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हाजीपुरः हाइवे पर पति का मर्डर, मास्टरमाइंड निकला पत्नी का अनजान आशिक

पुलिस की मानें तो मरनेवाला संजय कुमार पटना के नुरानीबाग इलाके में रहता था. और पेशे से एक मेडिकल रिप्रेज़ंटेटिव था. पुलिस ने मौका-ए-वारदात का बारीकी से मुआयना किया. उसने देखा कि मौके पर ही संजय की बाइक और दूसरी चीज़ों के साथ-साथ एक मिठाई का डिब्बा भी पड़ा है.

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संजय की हत्या के पीछे एक ऐसे अनजान शख्स का हाथ है, जो पुलिस की पहुंच से बाहर है
संजय की हत्या के पीछे एक ऐसे अनजान शख्स का हाथ है, जो पुलिस की पहुंच से बाहर है

बिहार में एक कत्ल होता है. पुलिस तफ्तीश करती है. पुलिस को जांच में पता चलता है कि इस कत्ल के पीछे दो लोगों का हाथ है. इसके बाद पुलिस एक कातिल को गिरफ्तार कर लेती है. अब बारी दूसरे कातिल की थी. लेकिन यहीं कहानी फंस जाती है. क्योंकि पहला कातिल कत्ल की बात को कुबूल करता है. लेकिन अपने साथी कातिल के बारे में उसे कुछ नहीं पता होता. ना वो उसका नाम जानता है, ना पता. ना मोबाइल नंबर, ना ही उसका चेहरा. सवाल था कि ऐसा कैसे मुमकिन हो सकता है. लेकिन हकीकत यही थी.

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5 अक्टूबर 2020, पटना-हाजीपुर हाईवे, रात 10 बजे
रात गहराती जा रही थी और हर गुज़रते लम्हे के साथ सड़क पर वाहनों की तादाद कम होती जा रही थी. तभी एक शख्स अपनी बाइक पर पटना से हाजीपुर की तरफ चलता चला जा रहा था. इसी बीच जैसे ही वो इंडस्ट्रियल थाने के पानहाट इलाके में पहुंचा, उसके साथ एक भयानक वारदात हो गई. पीछे से बाइक पर ही दो हमलावर आए और उस शख्स को बेहद करीब से गोली मारी. एक गोली उसके सीने समेत जिस्म के दूसरे हिस्सों में पांच गोलियां लगीं और और देखते ही देखते उसकी मौके पर ही मौत हो गई. गोलियों की आवाज़ और बाइक से एक शख्स को नीचे गिरता देख हाइवे पर अफरातफरी के हालात पैदा हो गए. थोड़ी ही देर में उस शख्स को गोलियों का निशाना बनानेवाले क़ातिल भी अंधेरे का फायदा उठा कर मौके से फ़रार हो गए.

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आनन-फ़ानन में खबर हाजीपुर पुलिस तक पहुंची. पुलिस ने मौके पर आकर गोलियों से छलनी शख्स को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों का उसकी जांच करना भी मानों सिर्फ़ एक औपचारिकता भर रह गई थी. डॉक्टरों ने उसे मुर्दा करार दिया. उधर, मौके पर पहुंची पुलिस ने जब क़ातिलों का शिकार बने शख्स की जामा तलाशी ली, तो उसकी ड्राइविंग लाइंसेस और आई कार्ड जैसी कई चीज़ों के साथ उसका मोबाइल फ़ोन और पर्स भी पुलिस के हाथ लग गए. जिससे अव्वल तो उसकी पहचान साफ हो गई और दूसरा ये भी साफ हो गया कि उसका क़त्ल कम से कम लूट के लिए तो नहीं किया गया.

पुलिस की मानें तो मरनेवाला संजय कुमार पटना के नुरानीबाग इलाके में रहता था. और पेशे से एक मेडिकल रिप्रेज़ंटेटिव था. पुलिस ने मौका-ए-वारदात का बारीकी से मुआयना किया. उसने देखा कि मौके पर ही संजय की बाइक और दूसरी चीज़ों के साथ-साथ एक मिठाई का डिब्बा भी पड़ा है. यानी फ़ौरी तौर पर ये लगता था कि संजय शायद हाजीपुर किसी से मिलने जा रहा था. इसी बीच क़ातिलों ने घात लगा कर उसकी जान ले ली. 

