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वुहान से लौटी रायबरेली की मेडिकल छात्रा ने बताया मंजर, कहा- लॉकडाउन का करें पालन

रायबरेली की रहने वाली राशि रस्तोगी कोरोना वायरस के केंद्र रहे चीन के वुहान से जनवरी में ही लौटी हैं. राशि ने दिसंबर में ही उस अहसास को जी लिया था जिसे हम आज भारत में देख रहे हैं.

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वुहान से लौटी मेडिकल छात्रा राशि ने बताया चीन का हाल
वुहान से लौटी मेडिकल छात्रा राशि ने बताया चीन का हाल

  • 14 जनवरी को भारत लौट आई थीं राशि
  • वुहान में मेडिकल की कर रही थीं पढ़ाई
  • चीन के प्रोफेसर ने दी थी फैलने की चेतावनी

उत्तर प्रदेश में रायबरेली की रहने वाली राशि रस्तोगी कोरोना वायरस के केंद्र रहे चीन के वुहान से जनवरी में ही लौटी हैं. वह चीन के वुहान शहर में स्थित जनगुवान यूनिवर्सिटी में मेडिकल थर्ड ईयर की छात्रा हैं. राशि ने दिसंबर में ही उस अहसास को जी लिया था जिसे हम आज भारत में देख रहे हैं.

यूं तो सब कुछ राशि की आंखों के सामने ही हो रहा था, लेकिन परदेस में. राशि बताती हैं कि कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए अपने परिवार वालों को याद करते हुए सिर्फ आंखों में आंसू ही आ रहे थे. वह वक्त राशि के लिए बहुत ही मुश्किल भरा था.

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'आजतक' से बातचीत में राशि बताती हैं कि पहले तो भारतीय छात्रों को स्थानीय लोगों से अलग कर दिया गया था. क्योंकि बाहरी छात्रों की सुरक्षा वहां पहली जिम्मेदारी थी. दूसरे देश के बच्चों को किसी तरह की कोई दिक्कत ना होने पाए इस बात का ख्याल ख्याल रखा गया. राशि बताती हैं कि किस तरीके से उन्हें चीन के बच्चों से अलग रखा गया था. हर तरीके की जांच पड़ताल के बाद राशि 14 जनवरी को भारत पहुंचीं. उन्हें इस बात का भी अंदेशा था कि आने वाले वक्त में यह वायरस इंडिया भी आएगा.

राशि की मानें तो 2 साल पहले जब वह भारत से चीन पढ़ने गई थीं तो हर तरीके से वहां के वातावरण को सराहा था. चाहे वह पढ़ाई की बात हो, सड़क की बात हो या फिर सुरक्षा या फिर साफ सफाई की, हर तरीके से राशि चीन की तारीफ करते नहीं थकती थीं. लेकिन कोरोना वायरस की घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर डाला है.

राशि का बस यही मानना है लोगों को भी सरकार का सहयोग करना चाहिए. नहीं तो अगर इंडिया में कोरोना फैल गया तो इसे संभाल पाना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन होगा और यहां पर हालात बद से बदतर हो जाएंगे.

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रायबरेली में इंद्रानगर की रहने वाली राशि रस्तोगी अपने भाई बहनों में सबसे बड़ी हैं. उनके पिता की रायबरेली में एक मोटरसाइकिल की एजेंसी हैं. उनके पिताजी यह कहते भावुक हो गए कि जिस तरीके से इस देश के प्रधानमंत्री ने कोरोना वायरस के लिए व्यवस्थाएं की हैं वह वाकई में बहुत ही दूरगामी हैं और हर आदमी को उनका साथ देना चाहिए.

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राशि बताती हैं, 'चीन में हालात का अंदाजा नहीं था. मेरे एग्जाम चल रहे थे. हमें अपने टीचरों से मालूम चला कि ऐसा कोई वायरस हॉस्पिटल में पाया गया है और हॉस्पिटल को बंद कर दिया गया है. आप लोगों को प्रिकॉशन की जरूरत है. आप लोगों को हाथ धोते रहना है. फिर हमें जनवरी में पता चला कि तमाम सीरियस केस आ रहे हैं. बहुत ही डिफरेंस.'

राशि कहती हैं, 'कॉलेज में अच्छी सफाई थी. अच्छी पढ़ाई चल रही थी. लेकिन जब यह वायरस आया तो सड़क पर कोई दिख नहीं रहा था. प्रेशर बहुत था कि किस तरह अपने देश वापस जाएंगे. कुछ मेरे फ्रेंड्स जिन्हें रोक लिया गया था तो मानसिक दबाव बहुत था. जब मैंने घर वालों को बताया तो घर वाले भी यहां बैठ कर क्या कर लेते. जब घर वाले परेशान होते थे तो खुद को भी लगता था कि हमारी वजह से वो भी परेसान हैं. इतनी दूर आए हैं पढ़ने. ये सब देखने को मिल रहा है.

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राशि ने बताया कि लेकिन फिर भी दोस्तों के साथ घर वालों के साथ अपनी बात शेयर करते रहे. कुछ आसानी हो रही थी तो थोड़ा बहुत सकून भी था. जब हम वुहान से निकल रहे थे तो हमें ऐसे हालात इंडिया में भी देखने को मिल सकते हैं. मेरे टीचर और प्रोफेसर भी ये सब बता चुके थे. जब यहां आए तो पता नहीं था कि इतना फैल जाएगा. मैं तो यही कहूंगी कि सब लोग घर पर रहें और सेफ रहें.

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