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जानें कोरोना इस बार क्यों हुआ जानलेवा? हैप्पी-हाइपोक्सिया है साइलेंट किलर 

कोरोना की दूसरी लहर बेहद खतरनाक है. रोजाना मौत के डराने वाले आंकड़े सामने आ रहे हैं. दूसरी लहर में ऑक्सीजन की डिमांड ज्यादा बढ़ने लगी है. इसके पीछे का कारण हैप्पी- हाइपोक्सिया है. यहां हैप्पी से खुश होने की जरूरत नहीं, बल्कि ये कोरोना की जानलेवा स्थिति है.

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सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • संक्रमण होने से गिरता ऑक्सीजन स्तर, लेकिन नहीं होता मरीज को आभास
  • जब तक पता चलता है इसके बारे में, हो चुकी होती है बहुत देर 

कोरोना की दूसरी लहर से देश में त्राहिमाम मचा हुआ है. हैरान करने वाली बात ये है कि इस बार संक्रमण इस कदर लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है कि उन्हें पता ही नहीं लग रहा कि कब इसकी गिरफ्त में आ गए हैं. मरीज में ऑक्सीजन का स्तर गिरता है पर इसका आभास उसे नहीं होता है. हैप्पी-हाइपोक्सिया के चलते स्थिति क्रिटिकल हो जाती है. जबकि कोरोना की पहली लहर में ऐसा नहीं था. उस दौरान शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम होने पर सांस फूलने लगती और बुखार आने पर मरीज अस्पताल जाता था. इसके बाद तत्काल इलाज मिलने पर स्थिति पर काबू में हो जाती थी, लेकिन इस बार मरीजों में हल्की खांसी और बुखार है, लेकिन सांस नहीं फूल रही. 

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हल्की खांसी और बुखार खतरनाक
पंडित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के एडिशनल एमएस डॉ. महेश्वर प्रसाद चौरसिया ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर में मरीजों में हल्की खांसी और बुखार है, लेकिन सांस नहीं फूल रही और जब फूलने लगती है, तो देखा गया कि अस्पतालों में पहुंचने वाले अधिकतर मरीजों का ऑक्सीजन स्तर 70 से लेकर 75 के बीच मिलता है. यही वजह है कि इस बार डेथ भी ज्यादा हो रही हैं. उन्होंने बताया कि "हैप्पी हाइपरक्सिया से बचने के लिए सबसे अच्छा जरिया है समय-समय पर शरीर के ऑक्सीजन स्तर की जांच की जाए और किसी खुशफहमी में न रहा जाए. डॉ महेश्वर के अनुसार एक आंकड़े के मुताबिक दूसरी लहर में करीब 15 प्रतिशत मरीज हैप्पी-हाइपोक्सिया से संबिधत हैं."  

कई अंग काम करना कर देते हैं बंद 
डॉ. महेश्वर प्रसाद चौरसिया ने कहा कि हैप्पी कोरोना के Asymptomatic यानि ऐसे मरीज जिनमें कोई लक्षण नहीं है, अगर हैं अभी तो बहुत मामूली. ऐसे लोगों में ऑक्सीजन का स्तर काफी नीचे चला जाता है. ऑक्सीजन का स्तर 70 से 80 प्रतिशत नीचे जाने पर भी मरीज को पता नहीं चलता है, हालांकि शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ता ही जाता है. कई महत्वपूर्ण अंग काम करना बंद कर देते हैं और अचानक से कार्डियक अटैक और कई केस में ब्रेन हेमरेज होने के कारण मरीज की मौत हो जाती है. 

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इस वजह से हो रहा चिड़चिड़ापन 
ऑक्सीजन स्तर 70 से 80 तक होने पर भी मरीज को सांस लेने में परेशानी नहीं होती, जबकि शरीर में ऑक्सीजन घट रही होती है. कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ रहा होता है, ऐसे में फेफड़ों में सूजन आने पर ऑक्सीजन ब्लड में नहीं जा पाती, यही वजह है कि दिमाग में ऑक्सीजन नहीं जाता और अंग खराब होने लगते हैं. मरीज चिड़चिड़ा सा हो जाता है. ऑक्सीजन का स्तर काफी कम होता है, तब सांस लेने में परेशानी होती है और तब काफी देर हो चुकी होती है.  

क्या करें, ऑक्सजीन की कमी न हो?  
लाइफ लाइन अस्पताल के डॉ. अनूप यादव ने बताया  "बुखार, खांसी या थ्रोट में खुजली होने पर डॉक्टर की सलाह से दवाई शुरू कर देना चाहिए. कई मरीज शुरुआत में इसे वायरल फीवर मानकर टालते हैं और जब ट्रीटमेंट शुरू करते हैं तो ऑक्सीजन का स्तर काफी नीचे चला जाता है."

 

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