लेकिन वो शख्स कौन था, संजय जिससे मिलने पटना से हाजीपुर जा रहा था. सच्चाई ये थी कि इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं था. यहां तक कि खुद संजय के घरवालों को भी नहीं पता था कि आख़िर वो हाजीपुर क्या करने जा रहा था. लेकिन मौका-ए-वारदात पर हैरान करनेवाली बात ये थी कि लाश के पास ही संजय का मोबाइल फ़ोन तो पड़ा था, लेकिन उसके फोन से दोनों सिम कार्ड गायब थे. अब सवाल ये था कि आख़िर संजय के मोबाइल में ऐसा कौन सा राज़ था, जिसे क़ातिल अपने साथ ले जाना चाहते थे. और सच पूछिए, तो क़ातिलों के इसी हरकत से पुलिस को इस मामले की तफ्तीश की पहली लीड मिली. 

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अब पुलिस का सारा ध्यान संजय के मोबाइल फ़ोन पर था. पुलिस को सिम कार्ड तो नहीं मिले, लेकिन उसकी पहचान पता होने के बाद पुलिस ने उसके दोनों नंबरों की कॉल डिटेल निकलवाई और इसी के साथ पुलिस को इस वारदात का पहला सुराग भी मिल गया. मामले की छानबीन कर रही पुलिस ने देखा कि संजय उस रात लगातार किसी से फ़ोन पर बात करता हुआ पटना से हाजीपुर की तरफ जा रहा था. 

अब सवाल ये था कि आख़िर वो शख्स कौन था, जिससे आख़िरी वक़्त पर संजय की बात हो रही थी. कहीं यही संजय का क़ातिल या फिर उसके क़त्ल का मास्टरमाइंड तो नहीं था. इत्तेफ़ाक से संजय की बीवी या फिर उसके परिवार के दूसरे लोग भी इस शख्स को नहीं जानते थे. छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला कि संजय के रिश्ते अपनी पत्नी से भी अच्छे नहीं थे. संजय की आशिक मिज़ाजी के चलते दोनों के बीच विवाद भी रहा करता था. ऐसे में सवाल ये भी था कि आख़िर संजय मिठाई का डिब्बा लेकर मोबाइल पर बात करते हुए किसके पास जा रहा था. कहीं ये उसकी कोई गर्लफ्रेंड तो नहीं थी. फिलहाल, सवाल कई थे और जवाब कोई नहीं था.

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इस बीच मामले की जांच कर रही पुलिस को ज़ोर का झटका तब लगा, जब उसे पता चला कि संजय अपनी मौत से पहले जिस नंबर से लगातार बात कर रहा था, वो नंबर तो फ़र्ज़ी नाम पते पर लिया गया था. पुलिस ने पाया कि वो नंबर एक राजमिस्त्री की बीवी के नाम पर था. और खुद राजमिस्त्री और उसकी बीवी को दूर-दूर तक इस बात की खबर नहीं थी. यानी वो नहीं जानते थे कि उनके नाम पर मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करनेवाला शख्स कौन था. लेकिन बेशक पुलिस को इस नंबर के असली मालिक का पता ना चल पाया हो, लेकिन इसी नंबर की कॉल डिटेल ने ना सिर्फ पुलिस को इस क़त्ल का एक जबरदस्त सुराग दिया, बल्कि इसी सुराग के साथ मामले में एक ग़जब का ट्विस्ट भी आ गया.

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मामले की जांच कर रही पुलिस को पता चला कि संजय जिस नंबर पर बात करता हुआ हाजीपुर की तरफ़ जा रहा था, वो नंबर तो फर्ज़ी नाम पते पर लिया गया था, तो पुलिस को यकीन हो गया कि हो ना हो इस क़त्ल के पीछे कोई गहरी साज़िश है. अब पुलिस ने मामले की जांच संजय के परिवार की तरफ़ घुमा दी. खासकर पत्नी की तरफ. पुलिस जान चुकी थी कि संजय के अपनी पत्नी से अच्छे रिश्ते नहीं हैं. पुलिस को ये शक भी होने लगा कि कहीं इस क़त्ल के पीछे संजय की पत्नी रिंकी का ही तो हाथ नहीं है. लेकिन इस सच्चाई तक पहुंचने के लिए पुलिस को अभी कुछ बिंदुओं की पड़ताल करनी थी. 

