दिल्ली से सटे गाजियाबाद में आज से 9 साल पहले एक ऐसा सामूहिक हत्याकांड अंजाम दिया गया था. जिसने लोगों को खौफजदा कर दिया था. उस दिन बेरहम कातिल ने एक नहीं दो नहीं बल्कि एक साथ 7 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था. मरने वालों में 3 नाबालिग बच्चे भी शामिल थे. कत्ल की ये एक ऐसी वारदात थी, जिसने पुलिस को भी हैरान कर दिया था. अब इस मामले में अदालत ने कातिल को सजा-ए-मौत सुनाई है. आइए आपको बताते हैं कि आखिर ये पूरी खूनी वारदात कैसे अंजाम दी गई थी.
कौन थे कारोबारी सतीश गोयल
इस पूरे मामले को समझने के लिए हमें 9 साल पीछे जाना होगा. बात साल 2013 की है. सरसों के खल और चूरी का बड़ा कारोबार करने वाले 65 वर्षीय सतीश गोयल आर्थिक रूप से काफी संपन्न थे. घर और बाहर किसी चीज की कमी नहीं था. भरापूरा परिवार था. वो अपनी पत्नी, बेटे, बहू और पोते-पोतियों के साथ गाजियाबाद के घंटा घर, नई बस्ती इलाके में रहते थे. उनकी दो बेटियां भी थीं, जिनकी वो शादी कर चुके थे. अब परिवार के साथ एक अच्छी जिंदगी डी रहे थे, हालांकि उन्हें किडनी की बीमारी हो गई थी. जिसकी वजह से उन्हें रोजाना एक इंजेक्शन लेना पड़ता था. सतीश ने गाड़ी चलाने के लिए एक ड्राइवर भी रखा हुआ था. जिसका नाम था राहुल वर्मा. वो उनका काफी पुराना मुलाजिम था, लेकिन घर में एक चोरी की वारदात हो जाने के बाद सतीश गोयल ने राहुल को नौकरी से निकाल दिया था और उस वक्त पुलिस ने भी उससे पूछताछ की थी.
21 मई 2013, नई बस्ती, गाजियाबाद
उस दिन रोजाना की तरह सतीश और उनका बेटा सचिन अपना काम निपटाकर घर लौट आए थे. देर शाम सतीश को इंजेक्शन देने वाला डॉक्टर कुछ देर बाद आने वाला था. लेकिन इसी दौरान सतीश गोयल का पूर्व ड्राइवर राहुल वर्मा अचानक उनके घर में अंदर दाखिल हुआ. उसके हाथ में एक चाकू जैसा तेजधार हथियार था और उसने एक-एक कर कारोबारी सतीश गोयल (65), उनकी पत्नी मंजू गोयल (63), बेटे सचिन (36), बहू रेखा (34) और उनके तीन नाबालिग बच्चों को उस तेजधार हथियार से हमला कर मौत की नींद सुला दिया. ना जाने राहुल के सिर पर कैसा भूत सवार था कि जो सामने आया वो उसे काटता गया. उसने घर में मौजूद तीन नाबालिग बच्चों पर भी रहम नहीं दिखाया. राहुल ने सतीश गोयल और उनके परिवार वालों के जिस्म को गोदकर छलनी कर दिया था. उन सभी ने तड़प-तड़पकर जान दे दी और राहुल उन सबकी मौत का तमाशा देखता रहा.
हत्या और लूट के बाद फरार हो गया था कातिल
सात लोगों का खून करने के बाद कातिल राहुल वर्मा ने घर में रखे गहने और नकदी सब समेट लिया और मौके से भाग निकला. अब घर में कोई जिंदा इंसान बाकी नहीं था. वहां केवल लाशें थीं वो भी पूरे गोयल परिवार की लाशें. सतीश गोयल को इंजेक्शन लगाने वाला डॉक्टर जब वहां पहुंचा तो घर का दरवाजा खुला था. वो घर में दाखिल हुआ तो पहली मंजिल पर दो लाशें देखकर उसके होश उड़ गए. डॉक्टर ने फौरन इस बात की खबर सतीश गोयल के पड़ोसियों और पुलिस को दी.
मौका-ए-वारदात पर हर तरफ फैला था खून
जब इलाके की पुलिस मौका-ए-वारदात पर पहुंची तो वहां मंजर देखकर पुलिसवाले भी हैरान रह गए. घर की पहली मंजिल दो लाशें पड़ी थी और बाकी 5 लहूलुहान मुर्दा जिस्म घर की दूसरी मंजिल पड़े थे. फर्श पर हर तरफ खून फैला था. वहां इतना खून था कि मृतकों के कपड़ों का रंग भी पता नहीं चल रहा था. सभी को बेरहमी के साथ गोदकर मारा गया था. हर किसी पर एक नहीं दो नहीं बल्कि कई कई बार वार किए गए थे. पुलिस ने फोरेंसिक टीम को भी मौके पर बुला लिया था. मामला हाई प्रोफाइल था लिहाजा पुलिस कोई चूक नहीं करना चाहती थी. पुलिस ने पंचनामे की कार्रवाई पूरी की और सभी लाशों को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाया. इसके बाद कातिल को पकड़ने के लिए कई टीम गठित की गईं थी.
शक के दायरे में था राहुल वर्मा
इस सामूहिक हत्याकांड की खबर पूरे शहर ही नहीं बल्कि देश में फैल गई थी. हर तरफ इस सनसनीखेज हत्या के मामले को लेकर चर्चा हो रही थी. गाजियाबाद का वो इलाका जहां ये वारदात हुई, वहां के लोग खौफजदा थे. पुलिस कातिल की तलाश में जुट गई थी. जांच में साफ हो गया था कि कत्ल किसी रंजिश या लूट के इरादे से ही अंजाम दिए गए थे. जैसे-जैसे मामले की तफ्तीश आगे बढ़ती गई, सतीश का पुराना ड्राइवर राहुल वर्मा शक के घेरे में आता गया और आखिरकार पुलिस ने राहुल वर्मा को गिरफ्तार कर ही लिया. जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो राहुल टूट गया और उसने इस खौफनाक कत्ल की वारदात का सच पुलिस के सामने उगल दिया.
अदालत में पेश किए गए 30 गवाह
तभी से सामूहिक हत्याकांड के मामला कोर्ट में चल रहा था. जिसकी सुनवाई करते हुए अदालत ने बीते शनिवार यानी 30 जुलाई को इस मामले को बहुत संगीन जुर्म बताते हुए आरोपी पूर्व ड्राइवर राहुल वर्मा को दोषी करार दिया था और सोमवार को अदालत ने मुजरिम राहुल को सजा-ए-मौत दिए जाने का फरमान सुना दिया. 9 साल से ज्यादा चली कानूनी कार्यवाही के दौरान दोनों पक्षों की ओर से कुल 30 गवाह अदालत के सामने पेश किए गए. जिसमें पीड़ित पक्ष की तरफ से 28 और आरोपी पक्ष की तरफ से 2 लोगों ने गवाही दी. तब जाकर अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाया.
(गाजियाबाद से मयंक गौड़ का इनपुट)