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जितेंद्र गोगी हत्याकांडः आरोपियों को दी गई थी 1 माह की ट्रेनिंग, चार्जशीट में खुलासा

चार्जशीट के मुताबिक जिन दो शूटरों ने जितेंद्र गोगी पर गोलियां चलाई थी, उन्हें गैंगस्टर टिल्लू ने 1 महीने तक वकील बनने की ट्रेनिंग दिलवाई थी. उन्हें बताया गया था कि किस तरीके से वकील कोर्ट में अंदर जाते हैं.

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इस हमले में जितेंद्र गोगी के साथ-साथ दोनों शूटर भी मारे गए थे
इस हमले में जितेंद्र गोगी के साथ-साथ दोनों शूटर भी मारे गए थे
स्टोरी हाइलाइट्स
  • वारदात में हुआ कुल 9 मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल
  • 9 में से 8 नंबर लोकल जबकि एक नंबर था विदेशी
  • जाली दस्तावेजों से लिए गए थे लोकल नंबर
  • वारदात के बाद सभी ने तोड़ दिए थे अपने सिमकार्ड

दिल्ली की रोहिणी कोर्ट में गैंगस्टर जितेंद्र गोगी की हत्या के मामले में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है. जिसके अनुसार जितेंद्र गोगी के कत्ल की तैयारी कई महीनों से चल रही थी. इसके लिए दो हमलावरों को बकायदा 1 महीने तक वकील बनने की ट्रेनिंग दी गई थी. इसी के बाद उन दोनों ने रोहिणी कोर्ट में सनसनीखेज तरीके से वारदात को अंजाम दिया था.

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दिल्ली पुलिस ने कुल 111 पेज की चार्जशीट में कई अहम और चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. चार्जशीट के मुताबिक जिन दो शूटरों ने जितेंद्र गोगी पर गोलियां चलाई थी, उन्हें गैंगस्टर टिल्लू ने 1 महीने तक वकील बनने की ट्रेनिंग दिलवाई थी. उन्हें बताया गया था कि किस तरीके से वकील कोर्ट में अंदर जाते हैं. कोर्ट के अंदर जाकर कहां बैठते हैं या फिर खड़े रहते हैं. किस तरीके से वो फ़ाइल रखते हैं.

उन दोनों को ट्रेनिंग देने का काम एक अन्य आरोपी उमंग के घर पर किया गया था. उमंग खुद एलएलबी है और पेशे से वकील है. उमंग ने वकीलों के तौर तरीके आरोपियों को 1 महीने के अंदर काफी हद तक सिखा दिए थे. ताकि दोनों आरोपी वकीलों के बीच अलग न दिखें. 111 पेज की चार्जशीट में मंडोली जेल में बंद गैंगस्टर टिल्लू ने कैसे कत्ल की साजिश रची? उसे पूरा करने में किन लोगों की मदद ली गई और कैसे इसे अंजाम दिया गया. ये सब कुछ चार्जशीट में लिखा गया है. 

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दरअसल, इसी साल 24 सितंबर की दोपहर रोहिणी की कोर्ट नंबर 207 में वकील की ड्रेस में आए दो शूटरों ने मौका देखकर कोर्ट रूम के अंदर ही पेशी पर आए गैंगस्टर जितेंद्र गोगी की गोली मारकर हत्या कर दी. इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने जवाबी कार्रवाई में दोनों शूटरों को एनकाउंटर में मार गिराया था.

जब जांच की शुरुआत हुई तो शक की सुई मंडोली जेल में बंद गैंगस्टर टिल्लू और उसके साथी उमंग की तरफ गई. इसके बाद पुलिस ने दिल्ली के हैदरपुर इलाके से उमंग और जेल में बंद टिल्लू को गिरफ्तार किया. उमंग ने पूछताछ में पुलिस को बताया था कि वह एलएलबी कर चुका है. 

