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ट्रूडो के मुल्क में पल रहे हैं भारत के ये 9 मोस्ट वॉन्टेड... पाकिस्तान जैसा न बन जाए कनाडा!

कई खालिस्तानी आतंकी और खूंखार गैंगस्टर भी कनाडा की पनाह में हैं. वो वहां रहकर भारत के खिलाफ अपना एजेंडा चला रहे हैं. वो कनाडा की जमीन पर रहकर भारत के खिलाफ साजिशें रचते हैं. भारत के नौजवानों को बहला फुसलाकर अपने साथ मिलाते हैं. उन्हें पैसों का लालच देते हैं.

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खालिस्तानी आतंकी कनाडा की जमीन पर बैठकर भारत के खिलाफ एजेंडा चलाते हैं
खालिस्तानी आतंकी कनाडा की जमीन पर बैठकर भारत के खिलाफ एजेंडा चलाते हैं

अब कनाडा भारत के दुश्मनों के लिए सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है. या यूं कहें कि दूसरा पाकिस्तान बनता जा रहा है. वहां कई ऐसे खालिस्तानी आतंकवादी और गैंगस्टर पनाह लिए बैठे हैं, जो भारत में मोस्ट वॉन्टेड हैं. पिछले साल 29 मई को पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या कर दी गई थी, इस हत्याकांड में भी कनाडा कनेक्शन सामने आया था. सिद्धू की हत्या के मास्टरमाइंड गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने वहीं बैठकर पूरी साजिश रची थी. 

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इतना ही नहीं कई खालिस्तानी आतंकी और खूंखार गैंगस्टर भी कनाडा की पनाह में हैं. वो वहां रहकर भारत के खिलाफ अपना एजेंडा चला रहे हैं. वो कनाडा की जमीन पर रहकर भारत के खिलाफ साजिशें रचते हैं. भारत के नौजवानों को बहला फुसलाकर अपने साथ मिलाते हैं. उन्हें पैसों का लालच देते हैं. कनाडा में नौकरी लगवाले का झांसा देते हैं और देश विरोध काम कराते हैं.

हाल ही में 9 ऐसे खालिस्तानी आतंकियों और कुख्यात गैंगस्टर्स के नाम सामने आए हैं, जिनके नाम भारत के मोस्ट वॉन्टेड अपराधियों की लिस्ट में शामिल हैं. ये नाम हैं- 

- सुखदूल सिंह उर्फ सुखा
- गुरपिंदर सिंह उर्फ बाबा दल्ला
- सतवीर सिंह वारिंग उर्फ सैम 
- स्नोवर ढिल्लन 
- लखबीर सिंह उर्फ लांडा
- अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डाला 
- चरणजीत सिंह उर्फ रिंकू बिहला
- रमनदीप सिंह उर्फ रमन जज
- गगनदीप सिंह उर्फ गगना हठूर

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ये सभी कनाडा में छिपकर भारत विरोधी एजेंडा चलाते हैं और ये सब राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA के रडार पर हैं. भारत सरकार ने इनमें से चार के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया हुआ है. इन शातिर अपराधियों के कनाडा में होने की पुष्टि के बाद प्रत्यर्पण की कार्यवाही शुरू हो सकती है. हालांकि, यह इतना आसान भी नहीं है. क्योंकि भारतीय सुरक्षा एजेंसियां कई बार इन आतंकियों और अपराधियों के कनाडा में छिपे होने के सबूत दे चुकी हैं. लेकिन कनाडा की ओर से इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई. पुराने हालात देखते हुए कनाडा से सहयोग की ज्यादा उम्मीद नहीं की जा सकती.

18 जून को हुआ था निज्जर का मर्डर
वो 18 जून 2023 की सुबह थी. उस दिन कनाडा के सर्रे शहर के एक गुरुद्वारे की पार्किंग में सुबह-सुबह जो कुछ हुआ, उसने लोगों को चौंका दिया. भारत में दसियों गुनाहों का इल्जाम अपने सिर पर लिए कनाडा में छुपे बैठे खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर को गुमनाम शूटर्स ने गोली मारकर मौत की नींद सुला दिया. निज्जर जैसे ही पार्किंग में पहुंचा, वहां पहले से घात लगाए बैठे शूटर्स ने उस पर गोलियां बरसानी शुरू कर दी और इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता शूटर अपना काम कर वहां से गुम हो गए.

