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लॉकडाउन: कड़वी यादों का एक साल, 21वीं सदी की वो महाघटना जब 'हाउस अरेस्ट' रहे 130 करोड़ लोग

24 मार्च 2020 की मध्यरात्रि से दुनिया का सबसे बड़ा संपूर्ण लॉकडाउन भारत में लगा दिया गया. दुनिया का सबसे बड़ा इसलिए क्योंकि अगले 21 दिनों तक 130 करोड़ की आबादी को घरों के अंदर अपनी जिंदगी गुजारनी थी. घर के बाहर कदम रखने का मतलब था सलाखों के पीछे जाना. तब किसी को नहीं पता था कि कोरोना वायरस के संकट से कितने दिनों तक लड़ना और जूझना होगा, भविष्य को लेकर मन में जिज्ञाषा और आशंकाओं का ही डेरा था.

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नागपुर में लॉकडाउन की तस्वीर (फाइल फोटो- पीटीआई)
नागपुर में लॉकडाउन की तस्वीर (फाइल फोटो- पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 68 दिनों तक लगातार घरों में बंद रहे 130 करोड़ लोग
  • लॉकडाउन ने इंसान की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी
  • सड़कों पर मीलों सफर के लिए निकले हजारों मजदूर

लॉकडाउन और कोरोना...21वीं सदी की वो महाघटना जिसने विश्व भर में मानव जीवन का हर आयाम बदल दिया. इस अनचाही स्थिति से भारत के लोगों का सामना आज से ठीक एक साल पहले 25 मार्च 2020 को हुआ था. आज लॉकडाउन को लागू हुए एक साल हो गया है. तब 21 दिनों के लिए घोषित लॉकडाउन को लेकर किसको ये अंदाजा था कि 365 बाद भी हमें न तो इस बीमारी से छुटकारा मिलने वाला है और न हीं लॉकडाउन की बंदिशें हमारे जीवन से जाने वाली हैं. 

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बीते एक साल की यादें बहुत कड़वी हैं. अपने जीवन में लोगों ने ऐसे वक्त की कल्पना नहीं की थी. किसी ने सपने में नहीं सोचा था कि 21वीं सदी में दुनिया ऐसे दिन देखेगी. विश्व की महाशक्तियां एक वायरस के आगे घुटने टेक देंगी. एक वायरस अरबों लोगों को घरों में हाउस अरेस्ट कर देगा.

जिज्ञासा और आशंकाओं के बीच 130 करोड़ लोग हाउस अरेस्ट

24 मार्च 2020 की मध्यरात्रि से दुनिया का सबसे बड़ा संपूर्ण लॉकडाउन भारत में लगा दिया गया. दुनिया का सबसे बड़ा इसलिए क्योंकि अगले 21 दिनों तक 130 करोड़ की आबादी को घरों के अंदर अपनी जिंदगी गुजारनी थी. घर के बाहर कदम रखने का मतलब था सलाखों के पीछे जाना. तब किसी को नहीं पता था कि कोरोना वायरस के संकट से कितने दिनों तक लड़ना और जूझना होगा, भविष्य को लेकर मन में जिज्ञाषा और आशंकाओं का ही डेरा था.

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दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चंडीगढ़, गुरुग्राम, नोएडा जैसे महानगर जब लॉकडाउन में ठप हो गए तो देश में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों में गांव वापस जाने की बेताबी थी. तो वहीं विदेश में रहने वाले भारतीयों को वतन लौटने का इतंजार था. लेकिन लॉकडाउन ने जिंदगी को हाउस अरेस्ट कर दिया था. एक साल बाद आज वही देश इस महामारी से मुकाबले में सबसे बड़ा योद्धा बनकर पूरी दूनिया में उभरा है. 

जब थम गया देश...

24 मार्च 2020 को रात आठ बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दूरदर्शन पर देश को संबोधित करने आए. पीएम ने इसी दौरान पहले 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की. पीएम ने देश के लोगों से अपील की कि आपको घर की लक्ष्मण रेखा नहीं लांघनी है. घर में रहना है. 

