आसाराम बापू के पास गिरफ्तारी से बचने के लिए अब बस आखिरी एक दिन बचा है. अगर जोधपुर पुलिस की तय मियाद यानी 30 अगस्त तक आसाराम खुद पुलिस के सामने हाज़िर नहीं होते तो मान कर चलिए कि उसके बाद वो कभी भी गिरफ्तार हो सकते हैं. यानी गिरफ्तारी की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है. वैसे भी पुलिस ने आसाराम को और रियायत देने से साफ मना कर उनकी मुसीबत बढ़ा दी है. पुलिस के इस तेवर को देखते हुए आसाराम ने अब इलजाम लगाया है कि ये सब कुछ सोनिया गांधी के इशारे पर हो रहा है.
कृष्ण के पुजारी की कंपकंपी छूट रही हैं. गिरफ्तारी के ख़ौफ़ का ज्वार आ रहा है. जन्माष्टमी के प्रवचनों में साफ झलक रहा है. दही हांडी छूट रही है. कभी सूरत, कभी इंदौर, कभी इधर-कभी उधर... लगता है आसाराम को समझ में नहीं आ रहा है कि वो करें तो क्या करें.
अब तो वक्त भी नहीं बचा है. 30 अगस्त तेजी से आ रहा है. गए थे आसाराम सूरत के आश्रम में जन्माष्टमी मनाने. संतसंग करने. दही हांडी फोड़ने. सतसंग तो कर लिया लेकिन हड़बड़ाहट में दही हांडी बिना फोड़े लौट आए.
एक तरफ पुलिस पीछे पड़ी है. आसाराम को अब रत्ती भर भी वक्त देने से इनकार कर रही है समन के साथ हाथ धो कर पीछे पड़ी है. आसाराम के आश्रमों पर लोगों का गुस्सा फूट रहा है. आफत हर ओर से आ रही है. एक नाबालिग के यौन उत्पीड़न के आरोप ने आसाराम की सफेद पोशाक पर काला कलंक लगा दिया है.
पीड़ित का परिवार आसाराम को फांसी मांग रहा है. बेटी के साथ हुए गुनाह का इंसाफ मांग रहा है.
अभी तक आसाराम खुले घूम रहे हैं. जोधपुर से सूरत और सूरत से इंदौर का भ्रमण कर रहे हैं कल तक हरि के नाम से सरकार और पुलिस की हवा खराब थी लेकिन अब हवा बवाली बाबा की खराब है.
आसाराम ने गिरफ्तारी से बचने के अपने सारे घोड़े खोल दिए. समन लेने के लिए घंटों पुलिस को इंतजार करवाया. लेकिन अब उल्टी गिनती चल रही है. अब बवाली बाबा वैसे ही फड़फड़ा रहे हैं, जैसे दीया बुझने से पहले.
कलंक कीचड़ से आसाराम सन चुके हैं. झाड़ के पहाड़ पर बैठे आसाराम का सच शायद अब जमाने के सामने आ चुका है. भक्ति के मंडप में चरित्र के कीचड़ को चालबाजी के जिस चोले से बाबा ने ढक रखा था. बदनामी के बवंडर ने उसे उघाड़ दिया है. और अब गिरफ्तारी का काउंट डाउन शुरु हो गया है.
लोगों को सदाचार और धैर्य की सीख देनेवाले आसाराम आजकल गुस्से के सातवें आसमान पर हैं. कसते कानूनी शिकंजे और सियासी हमले से बौखलाए आसाराम कभी गुनाह साबित करनेवाले को लाखों रुपए के इनाम का ऐलान करते हैं, तो कभी अपने खिलाफ शिकायत करनेवाली लड़की को साज़िश का मोहरा करार देते हैं. लेकिन अब आसाराम ने जो दांव खेला है, वो सारे दांवों से बढ़ कर है. दांव सोनिया और राहुल पर सीधे हमले का.
