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Atiq-Ashraf Murder Case: भारी पुलिस सुरक्षा व्यवस्था के बीच अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या क्या एक सोची समझी साजिश थी? क्या इस साजिश के पीछे यूपी पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत थी? ये सवाल या शक देश की किसी मीडिया या समाचार एजेंसी ने नहीं उठाया, बल्कि देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के एक जस्टिस ने ये बात कही है. असल में इस हत्याकांड से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ने ये बात कही.
15 अप्रैल 2023, प्रयागराज
पूर्व सांसद और बाहुबली माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ के कत्ल की लाइव तस्वीरें पूरे देश ने टीवी पर देखीं. चारों तरफ पुलिसवाले थे. सभी के पास हथियार थे, लेकिन इसके बावजूद तीन हमलावर पुलिस के सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए अचानक अतीक और अशरफ के बिल्कुल करीब पहुंचते हैं और दोनों को तब तक गोली मारते हैं, जब तक कि दोनों मर नहीं जाते. और ये सब होता है पुलिसवालों की आंखों के सामने. इस डबल मर्डर की तस्वीरें देश के साथ-साथ देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने भी देखीं. पुलिस हिरासत में हुए इस डबल मर्डर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद गंभीर बात कही है. सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि इसके पीछे किसी की मिलीभगत है. इसमें पुलिस या प्रशासन के व्यक्ति शामिल हैं.
यूपी सरकार से तीखे सवाल
ज़़ाहिर है सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणी सीधे यूपी पुलिस और प्रशासन पर उंगली उठाती है. दरअसल, इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से चुभने वाले सवाल पूछे हैं-
- अतीक और अशरफ की हत्या में किसकी मिलीभगत है ?
- पांच-दस पुलिस वालों की मौजूदगी में आख़िर क़त्ल कैसे हुआ?
- कहां पहुंची अतीक और अशरफ मर्डर केस की जांच?
- 2017 से अब तक हुए 183 एनकाउंटर पर स्टेटस रिपोर्ट दे यूपी सरकार
कैसे हो रही मिलीभगत?
असल में अतीक की बहन आयशा नूरी ने अपने दोनों भाइयों के कत्ल के मामले की जांच को लेकर सुपीम कोर्ट में एक अर्जी दाखिल की थी. जिसकी सुनवाई करते हुए जस्टिस रविंद्र भट्ट और जस्टिस अरविंद कुमार की बेंच ने यूपी सरकार को घेर लिया. मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस रविंद्र भट्ट ने पूछा, "5 से 10 लोग जिनकी सुरक्षा कर रहे हों, कोई कहीं से भी आकर उन्हें कैसे गोली मार सकता है? इसमें पुलिस या प्रशासन के अंदर से ही किसी से मिलीभगत है?"
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
इस मामले में अतीक का परिवार सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है. बहन आयशा नूरी और वकील विशाल तिवारी ने याचिका में डबल मर्डर की जांच के लिए रिटायर्ड जज के नेतृत्व में कमेटी गठित करने की मांग की है. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि ये सिर्फ हाई प्रोफाइल केस का मामला नहीं है. ऐसी घटनाएं जेल में भी हो रही हैं. वो कौन लोग हैं जो इन्हें करते हैं? जेल से एक नेक्सस यानी मिलीभगत के जरिए काम किया जा रहा है.
यूपी सरकार से मांगी स्टेटस रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने अतीक और अशरफ के कत्ल के मामले की जांच को लेकर यूपी सरकार से स्टेटस रिपोर्ट भी फाइल करने को कहा. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने 2017 से लेकर अब तक यानी योगी राज में हुए 183 एनकाउंटर के मामलों पर भी डिटेल स्टेटस रिपोर्ट मांगी. कोर्ट ने कहा कि राज्य में जो 183 पुलिस एनकाउंटर हुए, उनमें किस मामले की जांच कहां तक पहुंची, किस मामले में चार्जशीट दाखिल हुई और किस मामले में नहीं, इस पर राज्य सरकार के एक डिटेल्ड स्टेटस रिपोर्ट फाइल करें.
NHRC के दिशा-निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी NHRC के दिशा-निर्देश क्या हैं? फिलहाल लोगों का विश्वास बहाल करने की भी जरूरत है. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि लोगों का भरोसा कैसे बहाल करेंगे? क्योंकि पुलिस तो वही है, जिसकी निगरानी में जेल में भी ऐसी घटनाएं हो रही हैं.
जुलाई में यूपी सरकार ने दिया था हलफनामा
उत्तर प्रदेश सरकार ने अतीक और अशरफ के कत्ल के मामले में जुलाई के महीने में सुप्रीम कोर्ट में एक एफिडेविट सौंपा था, जिसमें सरकार ने बताया था कि वो अतीक और अशरफ की पुलिस सुरक्षा में रही खामियों की फिलहाल जांच कर रही है. इस स्टेटस रिपोर्ट में सरकार ने बताया है कि इस सिलसिले में कोर्ट में जो चार्जशीट दाखिल की गई है, उसमें प्रयागराज के कोतवाली पुलिस स्टेशन के एक क्लर्क को भी नामजद किया गया है, जिस पर आपराधिक धोखाधड़ी का इल्जाम है. यूपी सरकार ने इस रिपोर्ट में जानकारी दी थी कि इस वक्त जस्टिस बीएस चौहान आयोग के सुझावों के मुताबिक पूरे यूपी में पुलिस रिफॉर्म का दौर चल रहा है और इसी सिलसिले में सारे थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की प्रक्रिया भी जारी है.
