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क्या Omicron वैरिएंट के मरीजों का अलग है इलाज, किस तरह टेस्टिंग? जानिए हर सवाल का जवाब

Omicron Variant Explainer: ओमिक्रॉन के लक्षण क्या है? मौजूदा वैक्सीन असरदार है या नहीं? टेस्टिंग कैसे हो रही है? डेल्टा से कितना खतरनाक है ओमिक्रॉन? कोरोना के नए ओमिक्रॉन वैरिएंट से जु़ड़े ऐसे सभी तमाम सवालों के जवाब जानेंगे...

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ओमिक्रॉन वैरिएंट की पुष्टि जीनोम सीक्वेंसिंग से हो रही है. (फाइल फोटो-Getty Images)
ओमिक्रॉन वैरिएंट की पुष्टि जीनोम सीक्वेंसिंग से हो रही है. (फाइल फोटो-Getty Images)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ओमिक्रॉन पर वैक्सीन बेअसर, इसके सबूत नहीं
  • बिना ट्रैवल हिस्ट्री वाले भी हो रहे ओमिक्रॉन संक्रमित

Omicron Variant FAQ: कोरोना का नया ओमिक्रॉन वैरिएंट अब डराने लगा है. भारत में भी ओमिक्रॉन की रफ्तार तेज हो गई है. देश में अब तक ओमिक्रॉन के 228 मामले सामने आ चुके हैं. ओमिक्रॉन के लक्षण क्या हैं? वैक्सीन असरदार है या नहीं? डेल्टा से कितना घातक है? ऐसे कई सवाल मन में खड़े होते हैं. इस रिपोर्ट में हम ऐसे ही 8 जरूरी सवालों के जवाब जानेंगे...

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1. क्या Omicron वैरिएंट के मरीजों का अलग है इलाज?

-  नहीं. ओमिक्रॉन से संक्रमित मरीजों का इलाज कुछ अलग होता है, ऐसा नहीं है. बाकी कोरोना मरीजों की तरह ही उनका इलाज भी किया जा रहा है. कोरोना मरीजों के इलाज का प्रोटोकॉल विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ओर से तय किया गया है. दिल्ली के LNJP अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. सुरेश कुमार ने बताया था कि कोरोना प्रोटोकॉल के तहत ही इलाज हो रहा है. रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद ब्लड टेस्ट और एक्स-रे किया जाता है और रिपोर्ट सामान्य रहती है तो डिस्चार्ज कर दिया जाता है.

2. किस तरह हो रही टेस्टिंग?

- टेस्टिंग का तरीका भी वही है. बस ओमिक्रॉन वैरिएंट की पुष्टि के लिए कोरोना संक्रमित के सैंपल को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजा जाता है. डॉ. सुरेश कुमार ने बताते हैं कि दिल्ली एयरपोर्ट पर यात्रियों का RTPCR टेस्ट किया जाता है. अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो अस्पताल में भर्ती कर लिया जाता है. उसके बाद मरीज का सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजा जाता है. इसी से पता चलता है कि मरीज ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमित है या कोई दूसरा वैरिएंट है? केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने राज्यसभा में बताया था कि देश में 38 लैब में जीनोम टेस्टिंग की सुविधा है.

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3. क्या सिर्फ विदेश से आने वाले लोगों को ही संक्रमण?

- माना जा रहा है कि जो लोग विदेश से लौटकर आ रहे हैं, वही ओमिक्रॉन से संक्रमित हो रहे हैं, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है. देश में अब तक ओमिक्रॉन के कई ऐसे मामले भी आए हैं जिसमें मरीज की कोई ट्रैवल हिस्ट्री ही नहीं है. 

- दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने मंगलवार को बताया था कि LNJP में अब तक 34 ओमिक्रॉन मरीजों का इलाज हो रहा है, जिसमें से 3 की कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं है. हालांकि, ये भी पता लगाया जा रहा है कि क्या ये लोग किसी विदेश से लौटे नागरिक के संपर्क में आए थे. 

- इसी तरह तेलंगाना के हैदराबाद में भी लोकल ट्रांसमिशन का पहला केस आया है. यहां ओमिक्रॉन मरीज का इलाज करने वाले डॉक्टर भी ओमिक्रॉन से संक्रमित हो गए हैं. 

4. क्या डेल्टा वैरिएंट से घातक है?