एक बड़ी ही पुरानी कहावत है. खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे. बवाली बाबा को आजकल कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि वो क्या करें. क्या बोलें बस मुंह में जो आता है बक जाते हैं, जो मन में आया ऊल जुलूल बोल जाते हैं. अब कांग्रेस बिलबिला रही है और बाबा पर भड़क रही है. और बाबा कह रहे हैं कि उनके खिलाफ साज़िश हो रही है. बाबा तो भोपाल में बोलकर चलते बने. लेकिन पीछे चिंगारी छोड़ गए.
सच तो ये है कि आसाराम पर अभी तक कांग्रेस भी लुका छिपी खेल रही थी, लेकिन अब बवाली बाबा का बयान, पार्टी को जहर बुझे तीर के माफिक चुभ रहा है.
बाबा पर बवंडर तो पहले भी मचा है, लेकिन इस बार नाबालिग लड़की ने आसाराम पर यौन शोषण का आरोप दर्ज कराया है, अब क्या साधु, क्या संत, क्या नेता, क्या जनता सब आसाराम पर पिल पड़ हैं.
एक संत ने सदाचार को ऐसा सदमा दिया था. संसद को सोचना पड़ गया. एक नाबालिग बच्ची ने पुलिस को बताया था कि आसाराम के दिए जख्म की टीस भुलाए नहीं भूलती. अब तमाम पार्टी एक तरफ हैं और बीजेपी आसाराम के प्रताप में पिघल रही है.
आसाराम पर संसद में, सड़क पर शहर, गलियों में चर्चा हो रही है. यौन शोषण के आरोप से बाबा भड़क रहे हैं. और तो और आसाराम ने मुंबई से सूरत जा रहे हवाई जहाज में आजतक की टीम के साथ बदसलूकी की.
जो आसाराम अब तक बदतमीजी पर उतर रहे थे. मीडिया से भड़क रहे थे. अब गिरफ्तारी काउंट डाउन शुरू हुआ, तो कल तक आसाराम की शिष्या एक विशेष समुदाय के बारे में जो कुछ कह रही थी, उस पर बाबा सफाई देने लगे.
अब आसाराम बार बार दुहाई दे रहे हैं, दुनिया जमाने को सुना रहे हैं, वो बेकसूर हैं, वो जेल जाने को तैयार हैं, लेकिन उनके खिलाफ साजिश हो रही है, वो कह रहे हैं, आरोप साबित करने वाले वो इनाम देंगे, वो भी पांच लाख का.
सड़क से संसद तक उठा बवाल और अब 30 अगस्त तक का अल्टीमेटम ये बताने के लिए काफी है कि कानून से बड़ा कोई नहीं है. आसाराम भी नहीं.
कहते हैं जब मुसीबतें आती हैं, तो चारों तरफ से आती हैं. आसाराम के हालात इन दिनों ठीक ऐसे ही हैं. अभी आसाराम जोधपुर में अपने खिलाफ दर्ज यौन शोषण के मामले से बचने की जुगत ही लगा रहे हैं कि उनके खिलाफ दो और शिकायतों ने मुसीबत बढ़ा दी है. पहली शिकायत एक परिवार की है, जिसका बेटा आसाराम के आश्रम में गुम हो गया, जबकि दूसरी शिकायत आसाराम के यौन शोषण की शिकार एक दूसरी लड़की की.
आसाराम के आश्रमों पर एक के बाद एक बदनामी का कलंक लग रहा है. आसाराम के इसी भगवान वाले चेहरे पर भरोसा कर लिया था, दिगंबर मस्के के परिवार ने. इस परिवार का इकलौता चिराग आसाराम के आश्रम में गया था, लेकिन आजतक नहीं लौटा. 11 बरस बीत गए. लेकिन इस परिवार का चिराग नहीं लौटा. मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के रहने वाले दिगंबर मस्के की 3 बेटियां और एक बेटा प्रमोद मस्के है. दिगंबर छिंदवाड़ा के गुलाबरा में रहने वाले शिक्षा विभाग में एकाउंटेंट है.
मस्के परिवार का आरोप है कि आसाराम ने उनके बेटे पर कोई जादू टौना किया है, जिसकी वजह से उनका पुत्र नहीं लौटा. 2 बहनों की शादी हो गई, और छोटी बहन हर साल राखी के लिए भाई का इंतजार करती है. परिवार डर रहा है कि कहीं वो अपने लाडले को गंवा ना दें.
