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भारत ने कोविड-19 के खिलाफ अपनी लड़ाई में 22 सितंबर को एक मील का पत्थर पार किया. इस दिन एक लाख से अधिक रिकवरी हुईं, जो अब तक किसी भी एक दिन के लिए सबसे ऊंचा आंकड़ा था. इस महीने की शुरुआत में हर दिन 62,000 से अधिक लोग रिकवर हो रहे थे.
भारत की रिकवरी दर 81 प्रतिशत से अधिक है जो दुनिया में सबसे अधिक दरों में से एक है. पिछले कुछ दिनों में, रिकवरी की संख्या हर दिन सामने आने वाले कोरोना वायरस के नए केसों की संख्या से ऊपर रह रही है. इस स्थिति को देखकर विशेषज्ञों का कहना है कि आखिरकार सबसे खराब दिन शायद बीत गए लगते हैं.
सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि दैनिक नए केसों की संख्या में भी पिछले हफ्ते की तुलना में मामूली गिरावट दर्ज की गई है. 17 सितंबर को नए केसों की संख्या 98,000 थी जो 22 सितंबर को घट कर 75,000 पर आ गई. 6 से 20 सितंबर तक भारत में हर दिन औसतन 90,000 से अधिक नए केस दर्ज हुए.
23 सितंबर तक, संक्रमित कुल 56.5 लाख लोगों में से 46 लाख रिकवर हो चुके हैं. 90,000 मौतें हुई हैं. इसके मायने हैं कि भारत में वर्तमान में लगभग 9.7 लाख सक्रिय केस हैं. कोविड के चिंताजनक आंकड़ों के बीच भारत की ऊंची रिकवरी दर आशा की किरण की तरह है.
जाने माने पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. जीसी खिलनानी हालांकि पूरी सावधानी बरतने की सलाह देते हैं. एम्स के पल्मोनरी मेडिसिन डिपार्टमेंट के पूर्व प्रमुख ने कहा, “रिकवरी दर बढ़ गई है क्योंकि देखभाल का स्तर अच्छा है, और केस का पता लगाने का सिस्टम अच्छा है. मृत्यु दर 3-4 प्रतिशत से घटकर 1.5-2 प्रतिशत हो गई है, जिससे रिकवरी दर में भी वृद्धि हुई है. हालांकि, दैनिक सक्रिय केसों की संख्या में मामूली गिरावट के बारे में अभी टिप्पणी करना या खुशी जताना जल्दबाजी होगा.
मंगलवार, 23 सितंबर को, पिछले 24 घंटों में 90,000 के करीब रिकवरी देखी गईं, इसकी तुलना में इसी अवधि में 83,000 से अधिक नए केस आए. कम से कम 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नए केसों की तुलना में अधिक रिकवरी दर्ज की गईं. पूर्ण संख्या में, देखा जाए तो महाराष्ट्र 20,000 रिकवरी के साथ सबसे आगे रहा. इससे पहले, स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा था कि भारत दुनिया में सबसे अधिक रिकवरी वाले देशों में शामिल है. साथ ही दुनिया में कुल रिकवरी में इसका योगदान 19.5 प्रतिशत है.
संयोग से, नए केसों में मामूली गिरावट इस तथ्य के बावजूद है कि भारत हर दिन 10-11 लाख टेस्ट करता है. इस संख्या में थोड़ा उतार चढ़ाव रहता है. वर्तमान में, भारत की टेस्ट पॉजिटिविटी रेट यानि TPR (कुल टेस्ट में से पॉजिटिव केस) का सात-दिवसीय रोलिंग औसत लगभग 9.5 प्रतिशत है, जो इस महीने की शुरुआत में 7.6 प्रतिशत था. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, TPR 5 प्रतिशत से नीचे होना चाहिए. विशेषज्ञों की राय के मुताबिक टेस्टिंग को बढ़ाकर TPR को कम किया जा सकता है. 23 सितंबर तक, भारत ने 6.6 करोड़ से अधिक टेस्ट किए हैं, जो कि इसकी आबादी का 5 प्रतिशत से थोड़ा कम है.
लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल (एलएनजेपी) के मेडिकल डायरेक्टर सुरेश कुमार का मानना है कि भारत ने अभी अपने शिखर को पार नहीं किया है बल्कि वह वहां तक पहुंच रहा है. उन्होंने कहा, "इस वायरस के व्यवहार की भविष्यवाणी करना मुश्किल है. कई राज्यों में एक दूसरी लहर देखी गई है. लेकिन अधिक रिकवरी का कारण ये है क्योंकि अधिकतर रोगियों में हल्के या कोई लक्षण नहीं होते हैं, जिनका इलाज आसान होता है.”
डॉ. कुमार ने कहा, “5 प्रतिशत से कम रोगी गंभीर कोविड लक्षण दिखाते हैं, लेकिन हमें आत्मसंतुष्ट नहीं होना चाहिए. दिल्ली जैसे कुछ राज्यों में केस बढ़ रहे हैं. इसकी आंशिक रूप से वजह लोगों की आवाजाही (राज्य के अंदर ही और एक राज्य से दूसरे राज्य और अंतर-राज्य) है और साथ ही कॉन्टेक्ट्स को ट्रेस नहीं कर पाना भी.”
भारत में कोविड-19 इलाज की सबसे बड़ी सुविधाओं में से एक एलएनजेपी अस्पताल में, इनडोर दाखिले हर दिन 45-50 से दोगुने बढ़कर 90-100 तक पहुंच गए हैं.
(नई दिल्ली से ओरिन बसु और पुलाहा रॉय की रिपोर्ट)
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