राजधानी दिल्ली में लाख कोशिशों के बावजूद जिस्मफरोशी का अवैध धंधा जारी है. जिसमें ना जाने कितनी मासूम लड़कियों को जबरन धकेल दिया जाता है. पुलिस ने एक ऐसे ही रैकेट का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने बेची गई एक युवती को मुक्त कराने के साथ ही इस रैकेट की सरगना माया को गिरफ्तार कर लिया है, जिसे बदनाम गलियों में मॉम के नाम से जाना जाता है.
दिल्ली के कमला मार्केट थाने की पुलिस ने नेटवर्किंग बिज़नेस करने वाली एक लड़की को मुक्त कराया है. जिसे जबरन जिस्म के कारोबार में धकेल दिया गया था. IBA मैनेजमेंट ग्रुप ऑफ इंड्रस्ट्रीज में नेटवर्किंग बिजनेस करने वाली युवती से वहां जिस्मफरोशी कराई जा रही थी.
कमला मार्केट थाना पुलिस ने एक सूचना के आधार पर दिल्ली महिला आयोग की टीम के साथ मिलकर जीबी रोड पर संयुक्त छापामारी की. इस दौरान पश्चिम बंगाल की रहने वाली युवती को कोठा नंबर 68 से मुक्त करवाया गया. पुलिस के मुताबिक मुक्त कराई गई युवती सियालदाह की रहने वाली है.
वह नेटवर्किंग बिज़नेस में है. सियालदाह में ही एक दिन सफर के दौरान उसकी मुलाकात ज्योत्स्ना नाम की महिला से हुई थी. ज्योत्स्ना ने उसे बिजनेस प्रमोट करने की सलाह दी. युवती उसकी बातों में आ गई. वो उसे रमजान नामक एक शख्स के पास ले गई. रमजान ने उसे दिल्ली के बड़े लोगों से मिलवाने का झांसा दिया. उसकी बात मानकर युवती 8 जून को रमजान के साथ दिल्ली आ गई.
रमजान ने उसे दिल्ली लाकर 2 दिन तक एक रूम में रखा और फिर कोठा नंबर 68 पर एक महिला के हवाले कर वहां से चला गया. युवती को तब अहसास हुआ कि उसे बेच दिया गया है और वह दिल्ली के रेड लाइट एरिया जीबी रोड के एक कोठे पर है. इसके बाद उसको जबरन सेक्स वर्कर बनने के लिए मजबूर किया गया. युवती को जबरन ग्राहकों के पास भेजा जाता था.
एक दिन एक बंगाली भाषी ग्राहक लड़की के पास आया. लड़की ने उस शख्स को सारी आपबीती सुनाई और उसे सियालदाह में रहने वाले अपने भाई का नंबर दे दिया. उस बंगाली शख्स ने ही पीड़िता के भाई को फोन पर सारी बात बताई. बहन की जानकारी मिलते ही पीड़िता का भाई दिल्ली आ गया.
उसने इस बात की जानकारी दिल्ली पुलिस और दिल्ली महिला आयोग को दी इसके बाद कमला मार्किट थाना इंचार्ज सुनील ढाका के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने कोठा नंबर 68 पर छापा मार कर युवती को मुक्त करवा लिया. छापे के दौरान मॉम के नाम से मशहूर कोठे की संचालिका माया को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.