पिछले 2 करोड़ 31 लाख 55 हज़ार सेकेंड में जिस कोरोना वायरस ने दुनिया के 2 करोड़ 2 लाख 83 हजार लोगों को अपना शिकार बनाया अब उस कोरोना की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है. कोरोना के पहले मामले के पूरे 268 दिन बाद जो खबर हम आपको अब सुनाने जा रहे हैं. वो बहुत राहत देने वाली खबर है बल्कि इसे खुशखबरी कहिए क्योंकि पिछले 8 महीने से जिस वायरस ने जिंदगी को कशमकश में डाल रखा था. उस वायरस का काउंट डाउन शुरू हो गया क्योंकि रूस ने कोरोना को बेअसर करने वाली वैक्सीन बना ली है.
करीब 8 महीने लंबे इंतजार के बाद रूस ने दुनिया की पहली कोरोना वायरस वैक्सीन तैयार हो जाने का ऐलान कर दिया है. रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इस कोरोना वायरस वैक्सीन के बनाए जाने की पुष्टि की है. और खुद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खुद इसकी खुशखबरी पूरी दुनिया को दी है. और इस वैक्सीन का पहला टीका किसी और को नहीं बल्कि खुद राष्ट्रपति पुतिन ने अपनी बेटियों को लगावाकर एक नज़ीर पेश कर दी है और इस वैक्सीन को लेकर दुनिया के शक़ को चुनौती दे दी है.
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने कहा "आज की ये सुबह दुनिया में पहली बार नए कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीन रजिस्टर्ड किए जाने के लिए याद की जाएगी. मैं अपने उन सभी साथियों को धन्यवाद दूंगा जिन्होंने इस वैक्सीन पर काम किया है. वैक्सीन जरूरी टेस्ट से गुज़री है और मेरी दोनों बेटियों को भी इसका टीका लगाया गया है और वो ठीक महसूस कर रही हैं."
पुतिन की बेटी को जब इसका टीका लगाया गया तो उसका बुखार 38 डिग्री था. मगर टीके के बाद ये थोड़ा बढ़ा लेकिन बाद में काबू में आने लगा और इसके बाद उनमें कोरोना का कोई लक्षण नज़र नहीं आया. इसी के साथ रूसी राष्ट्ररपति व्लादिमीर पुतिन ने ऐलान किया कि रूस में जल्द ही इस वैक्सीन का प्रोडक्शन शुरू किया जाएगा और बड़ी तादाद में वैक्सीन की डोज़ तैयार कर के पूरी दुनिया को उपलब्ध कराई जाएगी. फिलहाल इस वैक्सीन की लिमिटेड डोज तैयार की गई हैं. रेगुलेटरी अप्रूवल मिल जाने पर इस वैक्सीन का इंडस्ट्रियल प्रॉडक्शन सितंबर से शुरू हो सकता है. रूस ने कहा है कि वो अक्टूबर से देशभर में टीका लगाने की शुरुआत कर सकता है.
रूस ने दुनियाभर में वैक्सीन सप्लाई करने की बात तो कही है. मगर कई देश अभी इसे लेकर हिचक रहे हैं. पश्चिमी देशों समेत वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने चिंता जताई है कि बिना पर्याप्त डेटा के वैक्सीन सप्लाई करना ठीक नहीं होगा. यूनाइटेड किंगडम ने साफ कहा है कि वो अपने नागरिकों को रूसी वैक्सीन की डोज नहीं देगा. ऐसे में हो सकता है कि शुरुआती दौर में वैक्सीन दूसरे देशों को न भेजी जाए और रूस की आम जनता पर वैक्सीन का असर देखने के बाद बाकी देश इस पर कोई फैसला कर सकते हैं. रूसी एजेंसी TASS के मुताबिक रूस में ये वैक्सीन अभी 'फ्री ऑफ कॉस्ट' मुहैय्या होगी. इस पर आने वाली लागत को देश के बजट से पूरा किया जाएगा. बाकी देशों के लिए भी कीमत का खुलासा अभी नहीं किया गया है.
इस वैक्सीन को रूस के रक्षा मंत्रालय और गमलेया नैशनल सेंटर फॉर रिसर्च ने तैयार किया है. अब अगर रूस की तरफ से किया गया ये ऐलान सही साबित होता है और WHO की तरफ से इस वैक्सीन को मंजूरी मिलती है. तो दुनियाभर के लिए ये एक बड़ी राहत साबित हो सकती है.
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मॉस्को के गामलेया रिसर्च इंस्टिट्यूट ने एडेनोवायरस को बेस बनाकर ये वैक्सीन तैयार की है. दावा किया जा रहा है कि इस तरह के वायरस से लड़ने वाली ये वैक्सीन उसके 20 साल की रिसर्च का नतीजा है. वैक्सीन में जो पार्टिकल्स यूज़ किए गए हैं. वे खुद को रेप्लिकेट यानी कॉपी नहीं कर सकते. रिसर्च और मैनुफैक्चरिंग में शामिल कई लोगों ने भी खुद को इस वैक्सीन की डोज़ दी है. हालांकि कुछ लोगों को वैक्सीन की डोज दिए जाने पर बुखार आ सकता है, जिसके लिए पैरासिटामॉल के इस्तेमाल की सलाह दी जा रही है.
बताया जा रहा है कि रूस की सेशेनॉव यूनिवर्सिटी में पिछले 20 सालों से कोरोना वायरस की इस फैमिली के संक्रमण पर रिचर्च की जा रही थी. लिहाज़ा जब कोविड-19 के वायरस ने दस्तक दी. तब इस रिसर्च की दिशा को इस वायरस के वैक्सीन बनाने की तरफ मोड़ दी गई. वैक्सीन को रूस के रक्षा मंत्रालय और गमलेया नैशनल सेंटर फॉर रिसर्च की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद तैयार किया है.
अगर रूस में कोरोना वायरस के हालात की बात करें. तो यहां करीब नौ लाख कोरोना वायरस के मामले सामने आ चुके हैं. रूस में 15 हज़ार के करीब लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. इतना ही नहीं रूस उन देशों में शामिल है जहां पर सबसे ज़्यादा कोरोना वायरस के टेस्ट किए गए हैं. रूस में प्रधानमंत्री के अलावा कैबिनेट के कुछ दूसरे सदस्य भी इस वायरस की चपेट में आए थे.
रूस ने वैक्सीन लॉन्च करने में जो 'जल्दबाजी' दिखाई है. वो दुनियाभर के गले नहीं उतर रही. रूस इसी हफ्ते से ये वैक्सीन नागरिकों को दी जाने लगेगी मगर वहीं पर इसका विरोध होने लगा है. मल्टीनेशनल फार्मा कंपनीज की एक लोकल एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि क्लिनिकल ट्रायल पूरा किए बिना वैक्सीन के सिविल यूज की इजाज़त देना खतरनाक कदम साबित हो सकता है. बताया जा रहा है कि अभी तक 100 से भी कम लोगों को डोज दी गई है. ऐसे में बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है.