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पुलिस को गोली चलानेवाले क़ातिलों के साथ रिंकी के संबंधों का पता लगाना था. इसी इरादे से अब पुलिस ने एक तरफ़ तो उस गुमनाम शख्स के मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल निकलवाई, दूसरी तरफ उसने रिंकी के मोबाइल फ़ोन की कॉल डिटेल की जांच करने का भी फ़ैसला किया और इस कोशिश ने पुलिस को एक बड़ा सुराग दे दिया. दरअसल, कॉल डिटेल से पता चला कि संजय अपनी ज़िंदगी के आख़िरी वक्त पर जिस नंबर से लंबी बात करता हुआ हाजीपुर की तरफ़ जा रहा था, उस नंबर से तो संजय की बीवी रिंकी की भी लंबी बातें हुआ करती थी. यानी ये शख्स जो भी था, वो रिंकी को और रिंकी उस शख्स को अच्छी तरह जानती थी. 

अब ऐसे में पुलिस ने रिंकी से पूछताछ करने का फ़ैसला किया. पूछताछ में रिंकी ने सवालों से बचने की कोशिश तो की लेकिन आख़िरकार सबूतों से सामना होने पर उसे कबूलना ही पड़ा कि वो उस शख्स को जानती है, जिस शख्स से उसके पति संजय की आखिरी वक़्त पर लगातार बात हो रही थी. लेकिन रिंकी ने ये कह कर पुलिस को भरमा दिया कि वो उस शख्स का सिर्फ नाम ही जानती है. इसके सिवाय उसे उसके बारे कुछ भी नहीं पता. रिंकी ने अपने इस दलील के हक में पुलिस को जो कहानी सुनाई, वो कुछ ऐसी थी.

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संजय की पत्नी रिंकी ने बताया कि अपने पति की बेरुखी की वजह से वो फेसबुक और व्हाट्स एप पर कुछ ज़्यादा ही एक्टिव रही थी. एक रोज़ व्हाट्स एप पर उसकी डीपी देख कर एक अंजान शख्स ने उसकी तारीफ़ों के पुल बांध दिए और इसी के साथ उसकी उस अनजान शख्स से लंबी बातें होने लगीं. उसने बातों ही बातों में अपने पति संजय की बुराई शुरू कर दी और बताया कि संजय उसे कितना सताता है. इस पर रिंकी के इस अजनबी आशिक ने रिंकी से कहा कि ऐसे में उसके पति संजय को जीने का कोई हक़ नहीं है. रिंकी ने भी ये पूछ कर कि क्या वो उसके पति को मार भी सकता है, मानों अपने अजनबी आशिक को उकसा दिया. और इसके बाद जो कुछ हुआ, वो कोई सोच भी नहीं सकता था.

सबूत बता रहे थे कि ये वो अजनबी आशिक ही था, जिसने पहले रिंकी के पति संजय को अपनी बातों में उलझाया और फिर उसी से बात कर संजय उस रात हाजीपुर की तरफ़ जा रहा था, लेकिन बीच रास्ते में ही क़ातिलों ने उसे गोली मार दी. इस पूरे मामले में सबसे हैरानी की बात ये रही कि रिंकी सोशल मीडिया में मिले उस अनजान और अजनबी शख्स से ना सिर्फ़ प्यार करती रही, बल्कि उसे अपने दिल की बातें भी बताती रही और यहां तक कि उससे अपने ही पति की शिकायतें भी करती रही. 

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दूसरी ओर उस शख्स ने रिंकी को अगर अपने बारे में कुछ बताया था तो वो सिर्फ़ इतना कि उसका नाम अमित है. हालांकि वो अनजान आशिक़ इतना खूंखार निकला कि उसने रिंकी की बातें सुन कर उसके पति को एक ही झटके में गोलियों से उड़ा दिया. अब पुलिस ने अपने ही पति के क़त्ल की साज़िश रचने के जुर्म में रिंकी को तो गिरफ्तार कर लिया है. लेकिन रिंकी के उस अनजान आशिक और संजय के क़त्ल के असली गुनहगार का अब तक कोई अता-पता नहीं है. पुलिस उसकी तलाश कर रही है. 

हैरानी इस बात की है कि जिस अजनबी पर यकीन कर रिंकी ने उसे अपने पति की जान लेने के उकसा दिया, खुद को रिंकी ने उसका चेहरा तक नहीं देखा था. वो रिंकी से फ़ोन पर बात तो करता था, लेकिन उसने एक बार भी रिंकी के साथ वीडियो कॉल पर बात नहीं की. ऐसे में सवाल ये भी है कि क्या क़ातिल के दिमाग में पहले से ही संजय के क़त्ल की साज़िश घूम रही थी? अगर हां, तो क्यों? 

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