Omicron Community Transmission: देश में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट का कम्युनिटी स्प्रेड शुरू हो गया है. ये जानकारी स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़े INSACOG के बुलेटिन में दी गई है. बुलेटिन में कहा गया है कि ओमिक्रॉन का कम्युनिटी ट्रांसमिशन शुरू हो गया है. कई महानगरों इसकी चपेट में है जहां बड़ी संख्या में संक्रमण के नए मामले सामने आ रहे हैं.
INSACOG की बुलेटिन में ये बातें तब कही गई हैं जब देश में कोरोना टेस्टिंग भी सीमित कर दी गई है. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने कोरोना टेस्टिंग की नई गाइडलाइन जारी की है. इसके मुताबिक, अब सभी को टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है. गाइडलाइन के तहत, कोरोना संक्रमित के संपर्क में आए ऐसे लोगों को ही टेस्ट कराने की जरूरत है जिनकी उम्र 60 साल से ऊपर है या किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं.
इतना ही नहीं, भारत में जीनोम सिक्वेंसिंग भी बहुत ज्यादा नहीं है. जीनोम सिक्वेंसिंग से ही वायरस के नए वैरिएंट की पहचान होती है. नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कुछ दिन पहले दावा किया था कि जीनोम सिक्वेंसिंग के मामले में भारत दूसरे नंबर पर है. हालांकि, कोरोना वायरस के जीनोम डेटा पर नजर रखने वाली संस्था GISAID के मुताबिक, भारत में 10 जनवरी तक सिर्फ 1.06 लाख सैंपल की ही जीनोम सीक्वेंसिंग हुई है.
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क्यों चिंता बढ़ाती है INSACOG की चेतावनी?
कम कोरोना टेस्टिंग और जीनोम सिक्वेंसिंग के बीच INSACOG की चेतावनी चिंता बढ़ाती है. INSACOG के बुलेटिन में कहा गया है कि ओमिक्रॉन अब भारत में कम्युनिटी स्प्रेड के स्तर पर है. ये दिल्ली और मुंबई में डेल्टा वैरिएंट पर हावी हो गया है, जहां नए मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.
कम्युनिटी स्प्रेड का मतलब ये हुआ कि भारत में अब ओमिक्रॉन का प्रसार विदेशी यात्रियों के जरिए नहीं, बल्कि देश के भीतर ही होने की आशंका है. यानी, पहले ये था कि जो विदेश से लौटकर आ रहे थे, उनमें ही ओमिक्रॉन की पुष्टि हो रही थी. लेकिन अब जो विदेश गए भी नहीं या विदेश से लौटे किसी यात्री के संपर्क में आए भी नहीं, वो भी ओमिक्रॉन की चपेट में आ रहे हैं.
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कम्युनिटी स्प्रेड के खतरे क्या हैं?
- INSACOG ने बुलेटिन में ये भी कहा है कि अब तक ओमिक्रॉन के जितने मामले सामने आए हैं, उनमें से ज्यादातर मरीजों में हल्के लक्षण हैं या फिर वो एसिम्प्टोमैटिक हैं. ICMR की गाइडलाइन कहती है कि अगर कोई लक्षण नहीं है तो टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है. ऐसे में एसिम्प्टोमैटिक मरीजों से संक्रमण तेजी से फैल सकता है.
- स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि अब तक देश में वैक्सीन की 162.26 करोड़ डोज लग चुकी है. इनमें से 68.58 करोड़ लोगों को दोनों डोज दी जा चुकी है. यानी, अब भी भारत की बहुत बड़ी आबादी को या तो वैक्सीन नहीं लगी है या फिर एक ही डोज लगी है. ओमिक्रॉन वैक्सीनेटेड को भी शिकार बना रहा है. ऐसे में अनवैक्सीनेटेड लोगों के संक्रमित होने का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है.
- दिल्ली स्थित मैक्स हेल्थकेयर अस्पताल की स्टडी बताती है कि अनवैक्सीनेटेड या एक डोज लेने वालों में मौत का खतरा ज्यादा है. मैक्स हेल्थकेयर के मुताबिक, तीसरी लहर में 60% मौतें उन लोगों की हुई है जो अनवैक्सीनेटेड थे या फिर जिन्हें एक ही डोज लगी थी.