आरोपों के दलदल में धंसे आसाराम पर एक संगीन आरोप एक अन्य लड़की भी लगाती है. 9 साल पहले सत्संग के लिए जब आसाराम रायपुर पहुंचे थे तो अपने मां-बाप के साथ ये लड़की भी आसाराम का आशीर्वाद लेने गई. लेकिन लडकी का आरोप है कि आसाराम ने उससे छेड़छाड़ की थी.
तब तो वो नाबालिग लड़की डर के मारे खून का घूंट पीकर रह गई थी. लेकिन जोधपुर घटना के बाद उसका दर्द उभर आया है. इसने अपनी आपबीती छत्तीसगढ़ के कुछ महिला संगठनों को सुनाया तो सारी चीजें बेपर्दा हुईं.
आसाराम अपने रायपुर के आश्राम में सालाना छह से आठ बार सत्संग के लिए आते हैं. जाहिर है कि उन पर लगे आरोपों से उनकी राह और मुश्किल भरी हो सकती है.
आसाराम एक, इल्जाम हजार... आसाराम के सफेद चोले पर कलंक का कोई एक धब्बा होता, तो भी गनीमत थी. लेकिन अब तो इल्जामों के चलते पूरा का पूरा सफेद चोला ही काला दिखने लगा है. और इस कालिख में यौन शोषण, वशीकरण, सम्मोहन, अपहरण सारे गुनाह शामिल हैं.
आसाराम बापू पर नाबालिग से बलात्कार का आरोप लगा है, और वो गिरफ्तार नहीं हुए. ये पहली बार नहीं है, आसाराम जादू-टोने में भी गिरफ्तार नहीं हुए. बच्चे मर गए लेकिन पुलिस ने नहीं छुआ. ऐसा लगता है कलेजे पर पत्थर रख लिया कानून ने. क्या संत के चोले से पुलिस भी दो कदम पीछे हटती है.
जुलाई 2008 में जब आसाराम के अहमदाबाद आश्रम में पढ़ने वाले दो मासूम बच्चों की लाश आश्रम के साथ ही बहने वाली साबरमती में मिली, 11 साल के दिनेश वाघेला और 10 साल के अभिषेक वाघेला की रहस्यमी मौत के बाद घरवालों ने जिम्मेदार आसाराम के आश्रम को ठहराया. यहां तक पुलिस ने भी अपने हलफनामें में आश्रम में चलने वाले काले जादू और दूसरी रहस्यमयी कारस्तानियों का खुलासा किया था. आसाराम का बाल भी बांका ना हुआ क्या ऐसा संत के आश्रम में होता है. क्या संत पर काले जादू का आरोप लगता है.
30 जुलाई 2008 को मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में आसाराम के गुरुकुल में साढ़े चार साल के बच्चे की लाश मिली. इसके बाद हड़कंप मचा. बवाल हुआ क्योंकि लाश आश्रम के बाथरूम में मिली थी. इसके बाद पुलिस ने इस मामले में गुरुकुल के ही नौवीं क्लास में
पढ़ने वाले बच्चे को पकड़ा, जिसका कहना था कि वो किसी भी हाल में आश्रम की कैद से आजाद होना चाहता है. आसाराम के आश्रम पर बदनुमा धब्बा लगा. फिर भी क्या, आसाराम संत हैं.
साल 2009 के दिसंबर के महीने आसाराम बापू पर उन्हीं के एक पूर्व भक्त राजू चंडोक ने अपनी हत्या की कोशिश करने का आरोप लगा कर सनसनी फैला दी थी. वारदात तब हुई थी, जब राजू एक रात बाइक से अपने घर लौट रहे थे और अंधेरे में दो लोगों ने हत्या के इरादे से उन पर गोली चला दी थी. गुजरात पुलिस ने आसाराम को इस मामले में भी नामजद किया था. फिर भी वो संत हैं. आस्था का चोला ओढ़कर आध्यात्म गुरु बनकर बैठे हैं. तमाम विवादों और आरोपों के बाद भी क्या आसाराम को संत कहलाने का हक है.