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एसिड अटैक सर्वाइवर रुकैया की दिल झकझोर देने वाली कहानी, जिसे 21 साल बाद मिला इंसाफ!

21 साल पहले 14 साल की एक लड़की के चेहरे पर तेजाब फेंका जाता है. लड़की का चेहरा बुरी तरह से झुलस जाता है. लेकिन हालात कुछ ऐसे बनते हैं कि लड़की के घरवाले इंसाफ पाना तो दूर गुनहगार के खिलाफ केस तक दर्ज नहीं करा पाते. लेकिन पूरे 21 साल बाद पीड़िता को इंसाफ मिला है.

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एसिड अटैक सर्वाइवर रुकैया खातून आगरा के शीरोज हैंगआउट कैफे में काम करती हैं.
एसिड अटैक सर्वाइवर रुकैया खातून आगरा के शीरोज हैंगआउट कैफे में काम करती हैं.

मेरा नाम रुकैया खातून है. 7 सितंबर 2002, इस तारीख को मैं कभी नहीं भूल सकती. मेरी बड़ी बहन का देवर मुझसे शादी करना चाहता था. उस समय मेरी उम्र महज 14 साल की थी. मैं नाबालिग थी. पढ़ना चाहती थी. मैं शादी नहीं करना चाहती थी. घरवाले भी मेरे साथ थे.उस रोज मैं अपनी मां के साथ दीदी की ससुराल अलीगढ़ गई थी. उस समय दीदी का मिसकैरेज हुआ था. इसलिए हम दोनों उनकी मदद के लिए गए थे. उसी समय मेरे जीजा के छोटे भाई ने मुझे शादी का प्रस्ताव दिया. तब खुद उसकी उम्र 24 साल की थी. इस शादी के लिए मैंने और मेरी मां ने मना कर दिया. ये बात उस शख्स को इतनी नागवार गुजरी कि उसने मेरी जिंदगी ही खराब कर दी. तब हल्का सा अंधेरा छाया था. मैं घर के आंगन में चारपाई के पास थी. उसी समय अचानक उसने मेरे चेहरे पर कुछ फेंका, जिससे मेरा पूरा चेहरा बुरी तरह जलने लगा. शुरू में मुझे लगा कि उसने मेरे चेहरे पर गर्म चाय फेंक दिया है, लेकिन जल्द ही जलन की शिद्दत ने मुझे इस बात का अहसास दिला दिया कि ये हमला तेजाब का है. मुझे भयंकर दर्द हो रहा था. मैं चीख रही थी. चिल्ला रही थी...

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ये दिल झकझोर देने वाली दास्तान आगरा के शीरोज हैंगआउट कैफे में काम करने वाली एसिड अटैक सर्वाइवर रुकैया खातून की है. 34 साल की रुकैया को अपने साथ हुई इस बर्बर वारदात के 21 साल बाद इंसाफ मिला है. यूपी पुलिस ने इस वारदात को अंजाम देने वाले आरोपी आरिफ को अलीगढ़ से गिरफ्तार किया है. उसे जेल भेज दिया गया है. उसे सजा दिलाने की कार्रवाई शुरू कर दी है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि नफरत के तेजाब में झुलसा कर एक लड़की की जिंदगी खराब करने वाले इस दरिंदे को उसके अंजाम तक पहुंचाने में या फिर उसकी कार्रवाई शुरू करने में इतनी देर क्यों हुई? दूसरा ये कि 21 साल बाद यदि ये मुमकिन हुआ, तो कैसे हुआ?  

रुकैया खातून की जिंदगी का अफसोसजनक मुकाम

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इन सवालों के जवाब आगे हैं. एसिड अटैक के बाद रुकैया को अस्पताल में भर्ती करवाया गया. वहां उसकी हालत लगातार खराब हो रही. उसे काफी दर्द हो रहा था. एक दिन बाद उसे अलीगढ से आगरा लाया गया. वहां अस्पताल में करीब एक महीने तक उसका इलाज चलता रहा. इस दौरान बात पुलिस से शिकायत करने की भी आई. खुद रुकैया और उसकी मां चाहती थी कि गुनहगार को सजा मिले. पुलिस उस पर एक्शन ले, लेकिन तब उसकी दीदी के ससुरालवालों ने साफ कर दिया कि यदि वो पुलिस के पास गई तो फिर अपनी बड़ी बहन को भी ससुराल से हमेशा-हमेशा के लिए लेकर चली जाएं. बस, यही रुकैया खातून की जिंदगी का अफसोसजनक मुकाम साबित हुआ.

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एसिड अटैक के बाद रुकैया की जिंदगी पूरी तरफ बदल गई, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारा.