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41 आतंकियों की लिस्ट में था निज्जर का नाम
ये निज्जर वो शख्स था, जिसका नाम भारत सरकार की ओर से तैयार की गई उन 41 आतंकियों की लिस्ट में शामिल था, जिसकी भारत को जिंदा या मुर्दा तलाश थी. और तो और निज्जर के ऊपर नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी यानी एनआईए ने 10 लाख रुपये के इनाम का ऐलान भी कर रखा था. लेकिन इससे पहले कि निज्जर को काबू किया जाता, उसके दुश्मनों ने उसे दुनिया से ही रुखसत कर दिया.

निज्जर की मौत पर ट्रूडो का बयान
निज्जर की हत्या के 3 महीने बाद अब कनाडा में मारे गए इस आतंकी को लेकर वहां की सरकार और खास कर वहां के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने जो बात कही है, उसने सिर्फ कनाडा या भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में बवाल मचा दिया है. सोमवार को कनाडा की संसद हाउस ऑफ कॉमंस में ट्रूडो ने कहा, "कनाडा की सुरक्षा एजेंसियां भारत सरकार और कनाडा के नागरिक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बीच की कड़ी के आरोपों की सक्रियता से जांच कर रही हैं. कनाडा की धरती पर कनाडा के नागरिक की हत्या में किसी विदेशी सरकार की संलिप्तता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. यह हमारी संप्रभुता का उल्लंघन है. यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है."

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बिना सबूत भारत पर इल्जाम
यानी ट्रूडो ने बगैर किसी सबूत के सीधे-सीधे निज्जर की मौत को लेकर भारत पर ऊंगली उठा दी और इस पर तो बवाल मचना ही था. लेकिन कनाडा की ओर से दिया गया ये बयान भी मानों काफी नहीं था, ट्रूडो के इस बयान के बाद वहां के विदेश मंत्री मेलानी जोली ने कहा कि वो इस वारदात के विरोध में भारत के एक प्रमुख राजनायिक को निष्कासित कर रहे हैं. अब जब कनाडा बिना सबूत के भारत पर इल्जाम पर इल्जाम लगा रहा हो, भारत के राजनायिक को देश से निकाल रहा हो, तो इस क्रिया के विपरीत प्रतिक्रिया तो होनी ही थी. तो बदले में भारत ने भी कनाडा के एक राजनायिक को पांच दिनों के अंदर भारत छोड़ कर चले जाने को कहा और खुद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कनाडा के इन आरोपों का करारा जवाब दिया.

बवाल के बीच सवाल
- आखिर कनाडा ही क्यों? 
- आखिर क्यों कनाडा भारत के दुश्मनों का पनागाह बन चुका है? 
- आखिर क्यों भारत से भागने वाले क्रिमिनल, गैंगस्टर्स, आतंकवादी और ऐसे ही दूसरे समाजविरोधी तत्व कनाडा में जाकर छुपते हैं? 
- आखिर भारत के इन गुनहगारों का क्यों वहां से भारत प्रत्यर्पण नहीं हो पाता? 

तो हम खालिस्तानी आतंकी निज्जर की मौत और उसकी आड़ में कनाडा के बे-सिर-पैर के इल्जामों के बीच कनाडा की इसी असलियत को जानने समझने की कोशिश करेंगे.

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कनाडा में पनाह लिए बैठे हैं कई गैंगस्टर
कनाडा में बेशक निज्जर को ढेर कर दिया गया हो, लेकिन अभी भी भारत के दुश्मनों में कई ऐसे नाम हैं, जो कनाडा में छुपे बैठे हैं. फिर चाहे वो गुरपतवंत सिंह पन्नू हो, लखबीर सिंह लांडा हो, चरणजीत सिंह उर्फ रिंकू रंधावा या फिर अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डल्ला जैसे आतंकवादी हों या फिर गोल्डी बराड़ और रमनदीप सिंह उर्फ रमन जज जैसे गैंगस्टर. भारत के ऐसे दुश्मनों की कोई कमी नहीं है, जो कनाडा में छुपे बैठे हैं. और ये हाल तब है, जब भारत ने बाकायदा इन आतंकियों और गैंगस्टरों का नाम अपनी मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में शामिल कर रखा है और कइयों के सिर पर लाखों रुपये का इनाम तक है.

