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हैदराबाद: 423 साल में पहली बार मक्का मस्जिद में नहीं हुई अलविदा जुमे की नमाज

हैदराबाद की ऐतिहासिक चारमीनार के आसपास और मक्का मस्जिद में रमजान के आखिरी जुमे को सन्नाटा पसरा रहा. वहीं, चारमीनार वाले इलाके को रेड जोन के रूप में चिन्हित किया गया है.

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हैदराबाद की चारमीनार (Photo- Aajtak)
हैदराबाद की चारमीनार (Photo- Aajtak)

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  • मक्का मस्जिद में रमजान के आखिरी जुमे को सन्नाटा पसरा रहा
  • नहीं हुई जमात में अलविदा जुमे की नमाज, रेड जोन में एरिया

दुनिया भर में फैली कोरोना महामारी ने बरसों से चली आ रही कई रिवायतें बदल दी हैं. भारत में फैली कोरोना महामारी के कारण जहां धार्मिक स्थलों को बंद रखने का आदेश है, तो वहीं इस कारण मस्जिदों में काफी समय से जमात में नमाज भी नहीं हो रही है.

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ऐसे में रमजान-ऊल-मुबारक के आखिरी जुमा में अलविदा की नमाज भी ज्यादातर मस्जिदों में जमात में नहीं पढ़ी गई. वहीं, ऐसा ना होने से हैदराबाद की मक्का मस्जिद में 423 सालों में ये पहली बार हुआ जब जमात में अलविदा जुमे की नमाज नहीं हुई.

रेड जोन में चारमीनार एरिया

ऐसे में हैदराबाद की ऐतिहासिक चारमीनार के आसपास और मक्का मस्जिद में रमजान के आखिरी जुमे को सन्नाटा पसरा रहा. बता दें कि चारमीनार वाले एरिया को रेड जोन के रूप में चिन्हित किया गया है. कोरोना वायरस और लॉकडाउन के कारण मक्का मस्जिद में कम से कम लोगों के बीच अलविदा जुमे की नमाज पढ़ी गई.

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हैदराबाद शहर के पुलिस प्रमुख अंजिनी कुमार ने पुलिसकर्मियों के साथ लॉकडाउन सुनिश्चित करने के लिए चारमीनार और पुरानी सिटी में डेरा डाले रखा. वहीं, शब-ए-कदर में भी इन इलाकों में सन्नाटा पसरा रहा. लोगों ने घरों में इबादत की.

1591 ई. में शहर की स्थापना के बाद चारमीनार पहली मस्जिद थी. इतिहासकार कहते हैं कि पिछली 4 शताब्दियों से ये आइकॉनिक कंस्ट्रक्शन ईद समारोह के लिए गवाह है. केवल स्पैनिश इन्फ्लूएंजा और हैजा के प्रकोप के समय ये ऐतिहासिक संरचना वीरान नजर आई थी.

इस बीच शहर के शीर्ष मौलवियों ने भी मुस्लिम समुदाय को अपने घर पर ईद मनाने और सरकार की गाइडलाइन को पालन करने को कहा है, जिसके तहत राज्य में सभी तरह की धार्मिक सभाओं पर बैन का आदेश है.

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