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तंदूर कांड: दोषी सुशील शर्मा की रिहाई नवंबर तक लटकी

नैना साहनी तंदूर कांड में तिहाड़ मे उम्रकैद की सजा काट रहे सुशील कुमार शर्मा को तिहाड़ जेल से समय से पहले रिहाई के मामले मे सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने हाई कोर्ट में अपना पक्ष साफ करते हुए कहा है कि सरकार ने सजा समीक्षा बोर्ड की रिपोर्ट के बाद ही सुशील कुमार शर्मा की रिहाई की अर्जी रद्द की थी.

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नैना साहनी तंदूर कांड
नैना साहनी तंदूर कांड

नैना साहनी तंदूर कांड में तिहाड़ मे उम्रकैद की सजा काट रहे सुशील कुमार शर्मा को तिहाड़ जेल से समय से पहले रिहाई के मामले मे सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने हाई कोर्ट में अपना पक्ष साफ करते हुए कहा है कि सरकार ने सजा समीक्षा बोर्ड की रिपोर्ट के बाद ही सुशील कुमार शर्मा की रिहाई की अर्जी रद्द की थी. दिल्ली सरकार के वकील ने बताया कि इस मुद्दे पर वही कदम उठा रहें हैं जो जरुरी है. उन्होंने हाल ही में एसआरबी की हुई ताजा बैठक की रिपोर्ट उपराज्यपाल के पास भी भेजी है. इसकी रिपोर्ट 15 अक्टूबर तक आने की उम्मीद है.

दूसरी तरफ सुशील शर्मा के वकील ने सरकार के पक्ष को सुनने के बाद तर्क रखा कि सरकार कोर्ट को गुमराह कर रहीं है. ये सुनवाई को और लंबा खीचने का सरकार का तरीका है. सरकार और सुशील शर्मा की दलीले सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि यदि एसआरबी का फैसला शर्मा के हक में नहीं आता तो भी वह उनका पक्ष सुनेंगे और आगे इस मुद्दे पर सुनवाई जारी रहेगी. हाई कोर्ट मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर को होगी. इससे पहले दिल्ली सरकार ने बताया था कि एसआरबी का फैसला एलजी के ही अधीन है.

सुशील कुमार शर्मा के वकील का तर्क था कि मुवक्किल 20 वर्ष की सजा काट चुका है. एसआरबी के दिशा निर्देशों के मुताबिक उसे जेल से रिहा किया जाना चाहिए. सुशील ने 3 जुलाई 1995 की रात अपनी पत्नी नैना साहनी की हत्या करने के बाद उसके डेड बॉडी को अपने एक दोस्त के रेस्टोरेंट के तंदूर में जला दिया था. निचली कोर्ट ने इस मामले में सुशील को फांसी की सजा सुनाई थी. इसे हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा था. 8 अक्टूबर 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था.

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