कनाडा से ऑपरेट करते हैं भारत के कई मोस्ट वॉन्टेड
तारीख गवाह है कि कनाडा में ये कानून विरोधी तत्व ना सिर्फ छुट्टा घूमते रहे हैं, बल्कि वक्त वक्त पर अलग-अलग जलसों के बहाने भारत के खिलाफ जहर भी उगलते हैं. जिस खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की भारत को तलाश थी, उसने जालंधर में एक पुजारी की हत्या की थी. और उस पर एनआईए ने 10 लाख रुपये के इनाम का ऐलान कर रखा था. इसके बावजूद वो कनाडा में खुल कर भारत के खिलाफ बकवास कर रहा था, खालिस्तानी सोच को हवा दे रहा था. इसी तरह सिख फॉर जस्टिस के नाम से एक आतंकी संगठन चलाने वाला गुरपतवंत सिंह पन्नू भी अक्सर भारत के खिलाफ बोलता और खालिस्तानी सोच को बढ़ावा देता रहा है. पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला के कत्ल के आरोपी गोल्डी बराड़ से लेकर दूसरे गैंगस्टर तो खैर वहां से ऑपरेट कर ही रहे हैं.

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कनाडा से नहीं प्रत्यर्पण की उम्मीद
और तो और भारत ने 7 ऐसे गैंगस्टरों के खिलाफ ना सिर्फ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर रखा है, जो कनाडा में छुपे बैठे हैं, बल्कि उनके खिलाफ अलग-अलग वक्त पर डोजियर की सूरत में कनाडा को कई सबूत भी सौंपे हैं, लेकिन इसके बावजूद कनाडा की सरकार ने कभी ऐसे लोगों के खिलाफ वहां कोई कार्रवाई नहीं की. प्रत्यर्पण की बात करें, तो उसकी तो उम्मीद ना के ही बराबर है. आपको याद होगा जस्सी ऑनर किलिंग मामले में भी कनाडा में दो आरोपियों के प्रत्यर्पण में पूरे 18 साल लगा दिए थे. 

खालिस्तान की हिमायती है NDP
अब सवाल ये है कि आखिर कनाडा ऐसा करता क्यों है? उसकी आखिर भारत से क्या दुश्मनी है? तो इसका जवाब है कनाडा की आंतरिक राजनीति, जिसमें अब ऐसे तत्वों का अच्छा-खासा दखल है, जो खालिस्तान के हिमायती हैं. इस मामले को अच्छी तरह समझने के लिए आपको ट्रूडो के समर्थक, पूर्व खालिस्तानी और एनडीपी नेता जगमीत सिंह को सुनना चाहिए.

अपने ही देश में आलोचना का शिकार बने ट्रूडो
असल में सियासी तकरीरों से पहले ये खालिस्तानी रैलियों का एक अहम चेहरा था. और इन दिनों खुद ट्रूडो की सरकार इस एनडीपी पार्टी की बैसाखी पर टिकी है. यानी मामला ये है कि अपनी कुर्सी बचाने के लिए ट्रूडो ऐसे तत्वों के हाथों में खेल रहे हैं, जो दूसरे देश के दुश्मन हैं. और इत्तेफाक से फिलहाल ये दुश्मनी दुनिया में सबसे तेजी से तरक्की करने वाले देशों में से एक भारत के साथ है. यही वजह है ट्रूडो सिर्फ दुनिया भर में अपनी भद्द ही नहीं पिटवा रहे, बल्कि खुद उनके देश के नेताओं ने भी उनकी आलोचना शुरू कर दी है. 

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कनाडा में रहते हैं 7 लाख सिख
कनाडा की कुल आबादी करीब 38.25 मिलियन है. इनमें भारतीय मूल के 24 लाख लोग हैं. इनमें भी करीब 7 लाख आबादी सिखों की है. जो ग्रेटर टोरंटो, वैंकूवर, एडमोंटन, ब्रिटिश कोलंबिया और कैलगरी जैसी जगहों पर रहते हैं. इन 7 लाख सिखों में कई ऐसे हैं जो खालिस्तान समर्थक हैं, और ट्रूडो की नजर हमेशा इनके वोट-बैंक पर रहती है.

