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श्रद्धा वॉल्कर मर्डर केस में दिल्ली पुलिस चार दिनों तक सबूतों और सुराग की तलाश में पहले महरौली के जंगल की खाक छानती रही और अब ये जांच महरौली से गुरुग्राम के जंगल तक जा पहुंची है. दिल्ली पुलिस दो बार आफताब को महरौली के जंगल में लेकर आई थी. उसकी निशानदेही पर पुलिस ने छानबीन की और 13 हड्डियां बरामद की. लेकिन इस मामले से जुड़े ऐसे कई सुराग और सबूत हैं, जिनकी तलाश पुलिस दिल्ली समेत देश के पांच राज्यों में कर रही है.
7 सबूतों की दरकार
दरअसल, इस सनसनीखेज कत्ल की वारदात में पुलिस उलझ सी गई है. पुलिस के पास कातिल है, और कातिल का इकाबालिया बयान भी. मगर इसके बावजूद कई सवालों के जवाब या यूं कहिए कि सबूतों की तलाश अभी बाकी है. जिनमें कुछ ऐसी अहम बाते हैं, जिन पर गौर करना ज़रूरी है. मसलन-
- टुकडों में बंटी लाश के कितने टुकड़े?
- लाश के टुकड़े करनेवाली आरी?
- कत्ल के वक्त श्रद्धा के पहने कपड़े?
- घर में मौजूद लाश के टुकड़ों या खून के निशान?
- बाथरूम में नाली में इकट्ठा कोई सबूत
- श्रद्धा का मोबाइल फोन
- 18 मई से 5 जून तक रात 2 बजे से सुबह 6 बजे तक आफताब के मोबाइल की लोकेशन
जंगल में चार दिन, चौदह घंटे
बस, दिल्ली पुलिस की सबसे बड़ी तलाश यही है. अगर ये मिल गए, तो समझिए केस आईने की तरह साफ हो जाएगा. और अगर नहीं मिले तो बहुत मुश्किल होगी. चार दिन और कुल 14 घंटे दिल्ली पुलिस महरौली के जंगलों को छान चुकी है. हालांकि ये जंगल 35 किलोमीटर के दायरे में फैला है. लेकिन जंगल के ज्यादा अंदर जाने की पुलिस को जरूरत नहीं पड़ी. क्योंकि आफताब जो जगह बता रहा था, वो जंगल की शुरुआत में ही थी. पुलिस ने जंगल में कुछ झाड़ियां काटी, कुछ झाड़ियों में डंडे घुमाए. जंगल को कदमों से नापा और 13 हड्डियां उसके हाथ लगीं.
फोरेंसिक रिपोर्ट का इतंजार
हालांकि इसी जंगल में सैकड़ों हड्डियां बिखरी पड़ी हैं. आजतक की टीम को भी जंगल में ऐसी कई हड्डियां नजर आईं, लेकिन पहली नजर में देख कर ऐसा लगता है कि ये हड्डियां किसी जानवर की हैं. अब पुलिस के हाथ जो 13 हड्डियां लगी हैं, वो जानवर की हैं या फिर श्रद्धा की लाश के टुकड़े. इसके लिए अब पुलिस सांसें रोके फोरेंसिक रिपोर्ट का इतंजार कर रही है.
केवल किचन में मिले खून के निशान
जंगल से दूर एक तलाश घर के अंदर भी है कि शायद श्रद्धा के कत्ल से जुड़ा कोई भी सबूत घर के किसी कोने से मिल जाए. इसके लिए फोरेंसिक टीम ने भी उस घर के कई चक्कर काटे हैं. जिस बाथरूम में श्रद्धा की लाश के टुकड़े किए गए, वहां तो कुछ नहीं मिला. लेकिन किचन में एक जगह खून के कुछ धब्बे जरूर मिले. जिन फोरेंसिक एक्सपर्ट ने उस घर की फोरेंसिक जांच की, नमूने उठाने की कोशिश की, उन्होंने आजतक से बातचीत में इसका खुलासा किया.
