केंद्र सरकार की कोरोना वैक्सीन वितरण करने की तैयारियों के बीच हरियाणा सरकार ने केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय को एक पत्र लिखा है. पत्र में हरियाणा सरकार ने केंद्र सरकार से निवेदन किया है कि कोरोना वैक्सीन आने पर सबसे पहले चरण में ही सांसद और विधायकों को भी लगाई जाए. बता दें कि केंद्र सरकार ने वैक्सीन वितरण के सम्बंध में कुछ प्राथमिकताएँ तय की हैं जिनके आधार पर नागरिकों की श्रेणियां बनाई गईं हैं. जिन नागरिकों को कोरोना वैक्सीन की जरूरत सबसे पहले है उन्हें ही सबसे पहले कोरोना वैक्सीन लगाई जाएगी.
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केंद्र सरकार की योजना के अनुसार पहली श्रेणी में हेल्थ वर्कर्स हैं जो कोरोना वायरस से सीधे तौर पर लड़ाई में हैं. दूसरी श्रेणी में 'फ्रंटलाइन वर्कर्स' हैं, जैसे सफाईकर्मी आदि. तीसरी श्रेणी में 50 साल से अधिक उम्र के नागरिक, चौथी श्रेणी में सांसद और विधायक जैसे जनप्रतिनिधियों को शामिल किया गया है. पांचवीं श्रेणी में 50 साल से कम उम्र के ऐसे नागरिक जो कोरोना वायरस से संक्रमित हैं या जिनका इलाज चल रहा है. इस तरह से देखा जाए तो हरियाणा सरकार की मांग चौथी श्रेणी में आने वाले जनप्रतिनिधियों को पहली श्रेणी में रखने की है. हरियाणा सरकार का तर्क है कि जनप्रतिनिधि जनता के बीच रहकर काम करते हैं और उनको अलग-अलग लोगों से मिलना रहता है इसलिए उन्हें कोरोना वैक्सीन के वितरण में प्राथमिकता मिलनी चाहिए. हालांकि हरियाणा सरकार ने लोकल बॉडीज के जनप्रतिनिधियों को शामिल करने की बात नहीं कही है, जैसे कि नगरपालिका, नगर निगम के सदस्य. जबकि लोकल बॉडीज में काम करने वाले जनप्रतिनिधियों को भी जनता के बीच रहकर काम करना पड़ता है.
आपको बता दें कि कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है. भारत में भी इस महामारी के कारण एक लाख 43 हजार से ज़्यादा मरीजों की जान जा चुकी है. वहीं अच्छी खबर ये है कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला ने दावा किया है कि उनकी कंपनी को इस महीने के अंत तक वैक्सीन (covid-19 vaccine) के इमरजेंसी इस्तेमाल की इजाजत मिल सकती है. सीरम इंस्टीट्यूट के अलावा भारत बायोटेक और फाइजर इंडिया भी भारत में वैक्सीन बनाने की रेस में आगे हैं.