दिल्ली का एक प्रेमी जोड़ा दिवाली की छुट्टियों में घूमने के लिए हिमालय की वादियों में पहुंचता है. पहले देहरादून, फिर चकराता और फिर उत्तरकाशी, लेकिन इसी बीच रास्ते में दोनों रहस्यमयी तरीके से गायब हो जाते हैं. दोनों के मोबाइल फोन भी अचानक बंद हो जाते हैं. सवाल ये है कि आखिर दोनों कहां गुम हो गए?
दिवाली की छुट्टियों में एक जोड़ा शहर की भीड़-भाड़ से दूर दिल्ली से यहां घूमने पहुंचा था. शाम हो चली थी और दोनों को इस छोटे से टाउन में रहने के लिए कोई कायदे की जगह नहीं मिल रही थी. ऐसे में पहले तो दोनों ने यहां से निकलने के लिए किसी टैक्सी की तलाश की, लेकिन जब इस कोशिश में भी नाकामी हाथ लगी, तो उन्होंने चकाराता से निकलने के लिए एक पर पर्सनवाली टैक्सी में बैठ जाना ठीक समझा. ये टैक्सी टाइगर फॉल, उत्तरकाशी की तरफ जा रही थी. टैक्सी ड्राइवर ने दोनों को उत्तरकाशी की तरफ ले चलने का भरोसा दिया और कहा कि वो रास्ते में किसी जगह पर उनके ठहरने का इंतजाम भी करवा देगा, लेकिन दिल्ली से आए अभिजीत और मौमिता के साथ इसके बाद कुछ ऐसा हुआ, जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता था.
मौमिता के घरवालों ने 29 अक्टूबर को दिल्ली के साकेत पुलिस स्टेशन में अपनी बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई. दिल्ली पुलिस ने फौरन छानबीन शुरू की और इसके साथ ही उसे एक चौंकानेवाली बात पता चली. अभिजीत और मौमिता दोनों के मोबाइल फोन तो पहले से ही बंद थे, लेकिन हैरानी भरे तरीके से इन नंबरों से आखिरी कॉल एक लोकल नंबर पर किया गया था. जी हां, एक लोकल नंबर, जिसका फ़ोन का मालिक कोई राजू दास था, लेकिन पुलिस तब और सकते में आ गई, जब उसने पाया कि राजू का मोबाइल फोन भी 23 अक्टूबर से ही लगातार बंद था.
तफ्तीश आगे बढ़ी और जल्द ही ये पता चला कि राजू दास कोई और नहीं, बल्कि चकराता का ही एक टैक्सी ड्राइवर है. इधर, अपनी बेटी के गायब होने से परेशान मौमिता के घरवाले अब चकराता के नज़दीक विकासनगर जा पहुंचे. मौमिता के घरवालों और दिल्ली पुलिस के बताने पर विकासनगर की पुलिस ने 6 नवंबर को राजू दास को हिरासत में ले लिया, लेकिन दोनों की तलाश में लगे उनके घरवालों को तब झटका लगा, जब उन्हें पता चला कि टैक्सी ड्राइवर राजू से कोई खास जानकारी नहीं मिलने पर पुलिस उसे पूछताछ के बाद छोड़ दिया.
इधर, मामले की तफ्तीश करती हुई दिल्ली पुलिस की एक टीम भी तब तक चकराता और विकासनगर पहुंच चुकी थी, लेकिन इसी बीच इस मामले के पहले सस्पेक्ट यानी ड्राइवर राजू दास ने एक ऐसी हरकत की, जिससे पुलिस के कान खड़े हो गए. पुलिस के चंगुल से छूटने के बाद सबसे पहले राजू ने अपना मोबाइल ऑन किया और फिर उसमें एक नया सिम कार्ड डाल लिया और बस, उसकी इसी हरकत ने एक बार फिर से राजू को पुलिस की रडार पर ला दिया.
दुनिया की नजरों से ओझल होने से पहले अभिजीत और मौमिता आख़िरी बार जिस शख्स के साथ देखे गए थे, वो एक बार फिर से पुलिस के कब्जे में था, लेकिन इस बार उसकी एक हरकत उसे क़ानून के जाल में फंसा चुकी थी. अब चकराता का टैक्सी ड्राइवर राजू दास एक बार फिर से पुलिस के कब्जे में था. पुलिस की सख्ती के सामने राजू ने बिल्कुल किसी तोते की मानिंद पूरी कहानी बयान करनी शुरू कर दी. उसने बताया कि किस तरह 22 अक्टूकर की शाम अभिजीत और मौमिता चकराता में किसी होटल की तलाश कर रहे थे और इसी बीच होटल ना मिलने पर उसने राजू की टैक्सी में उत्तरकाशी जाने का फ़ैसला किया. हालांकि राजू से बात करने के बाद दोनों ने जब कुछ देर और होटल ढूंढ़ने का फ़ैसला किया, राजू को अपने दोस्तों के साथ मिलकर दोनों को लूटने की साज़िश रचने का मौका मिल गया.
राजू और उसके तीनों दोस्त अपनी असलियत पर उतर चुके थे. दो लड़कों ने पहले तो अभिजीत को पकड़ कर गाड़ी से नीचे उतारा, जबकि दो ने मौमिता को दबोच लिया. दोनों शोर मचाया, छोड़ने की गुज़ारिश की, लेकिन दोनों की चीख़ सुनसान और अंधेरी वादियों में गुम हो कर रह गई. अब मौमिता से बदतमीजी देख कर अभिजीत बेचैन हो गया, उसने बदमाशों से चंगुल से छूटने की कोशिश की पर अभिजीत के विरोध को देखते उन्होंने गाड़ी से एक रस्सी निकाली और देखते ही देखते सड़क के किनारे गला घोंट कर मौमिता की आंखों के सामने अभिजीत को मौत के घाट उतार दिया. मौमिता अब भी जिंदा थी और वो अब भी दरिंदों से अपनी ज़िंदगी की भीख मांग रही थी, लेकिन क़ानून से बचने की कोशिश में क़ातिलों ने उसकी भी जान ले ली और ना सिर्फ़ जान ली, बल्कि ऐसा करने से पहले एक ने उसके साथ बलात्कार भी किया.