सबूत जुटाना मुश्किल काम
श्रद्धा मर्डर केस का इकलौता मुल्ज़िम आफताब दिल्ली पुलिस के शिकंजे में है. पुलिस रोज़ाना उससे पूछताछ कर रही है. मामले की जांच आगे बढ़ा रही है. लेकिन आफताब के तमाम कबूलनामे और निशानदेही के बावजूद पुलिस के लिए इस केस से जुड़े सबूत जुटाना एक मुश्किल काम साबित होता जा रहा है. पुलिस को अब तक ना तो श्रद्धा का मोबाइल फोन मिला है, ना ही उसके कपड़े हाथ लगे हैं और ना ही कत्ल के बाद लाश के टुकड़े करने में इस्तेमाल की गई आरी. जबकि कत्ल का ये केस वारदात के तकरीबन छह महीने बाद सामने आया. जिसके चलते यह मामला फिलहाल पूरी तरह सरकमस्टैंशियल एविडेंस यानी परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर ही टिका है.
बेंजिन टेस्ट में मिले खून के धब्बे
मामले की छानबीन में जुटी दिल्ली पुलिस बुधवार को लगातार दूसरे दिन आफताब को लेकर फोरेंसिक टीम के साथ उसके छतरपुरवाले मकान में पहुंची, जहां वो किराये पर रहा करता था. पुलिस को शुरुआती छानबीन में तो मकान से खून का कोई भी धब्बा नहीं मिला, लेकिन जब पुलिस ने नए सिरे से किचन की जांच की, तो वहां गैस सिलिंडर रखी जानेवाली जगह पर पुलिस को कुछ खून के निशान नज़र आए. असल में फॉरेंसिक एक्सपर्टस खुली आंखों से नजर ना आनेवाले ऐसे खून के धब्बों की तलाश के लिए एक खास किस्म का बेंजिन टेस्ट करते हैं, जिसमें वो धब्बे भी दिखाई पड़ जाते हैं, जो आम तौर पर छुपे होते हैं. और आफताब के किचन में भी जो खून के धब्बे नज़र आए हैं, वो कुछ ऐसे ही हैं.
आफताब ने दी जानकारी
पुलिस सूत्रों की मानें तो आफताब ने घर की तलाशी के दौरान किचन में गैस सिलिंडर रखनेवाली जगह पर भी एक बार श्रद्धा की लाश के कुछ टुकड़े रखने की जानकारी दी है. जिसके बाद पुलिस की मौजूदगी में जब फोरेंसिक एक्सपर्ट्स ने उस जगह की तलाशी ली, तो वहां वाकई खून के निशान मौजूद नजर आए.
सल्फर हाइड्रोक्लोरिक एसिड का इस्तेमाल
इसके अलावा अब तक की छानबीन में पुलिस को ना तो घर के किसी दूसरे हिस्से में और ना ही फ्रिज में खून का कोई धब्बा या ऐसी ही कोई दूसरी चीज नजर आई। क्योंकि इन पांच से छह महीनों में आफताब बार-बार पूरे मकान की और खास कर उन जगहों की सफाई करता रहा, जहां पर उसने श्रद्धा की हत्या की या फिर लाश के टुकड़े किए. इसके लिए आफताब ने पानी के साथ-साथ सल्फर हाइड्रोक्लोरिक एसिड का भी इस्तेमाल किया.
नाले से मिले हड्डियों के टुकड़े
इसी बीच पुलिस ने आफताब की निशानदेही पर छतरपुर की कुछ नालियों की भी तलाशी ली और वहां से हड्डियों के टुकड़े बरामद किए. यकीन मानिए आफताब की निशानदेही पर नाले से बरामद हड्डियों के ये टुकडे भी अगर श्रद्धा की हड्डियों के टुकडे निकल आए, तो इस केस के लिए बेहद पुख्ता सबूत साबित होंगे.
साज़िश में वैक्यूम क्लीनर
अब आफताब की साज़िशों में एक वैक्यूम क्लीनर वाला पहलू भी और जुड गया है. पुलिस की पूछताछ में आफताब ने बताया है कि उसने श्रद्धा की जान लेने और उसकी लाश निपटाने के बाद सबूत मिटाने के इरादे से ही खास तौर पर एक वैक्यूम क्लीनर ऑन लाइन खरीदा था, ताकि पानी और एसिड की साफ-सफाई के बाद अगर खून या लाश के कुछ निशान बाकी रह जाएं, तो उन्हें वैक्यूम क्लीनर से खींच कर पूरी तरह साफ कर दिया जा सके. शायद यही वजह रही कि पुलिस ने उस बेड और उन चादरों की भी गहराई से पड़ताल की जिसमें उसने श्रद्धा की जान ली थी. लेकिन बेड और चादर से भी पुलिस को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला. सबकुछ बिल्कुल साफ-सुथरा और धुला-पुंछा हुआ था.