चाहकर भी रुकैया खातून पुलिस केस दर्ज नहीं करा पाई

रुकैया बताती है कि उस समय दीदी के दो बच्चे थे. उसके ससुरालवालों के इस फरमान से वो डर गई. उसकी मां भी डर गईं. उसके पिता पहले ही दुनिया से जा चुके थे. तब उन्होंने सोचा कि अब किसी तरह से चेहरे का इलाज कराया जाए और इस हादसे को भूलने की कोशिश की जाए, क्योंकि यदि उन्होंने पुलिस केस किया तो बहन की जिंदगी भी बर्बाद हो जाएगी. उसकी जिंदगी तो काफी हद तक बर्बाद हो ही रही है. हालांकि रुकैया की मानें तो उसे इस बात का अफसोस हमेशा रहा कि उसे इतना तड़पाने वाले और उसके चेहरे पर कभी ना मिटनेवाले दाग लगाने वाले शख्स को वो अब तक सजा नहीं दिला सकी. बल्कि सजा तो दूर पुलिस में एक शिकायत भी नहीं कर पाई.

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एसिड अटैक सर्वाइवर की दास्तान ने दिल दहला दिया 

वक्त गुजरता गया. झुलसे हुए चेहरे के साथ ही रुकैया बड़ी हुई. उसकी भी शादी हुई. उसे अब एक बेटा भी है. वो पिछले कई सालों से आगरा के एसिड अटैक सर्वाइवर कैफे में नौकरी कर रही है. इस कैफे में काम करने वाले सभी लोग एसिड अटैक सर्वाइवर हैं. 6 दिसंबर 2022 की बात है. आगरा जोन के तत्कालीन एडीजी राजीव कृष्ण शीरोज कैफे पहुंचते हैं. वो कैफे में कुछ एसिड सरवाइवर से बातचीत कर रहे थे, उनका हाल-चाल ले रहे थे. इसी बीच उन्हें पता चलता है कि कैफे में रुकैया, मधु और उस जैसी कई और ऐसी लड़कियां हैं, जो एसिड सर्वाइवर होने के बावजूद सालों से इंसाफ की राह देख रही हैं. इन लड़कियों की इन कहानियों ने उनको अंदर तक झकझोर दिया.

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आगरा के तत्कालीन एडीजी राजीव कृष्ण की पहल पर एसिड अटैक सर्वाइरों को मिला इंसाफ. 

पीड़ितों को इंसाफ दिलाने की एडीजी ने खाई कसम

एडीजी राजीव कृष्ण ने फैसला कर लिया कि अब वो ऐसी लड़कियों को इंसाफ दिला कर रहेंगे. उन्होंने फौरन आगरा के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर डॉ प्रीत इंदर सिंह से बात की और रुकैया, मधु और बाकी लड़कियों को इंसाफ़ दिलाने का हुक्म दिया. अब पुलिस कमिश्नर ने इन लड़कियों को अपने दफ्तर में बुलाया, उनकी कहानी सुनी और अपने मातहत पुलिस अफसरों को इस सिलसिले में एफआईआर दर्ज करने का हुक्म दिया. इसी दौरान रुकैया पर तेजाब फेंकने के आरोपी आरिफ के खिलाफ आईपीसी की धारा 326ए (तेजाब के इस्तेमाल से जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना) के तहत मामला दर्ज किया गया. इसके बाद इस केस को अलीगढ़ के एक पुलिस स्टेशन में स्थानांतरित कर दिया गया. पुलिस आरोपी को पकड़ने की कोशिश करती रही, लेकिन वो चकमा देकर भागता रहा. एक दिन पहले ही अलीगढ़ पुलिस ने आरिफ को धर दबोचा. उसे जेल भेज दिया गया है.

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दिल दहला देने वाली है इस मानसिक बीमार लड़की के साथ हुई दरिंदगी की खौफनाक दास्तान

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रुकैया जैसी आगरा की मधु की दर्दनाक दास्तान

रुकैया खातून जैसी ही दर्द भरी कहानी आगरा की रहने वाली मधु की भी है. वारदात 22 साल पहले की है. एक रोज मधु आगरा के राजा की मंडी से ताजगंज के रास्ते पर थी. तभी कुछ मनचलों ने अचानक ही उसके ऊपर तेजाब फेंक दिया और उसकी जिंदगी हमेशा-हमेशा के लिए बदल गई. असल में उन्हीं दिनों मधु की सगाई हुई थी. मधु शादी कर नई जिंदगी की शुरुआत करनेवाली थी. लेकिन इसी बीच एक सिरफिरे ने मधु के नजदीक आने की कोशिश की, जिससे उसने मना कर दिया. इसके बदले में उस हैवान ने उसको कभी ना भुला पाने वाला जख्म दे दिया. इस वारदात ने उसे और उसके घरवालों को इतना डरा कर रख दिया कि उसने कभी पुलिस से शिकायत करने की हिम्मत ही नहीं जुटाई. लेकिन एक वो दिन था और एक आज का दिन, मधु को अब भी इंसाफ का इंतज़ार है. रुकैया और मधु जैसी एसिड अटैक सर्वाइरों की कहानी वाकई दिल झकझोरने वाली है. 

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