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Explainer: उलझे रिश्तों का ताना-बाना है शीना बोरा हत्याकांड, इंद्राणी मुखर्जी को ऐसे मिली जमानत

उस दौर में इंद्राणी मुखर्जी ने पैसे, ग्लेमर और शोहरत की खातिर अपनी जिंदगी को ऐसा बना रखा था कि वो किसी को ये बताना भी मुनासिब नहीं समझती थी कि वो एक जवान बेटी और बेटे की मां है.

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शीना बोरा की हत्या के आरोप में इंद्राणी मुखर्जी को आरोपी बनाया गया है
शीना बोरा की हत्या के आरोप में इंद्राणी मुखर्जी को आरोपी बनाया गया है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 2006 में इंद्राणी के पास मुंबई पहुंची थी शीना बोरा
  • 24 अप्रैल 2012 को गायब हो गई थी शीना
  • ड्राइवर श्याम मनोहर राय के पकड़े जाने पर खुला था राज

शीना बोरा हत्याकांड की आरोपी इंद्राणी मुखर्जी साढ़े 6 साल बाद खुली हवा में सांस ले पाएंगी. देश की सबसे बड़ी अदालत ने बुधवार को इंद्राणी मुखर्जी की जमानत मंजूर कर ली. इस मामले में इंद्राणी पिछले कई साल से जमानत के लिए अपील कर रही थी. लेकिन हर बार उन्हें नाकामयाबी ही हाथ लगी. मगर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने इंद्राणी को जमानत दे दी. आइए जानते हैं कि किस आधार पर मिली इंद्राणी मुखर्जी को जमानत.

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इंद्राणी मुखर्जी को ऐसे मिली जमानत 
शीना बोरा हत्याकांड की मुख्य आरोपी और शीना की मां इंद्राणी मुखर्जी को करीब साढ़े 6 साल बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई. हालांकि उनके पति और इस मामले में सह आरोपी रहे पीटर मुखर्जी को पहले ही जमानत मिल चुकी है. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान इंद्राणी की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी अदालत में पेश हुए थे. उन्होंने कोर्ट में अपनी दलील रखते हुए कहा कि धारा 437 के तहत इंद्राणी मुखर्जी विशेष छूट की हकदार हैं. इस केस में पिछले 11 माह से कोई सुनवाई आगे नहीं बढ़ी है. इस मामले में 237 गवाह है, जिसमें से केवल 68 की जांच की गई है. इस केस में इंद्राणी के पति पीटर मुखर्जी को पहले ही जमानत मिल गई थी. इस केस में उनकी भूमिका बेहद सीमित थी. इस केस में सबूतों के साथ छेड़छाड़ भी की गई थी और अब तक इंद्राणी का परोल भी नहीं हुआ है.

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इस अदालत ने पूछा कि परोल क्यों नहीं हुआ. मुकुल रोहतगी ने अदालत को बताया कि उन्होंने परोल लिया ही नहीं. इस मामले में सरकारी वकील और बचाव पक्ष के वकील की दलीलें सुनने के बाद मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस बी.आर. गवई ने यह कहकर इंद्राणी की जमानत मंजूर कर ली कि आरोपी साढ़े 6 साल से कत्ल के मामले में जेल में बंद है.

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नहीं हो पा रही थी सुनवाई
जानकारी के मुताबिक यह मामला सीबीआई की विशेष अदालत में विचाराधीन था. लेकिन वहां पदस्थ तत्कालीन जज के तबादला हो जाने और कोरोना महामारी के चलते करीब 2 साल तक इस मामले में सुनवाई नहीं हो पा रही थी. यह मामला तभी से ठंडे बस्ते में पड़ा था. लेकिन अब जमानत को लेकर इंद्राणी के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई थी. जिस पर बुधवार को सुनवाई करने के बाद अदालत ने इंद्राणी की जमानत मंजूर कर ली. 

परिवार का उलझा हुआ ताना-बाना
शीना बोरा का जन्म साल 1989 में पश्चिम बंगाल के महानगर कोलकाता में हुआ था. शीना बोरा, इंद्राणी मुखर्जी और सिद्धार्थ दास की बेटी थी. वह मुंबई मेट्रो वन में काम करती थी. कहा जाता है कि कोई अन्य व्यक्ति शीना का पिता था. वर्ष 1992 में शीना की मां इंद्राणी उसे लेकर गुवाहाटी चली गई थी. जहां उसने अपने दोनों बच्चों शीना और मिखाइल को उपेंद्र कुमार बोरा और दुर्गा रानी की देखरेख में छोड़ दिया था. इसके बाद उसने संजीव खन्ना के साथ शादी कर ली थी. उन दोनों की एक बेटी विधि खन्ना है. जिसकी कस्टडी को लेकर इंद्राणी और संजीव के बीच बाद में केस चला. जिसे इंद्राणी ने जीत लिया था. फिर वो इंग्लैंड में चली गई थी. मगर साल 2002 में इंद्राणी ने पीटर मुखर्जी की शादी की. इसके बाद पीटर विधि को कानूनी तौर पर गोद ले लिया था. 