पूछताछ में उमंग ने बताया कि रोहिणी कोर्ट में ही उसकी मुलाकात उमेश काला नाम के बदमाश से करीब डेढ़ साल पहले हुई थी. इसके बाद उमेश व्हाट्सएप कॉल के जरिए उमंग से जेल के अंदर से ही बातें किया करता था. उमेश ही वो शख्स था, जिसने सबसे पहली बार उमंग की बात टिल्लू ताजपुरिया से करवाई थी. इसके बाद उमंग और टिल्लू अक्सर बात करने लगे. जब टिल्लू ने पूरी साजिश रच ली, तब उसने 23 अगस्त को जगदीप और राहुल नाम के दो शूटरों को उमंग के पास भेजा था. 

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टिल्लू ने उनसे कहा था कि जगदीप और राहुल को वकील जैसी ट्रेनिंग देनी है, ताकि ये दोनों कोर्ट के अंदर गोगी पर हमला कर सकें. इससे जुड़े कुछ सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी पुलिस को मिली है. जिनसे ये साबित होता है कि जगदीप और राहुल उमंग के पास गए थे.

साजिश की शुरुआत में सबसे पहले जितेंद्र गोगी की सुरक्षा की जानकारी इकट्ठा करनी थी. मसलन जब वो जेल में रहता है, तब उसके आसपास कितनी सुरक्षा रहती है. कौन लोग मौजूद होते हैं. कोर्ट में पेशी के दौरान उसके आसपास कितनी सुरक्षा होती है. 13 सितंबर को जब पुलिस ने जितेंद्र गोगी को पानीपत की कोर्ट में एक हत्या के मामले में पेश किया था, तब वहां पर शूटर और उमंग, गोगी की सुरक्षा देखने के लिए पहुंचे हुए थे. सुरक्षा का जायजा लेने के बाद दोनों ने टिल्लू को बताया था कि जितेंद्र गोगी के आसपास पुलिस की कड़ी सुरक्षा रहती है.

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इसके बावजूद रोहिणी कोर्ट में पेशी के दौरान हत्या की साजिश रची गई. 23 सितंबर को राकेश ताजपुरिया नाम के बदमाश से मुरथल में हथियार लिए गए. 23 सितंबर को ही उमंग और जगदीप ने एम्स हॉस्पिटल के पास रिंग रोड से किसी शख्स से वकीलों की ड्रेस ली. जिस दौरान यह पूरी साजिश रची गई उस दौरान मंडोली जेल में गैंगस्टर टिल्लू के साथ गैंगस्टर नीरज बवाना का करीबी नवीन बाली भी बंद था. नवीन ही वह शख्स था, जिसने टिल्लू को बताया था कि किस दिन कोर्ट में जितेंद्र गोगी की तारीख है.

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हथियारों की व्यवस्था करने में भी नवीन बाली का हाथ था. सूत्रों की मानें तो नवीन ने गोगी की हत्या के लिए एक नेपाली मूल के शूटर को भी बुलाया था. उमंग ने 24 सितंबर को टिल्लू को फोन पर बताया कि नेपाली मूल का शूटर वकील की की ड्रेस में पकड़ा जा सकता है क्योंकि वह बिल्कुल भी वकील नहीं नजर आ रहा.

इसके बाद उमंग ने अपने दोस्त की कार ली फिर उसने उस में तीनों शूटरों को बिठाया और रोहिणी कोर्ट पहुंचा. तीनों शूटरों को उमंग ने बाहर ही कार से उतार दिया, जिसके बाद तीनों पैदल ही कोर्ट के अंदर चले गए. जबकि उमंग सीधे कार के अंदर गया और अंडर ग्राउंड पार्किंग में पहुंच गया. इसके बाद वह हथियार लेकर सीधे ऊपर आया और वहां उसने एक बाथरूम में दोनो शूटरों को हथियार दिए और फिर नेपाली शूटर के साथ कार लेकर कोर्ट से निकल गया.

दोपहर करीब 1:30 बजे के आसपास जैसे ही उमंग को पता लगा कि कोर्ट रूम के अंदर ही जितेंद्र गोगी की हत्या कर दी गई है और दोनों शूटर भी मारे गए हैं. वह घबरा गया. उमंग ने सबसे पहले अपना सिम तोड़ा और फेंक दिया. फिर सीसीटीवी के डीवीआर को उसने निकाला और अपने घर की रसोई घर में जो चिमनी बनी है, उसमें उसे छुपा दिया था. इस मामले में दिल्ली पुलिस की जांच अभी भी जारी है.

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