कूड़ा गाड़ियों की पहचान
जबकि आफताब ने पूछताछ में खुद अपनी जुबान से ये कबूल किया था कि श्रद्धा को बिस्तर पर पटकने के बाद उसने उसके सीने पर बैठ कर उसका गला घोंट दिया था. धीरे-धीरे ही सही पुलिस इस मामले में आगे बढ रही है. अब नई जानकारी ये सामने आई है कि पुलिस ने आफताब के घर के आस-पास से कूड़ा इकट्ठा करनेवाली दो गाडियों की पहचान कर ली है. असल में पुलिस की पूछताछ में आफताब ने बताया है कि उसने श्रद्धा की जान लेने के बाद उसकी लाश के टुकड़े करने से पहले उसके कपड़े उतार दिए थे और ये कपड़े उसने अगले दिन कूड़ा उठानेवाली गाड़ी में डाल दिए थे.
कूड़े में श्रद्धा के कपड़ों की तलाश
जाहिर है आफताब का इरादा हर सबूत मिटा देने का था, लेकिन अब आफताब के इस खुलासे के बाद पुलिस ने ना सिर्फ उस इलाके में कूडा उठानेवाले दोनों गाडियों की पहचान कर ली है, बल्कि ये गाडियां कूड़ा इकट्ठा करने के बाद जिस डंप यार्ड में कूड़ा डालती हैं, उसकी भी पहचान कर ली गई है. अब पुलिस की कोशिश उस कूड़े में श्रद्धा के कपड़े तलाश करने की होगी, ताकि सबूतों की कड़ी भी मुकम्मल की जा सके. हालांकि कूड़े में श्रद्धा के कपड़ों का कितना हिस्सा बचा होगा और उससे कैसे फोरेंसिक सबूत इकट्ठा किए जा सकेंगे, ये अपने-आप में एक बड़ा सवाल है.
हड्डियों को लेकर सवाल
अब महरौली के जंगल की बात, जहां आफताब ने कथित तौर पर लगातार कई-कई दिनों तक चक्कर लगा-लगा कर श्रद्धा की लाश के टुकड़े फेंके थे. पुलिस को यहां से अलग-अलग किस्म की हड्डियों के कई टुकड़े हाथ लगे हैं. लेकिन फिलहाल इन हड्डियों को श्रद्धा की हड्डियां साबित करना एक बड़ी चुनौती है. चूंकि वक्त पहले ही काफी गुजर चुका है. वहां मौजूद हड्डियों को लेकर सवाल बना हुआ है. सबसे पहले तो पुलिस को ये साबित करना है कि वो हड्डियां इंसान की हैं और फिर दूसरी अगर इंसान की हैं, तो वाकई श्रद्धा की हैं. हालांकि इसके लिए पुलिस ने श्रद्धा के पिता और भाई के डीएनए सैंपल कलेक्ट कर लिए हैं, ताकि हड्डियों के इंसानी हड्डी निकलने पर उनसे श्रद्धा के पिता और भाई के डीएनए के सैंपल मैच करवाए जा सकें.
पांच दिन बढ़ी आफताब की पुलिस रिमांड
फिलहाल, आफताब की पांच दिन की पुलिस रिमांड पूरी हो चुकी थी. दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को एक बार फिर उसे अदालत में पेश कर उसका रिमांड मांगा और अदालत ने उसे फिर से पांच दिनों के लिए दिल्ली पुलिस को रिमांड में सौंप दिया है. समझा जाता है कि पांच दिनों में पुलिस बाकी सबूतों के साथ-साथ आफताब की निशानदेही पर श्रद्धा का मोबाइल फोन भी बरामद करने की कोशिश करेगी, जो उसने श्रद्धा के कत्ल के बाद कथित तौर पर मुंबई में कहीं ठिकाने लगाया है.
(साथ में गोपाल शुक्ल)