गृहमंत्रालय के निर्देश पर घोषित इस संपूर्ण लॉकडाउन की घोषणा के बाद सड़कों पर यातायात से लेकर कारोबार तक सबकुछ बंद हो गया. भारत जैसे देश में ट्रांसपोर्ट, बाजार, इंडस्ट्री, स्कूल, कॉलेज, मॉल, धार्मिक स्थल, राजनैतिक कार्यक्रम, पारिवारिक कार्यक्रम सबकुछ बंद हो गया. इसे यूं समझिए कि सार्वजनिक क्षेत्र में हर गतिविधि पर पूर तरह पाबंदी लगाई जा चुकी थी. 

देश में सभी ट्रांसपोर्ट सर्विस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया. रोड पर गाड़ियों के पहिए पूरी तरह थम गए. दुनिया के सबसे बड़े रेलवे नेटवर्क को पहली बार यात्रियों के लिए बंद कर दिया गया. यात्रियों की हवाई उड़ान अनिश्चित काल के लिए रद्द थी. समंदर के रास्ते यातायात इससे अछूता नहीं था. सिर्फ आपातकाल सेवाओं पर रोक नहीं थी. 

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ऐसे सन्नाटे की कल्पना सपने में भी नहीं थी

लॉकडाउन ने एक साथ पूरे देश की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया. सड़कों पर ऐसे सन्नाटे की कल्पना किसी ने सपने में भी नहीं की थी. अदृश्य खतरे ने 130 करोड़ लोगों को घरों की चारदीवारी में कैद कर दिया. सड़कों पर सन्नाटे को चीरती हुई पुलिस की गाडियां दौड़ती दिखाई देती या फिर एंबुलेंस. घरों में लोग टीवी से चिपके वक्त गुजार रहे थे. 

सरकार के सामने तीन चुनौतियां

लॉकडाउन के एलान के बाद मोदी सरकार को सबसे बड़ी चुनौतियों से तीन मोर्चों पर एक साथ लड़ना था. पहला मोर्चा कोरोना के अनजान खतरे से निर्णायक लड़ाई लड़ना जिसकी कोई करागर दवाई तब पूरी दुनिया में मौजूद नहीं थी, दूसरा मोर्चा लॉकडाउन के बाद 130 करोड़ के देश में खाने की सप्लाई चेन को बनाए रखना और तीसरा मोर्चा लॉकडाउन के बाद असंगठित सेक्टर में काम करने वाले लाखों लोगों के पलायन से पैदा हुई स्थिति को संभालना. 

पिछले साल रांची पहुंचने पर धरती पर सर झुकाते प्रवासी मजदूर (फोटो-पीटीआई)

तीन बार बढ़ाया गया लॉकडाउन

दुनिया के आकड़ों को देखने पर लगता है कि लॉकडाउन ने वायरस को तेजी से फैलने से रोका और देश को अपने स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने का मौका दिया. 25 मार्च से 21 दिन यानी तीन हफ्ते का लॉकडाउन देशभर में लगा. लेकिन कोरोना के संक्रमण की तेज रफ्तार को देखते हुए लॉकडाउन की डेट को तीन बार आगे बढ़ना पड़ा. 

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दूसरी बार लॉकडाउन 19 दिन के लिए बढ़ाया गया. तीसरी बार 14 दिन के लिए और चौथी बार भी 14 दिन के लिए. यानी 25 मार्च से लेकर 31 मई यानी 68 दिनों तक 130 करोड़ की आबादी अपने घरों के अंदर रही. 

68 दिन बाद आया अनलॉक 

पहले लॉकडाउन फिर अनलॉक आया. दुकानें, बाजार धीरे धीरे खुलने लगे. वक्त की बढ़ती सुई के साथ कलेंडर की तारीखें बदलती गई. जिंदगी पटरी पर आने लगी, लॉकडाउन  को एक साल गुजर गया. लेकिन आज एक बार फिर कोरोना डरा रहा है.

(ब्यूरो रिपोर्ट आज तक) 

 

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