नाबालिग बेटों को हिरासत में रखे जाने पर ऐतराज
सुप्रीम कोर्ट ने अतीक अहमद के नाबालिग बेटों को हिरासत में रखे जाने पर भी ऐतराज जताया और पूछा, अतीक के दो नाबालिग बेटों को न्यायिक हिरासत में क्यों रखा गया है? अगर वो किसी अपराध में शामिल नहीं हैं, तो फिर उन्हें रिश्तेदारों को क्यों नहीं सौंपा जा सकता है? अगर अतीक के परिवार की बात करें, तो उसके 5 बेटे हैं. बड़ा बेटा उमर लखनऊ के जेल में तो छोटा बेटा अली प्रयागराज के नैनी जेल में बंद है. तीसरे बेटे असद का झांसी में एनकाउंटर किया जा चुका है. दो नाबालिग बेटे एहजम अहमद और अबान अहमद प्रयागराज के बाल संरक्षण गृह में मौजूद हैं. पुलिस ने उमेश पाल की हत्याकांड में दोनों नाबालिग बेटों के भी साजिश में शामिल होने की बात कही है.
अतीक की बहन कर रही थी कोर्ट में पैरवी
अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन पर पुलिस ने उमेश पाल हत्याकांड की साजिश में शामिल होने के आरोप में 50,000 का इनाम घोषित कर रखा है. चूंकि वो वारदात के बाद से ही फरार चल रही है और अब तक पकड़ी नहीं गई है, पुलिस उसे भगोड़ा घोषित कर चुकी है. शाइस्ता परवीन के घर पर धारा 82 के तहत नोटिस चस्पा की जा चुकी है. अतीक अहमद की चार बहने हैं. शाहीन, आयशा, बेबी और बज्जो. अतीक की बड़ी बहन प्रयागराज में ही रहती है, जिसका नाम शाहीन है और जिसके पति का नाम मोहम्मद अहमद है. इन पर भी रंगदारी मांगने की एफआईआर दर्ज है. प्रयागराज पुलिस ने एफआईआर दर्ज होने के बाद बहनोई मोहम्मद अहमद को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. बताया जा रहा है कि बाल संरक्षण गृह में रह रहे अतीक अहमद के दोनों नाबालिक बेटों की सुपुर्दगी के लिए शाहीन ही कोर्ट में पैरवी कर रही थी कि दोनों नाबालिग बेटे उनको सौंप दिया जाएं.
दो बहनों का अतीक के परिवार से कोई ताल्लुक नहीं
अतीक अहमद की दूसरी बड़ी बहन आयशा नूरी है. जिसकी शादी मेरठ के डॉक्टर इखलाक से से हुई है. डॉक्टर इखलाक को उमेश पाल हत्याकांड में पांच लाख के नामी गुड्डू मुस्लिम को शरण देने और आर्थिक मदद पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है. आयशा नूरी और उसकी बेटी उनजला की भी पुलिस तलाश कर रही है. यह अलग बात है आयशा नूरी और उसकी बेटी को अब तक पुलिस ने ना तो इनाम रखा है ना ही भगोड़ा घोषित किया है. अतीक अहमद से छोटी बहन का नाम सीमा उर्फ बेबी है जो प्रयागराज में ही रहती है. लेकिन उसका अतीक अहमद और उसके परिवार से लंबे समय से संपर्क नहीं है. सबसे छोटी बहन बज्जो अलीगढ़ में रहती है. उसके ससुरालवाले बिजनेस करते हैं. लेकिन उन्होंने भी अतीक अहमद से कोई रिश्ते नहीं रखे हैं.
गिरफ्तार किए जा चुके हैं अतीक के दोनों वकील
वैसे अतीक के नाते-रिश्तेदारों की तो छोड़िए अतीक के दो वकील सौलत खान हनीफ और विजय मिश्रा को भी पुलिस उमेश पाल हत्याकांड के सिलसिले में गिरफ्तार कर चुकी है. पुलिस ने कत्ल से पहले पहचान कराने के इरादे से उमेश पाल की तस्वीरें अतीक के बेटे को भेजने के जुर्म में सौलत खान हनीफ को गिरफ्तार किया था. इससे पहले कोर्ट ने खान सौलत हनीफ को राजू पाल हत्याकांड में शामिल होने के जुर्म में उम्र कैद की सजा सुनाई थी. बाद में उसकी मोबाइल डिटेल के आधार पर अतीक के दूसरे वकील विजय मिश्रा को भी पकड़ा गया. पुलिस रिपोर्ट की मानें तो उमेश पाल की लोकेशन अतीक के गुर्गों को बताने में विजय मिश्रा की भी भूमिका रही. विजय मिश्रा पर प्रयागराज के एक प्वाईवुड कारोबारी से लाखों रुपये की रंगदारी मांगने का भी केस दर्ज है. प्रयागराज की धूमनगंज पुलिस ने 30 जुलाई को अतीक के वकील विजय मिश्रा को लखनऊ के हयात होटल के पास से गिरफ्तार किया था.