- इस बारे में अभी साफ-साफ नहीं कहा जा सकता. लेकिन इतना जरूर कहा जा रहा है कि डेल्टा के मुकाबले ओमिक्रॉन ज्यादा तेजी से फैल रहा है. हाल ही में हॉन्गकॉन्ग यूनिवर्सिटी की एक स्टडी आई थी, जिसमें दावा किया गया था कि ओमिक्रॉन डेल्टा और कोविड के मूल स्ट्रेन से 70 गुना ज्यादा तेजी से फैलता है लेकिन ये कम गंभीर है. स्टडी में बताया गया था कि ओमिक्रॉन वैरिएंट की वजह से फेफड़ों में इन्फेक्शन कम होने के चांस कोरोना के बाकी वैरिएंट के मुकाबले कम है.

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5. कितनी तेजी से हो रहा प्रसार?

- अभी तक ओमिक्रॉन वैरिएंट को सबसे ज्यादा तेजी से फैलने वाला वैरिएंट माना जा रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पहले चेतावनी जारी की थी कि ओमिक्रॉन जितनी तेजी से फैल रहा है, उतनी तेजी से दूसरे वैरिएंट का प्रसार नहीं हुआ है. 

- WHO का ये भी कहना है कि डेल्टा की तुलना में ओमिक्रॉन ज्यादा तेजी से फैल रहा है. ऐसी भी आशंका है कि ओमिक्रॉन डेल्टा को रिप्लेस कर सकता है. 

- केंद्र सरकार ने भी मंगलवार को राज्यों को अलर्ट करते हुए कहा है कि डेल्टा की तुलना में ओमिक्रॉन तीन गुना ज्यादा संक्रामक है. सरकार ने राज्यों से नाइट कर्फ्यू समेत स्थानीय स्तर पर कई पाबंदियां लगाने की सलाह दी है.

6. लक्षण क्या हैं?

- सबसे बड़ी चिंता की बात ये है कि ज्यादातर ओमिक्रॉन संक्रमितों में कोई लक्षण ही नहीं दिख रहा है. स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने सोमवार को राज्यसभा में बताया कि ओमिक्रॉन के 80 फीसदी मरीजों में कोई लक्षण नहीं है. वहीं, 13 फीसदी ही ऐसे हैं जिनमें मामूली लक्षण हैं. 

- LNJP के डायरेक्टर डॉ. सुरेश कुमार ने बताते हैं कि साउथ अफ्रीका और यूरोप से WHO का जो डेटा आया है, उसके मुताबिक ओमिक्रॉन मरीजों में हल्के लक्षण होते हैं. उनमें गले में दर्द, लूज मोशन, हल्का बुखार होगा. हालांकि, सांस लेने में दिक्कत या बीपी से संबंधित समस्या नहीं देखी गई है. इसके अलावा जैसा डेल्टा वैरिएंट के मामले में देखा गया था, वैसे ओमिक्रॉन मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत भी नहीं पड़ रही है.

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7. क्या अभी जो वैक्सीन है वो कारगर?

- इसे लेकर अभी पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता. कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च में सामने आया था कि कोरोना की मौजूदा वैक्सीन ओमिक्रॉन पर कम असरदार है. हालांकि, राहत की बात ये भी है कि वैक्सीन की वजह से लोग भले ही संक्रमित हो रहे हैं, लेकिन गंभीर बीमारी नहीं हो रही है. 

- राज्यसभा में केंद्र सरकार ने बताया है कि अभी इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि मौजूदा वैक्सीन ओमिक्रॉन पर असरदार नहीं है. हालांकि, इसके बावजूद चिंता की बात ये है कि वैक्सीनेशन के बावजूद भी लोग ओमिक्रॉन से संक्रमित हो रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महाराष्ट्र में ही ओमिक्रॉन के 80 फीसदी मरीज ऐसे थे जिन्हें दोनों डोज लग चुकी थी. 

- वैक्सीनेटेड होने के बाद भी ओमिक्रॉन का संक्रमण होने के कारण ही भारत समेत दुनियाभर में बूस्टर डोज पर बहस छिड़ गई है. भारत में भी बूस्टर डोज लगाने की मांग हो रही है. सरकार ने संसद में बताया था कि एडवाइजरी कमेटी बूस्टर डोज को लेकर विचार कर रही है. अमेरिका, ब्रिटेन में जिन्हें दोनों डोज लग गई है, उन्हें तीसरी डोज दी जा रही है. तो वहीं इजरायल में अब चौथी डोज लगाने का फैसला भी लिया गया है.

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8. इसके पोस्ट इफेक्ट कैसे हैं?

- जिस तरह से डेल्टा या दूसरे वैरिएंट से ठीक होने के बाद भी लोगों को थकान, कमजोरी और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्या आती थी, वैसी ही कोई समस्या ओमिक्रॉन से रिकवर के बाद भी आ रही है या नहीं, इस पर स्टडी की जानी बाकी है. क्योंकि ओमिक्रॉन अभी नया वैरिएंट है, इसलिए इसके पोस्ट इफेक्ट को लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है.

 

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