करीमा के परिवार को नहीं मिला इंसाफ
हालत ये है कि ट्रूडो को अपनी कुर्सी की खातिर खालिस्तानियों की मौत से तो तकलीफ होती है, लेकिन वहीं कनाडा में बलूचों के कत्ल पर वो चुप्पी साध लेते हैं. पत्रकार करीमा बलोच की मौत इस बात का सबूत है. दिसंबर 2020 में 37 साल की बलूचिस्तान की रहने वाली करीमा बलोच की लाश टोरंटो में एक नदी के किनारे मिली थी. करीमा बलूचिस्तान की आजादी के लिए लड़ाई लड़ रही थीं, जिनके परिवार ने पाकिस्तानी सेना पर उंगली उठाई. लेकिन 3 साल बाद भी करीमा और उसके घरावालों को इंसाफ नहीं मिला. 

गणित सीधा सा है, ट्रूडो को अपनी गद्दी बचानी है और इसके लिए वो खालिस्तानियों की मदद लेने से भी बाज नहीं आ रहे. ऐसे में खालिस्तानियों के भी हौसले बुलंद हैं. तभी भारत के बार-बार ऐतराज जताने के बावजूद G-20 की बैठक के दौरान कनाडा में एक अलग खालिस्तान देश के लिए वोटिंग हुई. यानी जब जस्टिन ट्रूडो भारत की मेहमानवाजी का मजे ले रहे थे, तभी भारत में मिलने वाले सम्मान को भुलाकर ट्रूडो अपने यहां भारत विरोधी गतिविधियों को हवा दे रहे थे. 

अब बात करते हैं भारत के उन मोस्ट वॉन्टेड खालिस्तानी आतंकियों की जो विदेशी जमीन पर मारे गए-

6 मई 2023
सबसे पहले खालिस्तान कमांडो फोर्स के चीफ़ परमजीत सिंह पंजवड़ की लाहौर में गुमनाम क़ातिलों ने गोली मारकर हत्या कर दी.

14 जून 2023
फिर खालिस्तानी आतंकी अवतार सिंह खांडा की रहस्यमयी हालात में ब्रिटेन में मौत हो गई. किसी ने कहा कि उसे कैंसर की बीमारी थी. किसी ने जहर दिए जाने की आशंका जताई.

18 जून 2023
इसके बाद कनाडा के एक गुरुद्वारे की पार्किंग में खालिस्तान टाइगर फोर्स के चीफ हरदीप निज्जर की गोली मार कर हत्या कर दी गई, जिसके बारे में हम आपको इस खबर के बारे में पहले ही बता चुके हैं. निज्जर को भारत सरकार ने डेजिग्नेटेड आतंकी घोषित कर रखा था. सिख फॉर जस्टिस के स्वयंभू नेता निज्जर की हत्या कनाडा के सर्रे इलाके में हुई. वो मूल रूप से जालंधर का रहनेवाला था और कनाडा में रह कर खालिस्तानी सोच को हवा दे रहा था. भारत सरकार लगातार निज्जर पर शिकंजा कस रही थी. और उसकी मौत से कुछ समय पहले ही उसके दो साथियों को फिलिपींस और मलेशिया से गिरफ्तार किया गया था.

परमजीत सिंह पंजवड़ का मर्डर
इस कड़ी में करीब दो महीने पहले, पहली मौत परमजीत सिंह पंजवड़ की हुई, जब 6 मई को उसे पाकिस्तान के लाहौर में गोलियों से उड़ा दिया गया. पंजवड़ खालिस्तान कमांडो फोर्स का सरगना था और और पाकिस्तान से लगातार आतंकी गतिविधियों को हवा देने की कोशिश करता रहता था. साल 1990 में ही वो भारत से फरार हो कर पाकिस्तान में जा छुपा था और वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई का मोहरा बन चुका था. लेकिन आईएसआई भी उसकी जान नहीं बचा सकी. वो लाहौर के जौहर टाउन इलाके में ही सनफ्लावर सोसायटी में फर्जी नाम और पहचान से रह रहा था. उसने अपना नाम मलिक सरदार सिंह रख लिया था, लेकिन वारदात वाले रोज गुमनाम कातिल मोटरसाइकिल पर उसकी सोसायटी में घुसे और घर से बाहर निकलते ही उसे निशान बना कर मौके से फरार हो गए और इसी के साथ एक-एक कर कई और आतंकियों के जिंदगी की उल्टी गिनती चालू हो गई.

