scorecardresearch
 

देश में 10 लाख बच्चे गंभीर कुपोषित, कोरोना की तीसरी लहर आई तो ये कैसे करेंगे सामना?

देश में कोरोना वायरस की तीसरी लहर की चेतावनी बार-बार आ रही है. अभी तक यही माना जा रहा है कि तीसरी लहर में बच्चों पर ज्यादा असर पड़ेगा. ऐसे में एक चिंता की बात ये भी है कि देश में करीब 10 लाख बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित हैं और एक्सपर्ट का कहना है कि अगर तीसरी लहर ने बच्चों को प्रभावित किया तो हालात बिगड़ सकते हैं.

Advertisement
X
सबसे ज्यादा कुपोषित बच्चे यूपी और बिहार में (प्रतीकात्मक तस्वीर)
सबसे ज्यादा कुपोषित बच्चे यूपी और बिहार में (प्रतीकात्मक तस्वीर)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • करीब 10 लाख बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित
  • कुपोषित बच्चों के संक्रमित होने का खतरा ज्यादा

29 मई को अरुणाचल प्रदेश के ईस्ट सियांग जिले में 1 साल 4 महीने की बच्ची की कोरोना (Coronavirus) से मौत हो गई थी. बच्ची को बुखार आया था और 24 मई को उसकी कोविड रिपोर्ट (Covid Report) पॉजिटिव आई थी. इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका. बच्ची कुपोषित (Malnourished) थी. बाद में राज्य सरकार ने इस मौत की जांच के आदेश दिए.

Advertisement

इसी तरह पिछले साल नाइजीरिया में एक 8 महीने के बच्चे को कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था. बाद में बच्चे और उसकी मां दोनों ने दम तोड़ दिया था. जब जांच की गई तो सामने आया कि बच्चा और उसकी मां कुपोषण (Malnutrition) का शिकार थे. इतना ही नहीं, पिछले साल जून में इंडोनेशिया में भी सैकड़ों बच्चों की कोविड-19 (Covid-19) से मौत हो गई थी. उस समय हेल्थ एक्सपर्ट ने बच्चों की मौत की वजह कुपोषण को ही माना था.

इन सब बातों का जिक्र इसलिए क्योंकि भारत में भी कोरोना की तीसरी लहर (Coronavirus Third Wave) आने का अंदेशा सरकार जता चुकी है और अभी तक यही माना जा रहा है कि तीसरी लहर में बच्चों के ज्यादा संक्रमित होने की आशंका है. हालांकि, ये तीसरी लहर कितनी खतरनाक होगी, इसको लेकर अभी कोई मोटे तौर पर साफ अनुमान नहीं है. लेकिन जानकार इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अगर भारत में तीसरी लहर आई और बच्चे संक्रमित हुए तो हालात डराने वाले हो सकते हैं. वो इसलिए क्योंकि भारत में कुपोषण (Malnutrition in India) कम नहीं है.

Advertisement

ये भी पढ़ें-- कोरोना की तीसरी लहर का क्या बच्चों पर होगा सबसे ज्यादा असर? जानें एक्सपर्ट्स की राय

हाल ही में न्यूज एजेंसी PTI की एक RTI में सामने आया था कि देशभर में करीब 10 लाख ऐसे बच्चे हैं जो गंभीर रूप से कुपोषित (Severely Acute Malnourished) हैं. RTI के जवाब में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (Ministry of Women and Child Development) ने बताया था कि पिछले साल नवंबर तक 9,27,606 बच्चों गंभीर रूप से कुपोषित हैं. इनमें से 3.98 लाख बच्चे यूपी और 2.79 लाख बच्चे बिहार में हैं.

कुपोषित बच्चों को कोरोना का खतरा ज्यादा!

कर्नाटक सरकार ने कोरोना की तीसरी लहर को ध्यान में रखते हुए कुपोषित बच्चों की पहचान करने के लिए सर्वे शुरू कर दिया है. हालांकि, अभी तक ऐसी कोई स्टडी नहीं आई है जिसमें इस बात के पुख्ता सबूत मिले हों कि कुपोषित बच्चों को कोरोना का खतरा ज्यादा है. लेकिन सरकार भी इस बात को मानती है कि सामान्य बच्चों की तुलना में कुपोषित बच्चे किसी भी बीमारी या संक्रमण के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं.

वहीं, हेल्थ एक्सपर्ट इस बात को लेकर चिंता जाहिर कर चुके हैं कि अगर कोरोना की तीसरी लहर ने बच्चों को प्रभावित किया तो कुपोषित बच्चों को ज्यादा खतरा होगा. चाइल्ड राइट्स (Child Rights) पर काम करने वाली संस्था HAQ की को-फाउंडर ईनाक्षी गांगुली ने PTI से कहा था कि कोविड (Covid) से मौत की बड़ी वजह कुपोषण होगी.

Advertisement

ये भी पढ़ें-- गाजियाबाद में 1 साल का मासूम कोरोना संक्रमित, क्या ये तीसरी लहर के आगाज का अलार्म!

साल बदल रहे हैं, लेकिन हालात नहीं!

कुपोषण को लेकर पैसा खर्च हो रहा है, लेकिन भारत में साल बदलने के साथ-साथ हालत नहीं बदल रहे हैं. पिछले साल दिसंबर में स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Ministry) ने नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 (NFHS-5) का पहला भाग जारी किया था. ये सर्वे 2019-20 में देश के 22 राज्यों में किया गया था. इस सर्वे में सामने आया कि हालात और बिगड़ गए हैं. 2015-16 में NFHS-4 हुआ था, उसकी तुलना में NFHS-5 में पता चला था कि कुछ राज्यों को छोड़कर बाकी राज्यों में कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ी है.

भारत में कुपोषण को तीन पैरामीटर पर मापा जाता है. पहला ये कि 5 साल से कम उम्र के कितने बच्चों का वजन ऊंचाई के हिसाब से कम (Wasted) है. दूसरा ये कि 5 साल से कम उम्र के कितने बच्चों का वजन उनकी उम्र के हिसाब से कम (Underweight) है. और तीसरा ये कि 5 साल से कम उम्र के कितने कितने बच्चे ठिगने (Stunted) हैं.

NFHS-5 में सामने आया था कि जिन 22 राज्यों में सर्वे किया गया था, उनमें से 10 ही ऐसे थे जहां ठिगने बच्चों की संख्या कम हुई थी. 10 राज्य में वेस्टेड बच्चों और 6 राज्यों में अंडरवेट बच्चों की संख्या में सुधार हुआ था. बाकी सभी राज्यों में NFHS-4 की तुलना में बढ़ोतरी ही हुई थी.

Advertisement

ये आंकड़े बताते हैं कि भारत में कुपोषण से हालात कितने खराब हैं. एक चिंता की बात ये है कि यूनिसेफ (UNICEF) ने भी अनुमान लगाया है कि कोरोना की वजह से लगाए गए लॉकडाउन के कारण दुनियाभर में 5 साल से छोटे 67 लाख से ज्यादा बच्चों के कुपोषित होने का खतरा है. हालांकि, ये थोड़ी राहत भरी बात है कि भारत में सितंबर तक छोटे बच्चों की कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) आने की उम्मीद भी है.

 

Advertisement
Advertisement