यूपी एटीएस ने धर्मांतरण रैकेट का भंडाफोड़ किया है. इस मामले में मोहम्मद उमर गौतम और मुफ्ती काजी जहांगीर कासमी नाम के दो मौलानाओं को गिरफ्तार किया गया है. दोनों ही दिल्ली के जामिया नगर इलाके के रहने वाले हैं. गिरफ्तारी के बाद एटीएस ने दिल्ली में बने मोहम्मद उमर के दफ्तर पर छापा मारकर उसे सील कर दिया है. ये वही दफ्तर है, जहां से धर्मांतरण का पूरा खेल खेला जाता था.
दरअसल, उमर और उसके साथियों ने धर्म परिवर्तन कराने का काम करने के लिए इस्लामिक दावा सेंटर (IOC) नाम से एक ऑफिस खोल रखा था, जिसका पता दिल्ली के जामिया नगर में दर्ज है. इसके जरिए ही गैर-मुस्लिमों को मुस्लिम में परिवर्तित करने का काम किया जाता था.
इसी ऑफिस पर यूपी एटीएस ने सोमवार को छापा मारा. मोहम्मद उमर ने घर पर ही ऑफिस बना रखा था. उसका घर चार मंजिला है. यही इस्लामिक दावा सेंटर का हेडक्वार्टर भी है. एटीएस ने इस ऑफिस को सील कर दिया है.
पहले हिंदू था धर्मांतरण में गिरफ्तार मौलाना उमर गौतम, खुद सुनाता था अपने मुस्लिम बनने की 'ये' कहानी
पुलिस में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, इस मामले में आरोपी पहले तो लोगों का धर्मांतरण कराते थे, उनकी शादी करते थे और उसके बाद उन्हें धर्मांतरण और शादी के दस्तावेज तैयार कर धर्म परिवर्तन को अवैध रूप से कानूनी मान्यता भी दिलाते थे. इस काम में उमर का साथ मुफ्ती काजी देता था. ये सारा इसी ऑफिस की आड़ में होता था.
जांच में पता चला कि मोहम्मद उमर गौतम पहले हिंदू था, जिसने बाद में इस्लाम कबूल कर लिया. उसके पिता का नाम धनराज सिंह गौतम है. पुलिस को शक है कि उमर के देश में बहुत सहयोगी हैं जो इस पूरे रैकेट को चला रहे हैं.