पंजाब के तरनतारन का रहनेवाला परमजीत सिंह पंजवड़ वैसे तो कई आतंकी वारदातों में शामिल रहा, लेकिन उसने विदेश में रहते हुए 30 जून 1999 को चंडीगढ़ के पासपोर्ट ऑफिस के पास बम धमाका करवाया था, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी. पंजवड़ पहले एक बैंक मुलाजिम था, लेकिन बाद में वो आतंक के रास्ते पर चल निकला और उसने खालिस्तान कमांडो फोर्स नाम के एक संगठन की बुनियाद रखी. आगे चल कर वो आईएसआई के हाथों की कठपुतली बन गया और भारत में ड्रोन के जरिए नशा और हथियारों की तस्करी करवाने लगा. लेकिन अब उसका चैप्टर क्लोज हो चुका है.

अवतार सिंह खांडा की मौत
परमजीत सिंह पंजवड़ के बाद ब्रिटेन में रह रहे खालिस्तानी आतंकी अवतार सिंह खांडा का नंबर आया. 14 जून को खांडा की ब्रिटेन में मौत हो गई. उसकी मौत के बाद ये खबर उड़ी थी कि खांडा को किसी ने जहर दे दिया. लेकिन बाद में ब्रिटेन के मेडिकल रिकॉर्ड के मुताबिक उसकी मौत की वजह ब्लड कैंसर बताई गई. और ये भी बताया गया कि वो बर्मिंघम के एक अस्पताल में भर्ती था. अवतार सिंह खांडा के बारे में कहा जाता है कि अमृतपाल को हिंदुस्तान में खालिस्तान के नए पोस्टर ब्वॉय के तौर पर प्लांट करवाने वाला कोई और नहीं बल्कि यही अवतार सिंह खांडा था. उसी ने अमृतपाल को वारिस पंजाब दे नाम के संगठन पर कब्जा कर यहां अपने पांव पसारने का आइडिया दिया था. खांडा को ब्रिटिश पुलिस इंडियन एबेंसी से भारत का झंडा हटाने के जुर्म में गिरफ्तार कर चुकी थी. खांडा वहां सिख नौजवानों का बेन वॉश करे के साथ-साथ उन्हें आईईडी बनाने की टेनिंग भी दिया करता था. खांडा का पिता कुलवंत सिंह भी खालिस्तान लिबरेशन फोर्स का आतंकी था. खांडा 2007 में पढ़ाई के बहाने से बिटेन गया और वहीं छुप कर आतंकी हरकतों को अंजाम देता रहा.

कब आएगा गुरपतवंत सिंह पन्नू का नंबर
अब बात गुरपतवंत सिंह पन्नू की. एक के बाद कई खालिस्तानी आतंकियों की मौत के बाद पन्नू को अपनी जान का डर सताने लगा था. भारत सरकार ने उसके खिलाफ साल 2020 में यूएपीए यानी अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट के तहत केस दर्ज कर उसे आतंकवादी करार दिया था. अमृतसर के खानकोट के रहनेवाले पन्नू ने पंजाब यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई की. इसके बाद वो विदेश चला गया और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ मिलकर खालिस्तान के नाम पर लोगों को भड़काने की कोशिश करने लगा. वो अक्सर सोशल मीडिया पर भारत विरोधी बातें करता रहता है. उसने अमेरिका में रहते हुए सिख फॉर जस्टिस नाम के एक पॉकेट संगठन की शुरुआत की, जिस पर भारत सरकार ने 2019 में प्रतिबंध लगा दिया था. पन्नू अक्सर भोले-भाले नौजवानों को पैसों का लालच देकर भड़काता है और भारत में और भारत के खिलाफ दंगे भड़काने और दहशत फैलाने की कोशिश करता है.

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