महाराष्ट्र के पुणे में पुलिसकर्मियों की मांग है कि उन्हें भी डॉक्टर्स और हेल्थकेयर वर्कर्स की तरह विशेष जोखिम भत्ता (स्पेशल रिस्क अलाउंस) दिया जाए. इनका कहना है कि उन्हें भी हर वक्त फील्ड में रहने की वजह से फ्रंटलाइन वर्कर की तरह ही खतरा रहता है. महाराष्ट्र के डीजीपी ने राज्य सरकार के सामने ये मुद्दा उठा कर विशेष जोखिम भत्ता दिलाने के लिए पूरी कोशिश करने का भरोसा दिया है. कोरोना के प्रकोप के दौरान पुलिसवाले भी कितने समर्पण के साथ अपनी ड्यूटी को अंजाम दे रहे हैं, इसकी बेहतरीन मिसाल छत्तीसगढ़ की डीएसपी शिल्पा साहू ने पेश की है.
शिल्पा साहू, माओवाद से प्रभावित बस्तर जिले के दंतेवाड़ा में तैनात हैं. गर्भावस्था के दौरान भी उन्हें चिलचिलाती धूप में सड़क पर लॉकडाउन का पालन कराने के साथ लोगों को कोविड सुरक्षा प्रोटोकॉल की अहमियत समझाते देखा जा सकता है. शिल्पा जब अपनी टीम के साथ आते-जाते वाहनों पर सवार लोगों को चेक कर रही थीं तो उस वक्त का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.
शिल्पा साहू की ये तस्वीरें जहां उनके जज्बे और हौसले को दिखाती हैं, वहीं ये भी बताती है कि पुलिसवालों का समर्पण भी अन्य कोविड वॉरियर्स से कम नहीं है.
शिल्पा साहू ने लोगों से अपील की है कि ऐसे में जब पुलिस उनकी सुरक्षा के लिए सड़कों पर हैं तो वे खुद भी सुरक्षित रहने के लिए घरों में रहें.
शिल्पा के मुताबिक, “जिले में लॉकडाउन का पालन कराने के साथ ये भी देखा जा रहा है कि लोग बहुत जरूरी काम हो तभी घर से बाहर निकलें. और जो लोग बिना किसी खास कारण सड़कों पर बाहर आते हैं तो वो अपने साथ साथ दूसरों, खास कर अपने घर वालों को भी खतरे में डालते हैं."
शिल्पा ने कहा कि लोगों को समझना चाहिए कि कोरोनावायरस की चेन को तोड़ने के लिए लॉकडाउन के दौरान लोगों का घरों में रहना कितना जरूरी है. इसके अलावा मास्क पहनने, सैनिटाइजर्स का इस्तेमाल करने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने जैसी ज़रूरी बातों को भी हर वक्त ध्यान रखना चाहिए.
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