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इंद्राणी की जिंदगी में सबकुछ ठीक चल रहा था. साल 2006 में उसकी पहली बेटी शीना बोरा उसके पास मुंबई आ गई थी. जिसे इंद्राणी ने सबके सामने अपनी छोटी बहन बताया था. यहां तक कि पीटर भी उसे इंद्राणी की छोटी बहन समझते थे. दरअसल, इंद्राणी मुखर्जी सभी से यह बात छिपाती थी कि शीना और मिखाइल बोरा उसके बच्चे हैं. पीटर मुखर्जी ने शीना बोरा को यूनिवर्सिटि मे दाखिला दिलाया. जहां उसने 2006 से 2009 तक पढ़ाई की थी. इसके बाद 2009 में शीना को रिलायंस ग्रुप में नौकरी मिली. और जून 2011 में उसने मुंबई मेट्रो वन में सहायक प्रबन्धक के पद पर नौकरी हासिल की. 

मुंबई में ही शीना की मुलाकात पीटर मुखर्जी के बेटे राहुल मुखर्जी से हुई थी. पहले दोनों दोस्त बने और फिर बात आगे बढ़ गई. नतीजा ये हुआ कि दोनों 2009 से 2012 तक साथ रहे. 24 अप्रैल 2012 को शीना ने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था. उसी दिन राहुल मुखर्जी को शीना के मोबाइल से एक एसएमएस मिला, जिसमें शीना ने उसके साथ रिश्ता तोड़ने की बात लिखी थी. 

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24 अप्रैल 2012 को गायब हो गई थी शीना
इस बात से राहुल काफी परेशान हो गया. जब उसने घर आकर अपनी सौतेली मां इंद्राणी मुखर्जी से शीना के बारे में पूछा तो उसने बताया कि हायर एजुकेशन के लिए अमेरिका चली गई है. नतीजा ये हुआ कि 24 अप्रैल 2012 के बाद से शीना मुखर्जी मुंबई में कभी नहीं दिखी. तब शीना की मां इंद्राणी मुखर्जी ने सभी को यही बताया था कि शीना अमेरिका चली गई है. हालांकि पीटर मुखर्जी के बेटे राहुल और शीना के भाई मिखाइल बोरा ने इंद्राणी की बात पर कभी यकीन नहीं किया. वो दोनों लगातार अलग-अलग शीना को तलाश करते रहे. वो पुलिस के पास भी गए पहले तो पुलिस ने मामला दर्ज ही नहीं किया.

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मगर बाद में पुलिस ने शीना बोरा की गुमशुदगी दर्ज कर ली थी. यूं तो ये मामला फाइलों में दबकर ही दम तोड़ देता लेकिन ये मामला उस वक्त सुर्खियों में आया, जब 21 अगस्त 2015 को मुंबई पुलिस ने 43 वर्षीय श्याम मनोहर राय नाम के एक शख्स को अवैध पिस्टल रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था. श्याम मनोहर राय ने ही पुलिस के सामने शीना के कत्ल का राज बेपर्दा किया था.

उसकी निशानदेही पर ही पुलिस ने इंद्राणी मुखर्जी और उसके पूर्व पति संजीव खन्ना को ड्राईवर के साथ गिरफ्तार कर लिया था. इसके बाद इस मामले में एक बाद एक खुलासे होते रहे, आरोपियों की निशानदेही पर ही पुलिस ने शीना की लाश के अवशेष भी बरामद कर लिए थे. इसी मामले में पुलिस मुखर्जी को भी लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया था. लेकिन कोरोना महामारी के दौरान ही उनकी सीमित भूमिका को देखते हुए अदालत ने उनकी जमानत मंजूर कर ली थी.

इस हाई प्रोफाइल केस की कहानी में कई तरह के झोल थे. शीना की हत्या के मामले में सबसे हैरान करने वाली बात ये थी कि जब शीना की लाश बरामद हुई थी तो उसकी शिनाख्त हो जाने के बाद इंद्राणी मुखर्जी ने उसे अपनी छोटी बहन करार दिया था. लेकिन जैसे-जैसे इस मामले की जांच आगे बढ़ती गई तो शीना और इंद्राणी के रिश्ते का सच खुलकर सामने आ गया था. दरअसल, इंद्राणी ने पैसे, ग्लेमर और शोहरत की खातिर अपनी जिंदगी को ऐसा बना रखा था कि वो किसी को ये बताना भी मुनासिब नहीं समझती थी कि वो एक जवान बेटी और बेटे की मां हैं. 

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