामलों में 10% की बढ़ोतरी हुई है. 

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क्या यूरोप में तीसरी लहर आने वाली है?

जून 2021 में वायरोलॉजी पर एक साइंस जर्नल छपा था. इसमें कहा गया है कि यूरोप में तीसरी लहर आएगी या नहीं, ये बात वैक्सीन (Vaccine) की एफिकेसी पर निर्भर करती है. अगर वैक्सीन ज्यादा असरदार नहीं है और ज्यादा लंबे वक्त तक सुरक्षा नहीं देती है, तो इस गर्मी में वहां तीसरी लहर आने का अनुमान है. इस जर्नल में सुझाव दिया गया था कि तीसरी लहर को रोकने के लिए कड़े उपाय अपनाने होंगे.

वहीं, WHO ने भी कहा है कि यूरोप में भले ही आधी से ज्यादा आबादी को वैक्सीन लग चुकी है, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों से वैक्सीनेशन धीमा हुआ है और इसका असर बढ़ते कोरोना के मामलों के रूप में दिख रहा है. उसका कहना है कि कई देशों में अभी भी सिर्फ 6% आबादी ही वैक्सीनेट हुई है. यही नहीं, कई इलाकों में तो 10 में से सिर्फ 1 हेल्थवर्कर को ही वैक्सीन दी गई है. WHO का कहना है कि सदस्य देशों को छोटे और गरीब देशों तक वैक्सीन पहुंचानी होगी और वहां की आबादी को भी वैक्सीनेट करना होगा.

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कितनी खतरनाक थी पहली और दूसरी लहर?

यूरोप में जून 2020 तक पहली लहर पर काबू पा लिया गया था. पहली लहर के दौरान यूके में 2.82 लाख, फ्रांस में 1.54 लाख, इटली में 2.40 लाख, जर्मनी में 1.95 लाख और स्पेन में 2.56 लाख केस सामने आए थे. 

इसके बाद जुलाई से ही कोरोना के मामले बढ़ने शुरू हो गए थे. दूसरी लहर के दौरान यूके में 67.57 लाख, फ्रांस में 52.70 लाख, इटली में 45.34 लाख, जर्मनी में 39.47 लाख और स्पेन में 48.47 लाख केस बढ़ गए. 

इसी तरह से पहली लहर में यूके में 40 हजार, फ्रांस में 30 हजार, इटली में 35 हजार, जर्मनी में 9 हजार और स्पेन में 30 हजार के आसपास मौतें हुई थीं. जबकि, दूसरी लहर के दौरान यूके में 1.32 लाख, फ्रांस में 1.04 लाख, इटली में 1.29 लाख, जर्मनी में 92 हजार और स्पेन में 84 हजार बढ़ गई. 

यूके में दूसरी लहर जुलाई 2020 से अगस्त 2021 तक माई गई. फ्रांस में जुलाई 2020 से अप्रैल 2021 तक दूसरी लहर रही थी. इसी तरह इटली में जुलाई 2020 से अगस्त 2021 तक और जर्मनी-स्पेन में जुलाई 2020 से सितंबर 2021 तक दूसरी लहर बनी रहने का अनुमान है.

 

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