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न कत्ल का तरीका, न मोटिव बता रही सूचना सेठ... 10 दिन बाद भी अनसुलझे हैं गोवा हत्याकांड के ये राज

Killer Mother Soochna: गोवा पुलिस ने बीते मंगलवार यानी 16 जनवरी को एक साइकोलॉजिस्ट यानी मनोवैज्ञानिक की मदद से सूचना सेठ से नए सिरे से बातचीत करने की कोशिश की. लेकिन कहानी में मनोवैज्ञानिक की एंट्री के बावजूद सूचना ने खुल कर किसी भी बात का जवाब नहीं दिया.

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सूचना से पूछताछ के दौरान मनोवैज्ञानिक की मदद ली जा रही है
सूचना से पूछताछ के दौरान मनोवैज्ञानिक की मदद ली जा रही है

Killer Mother Soochna Seth: कातिल मां सूचना अपने मासूम बेटे की लाश के साथ रंगे हाथों पकड़ी गई थी. लेकिन पुलिस को पिछले दस दिनों से एक सवाल का जवाब नहीं मिल रहा है. सवाल ये कि आखिर सूचना ने अपने चार साल के बेटे की जान कैसे ली? सूचना लगातार गोवा पुलिस को गुमराह कर रही है. और इसी वजह से गोवा पुलिस पहली बार मनौवैज्ञानिक की मौजूदगी में सूचना से पूछताछ कर रही है. 

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11 दिन बाद भी अनसुलझे हैं कई सवाल
वैसे तो गोवा पुलिस सूचना सेठ के हाथों उसके चार साल के बेटे के क़त्ल का मामले को एक ओपन एंड शट केस मान कर चल रही थी. जिसमें पुलिस ने वारदात के सामने आने के चंद घंटे बाद ही ना सिर्फ बच्चे की लाश बरामद कर ली, बल्कि क़त्ल के इल्जाम में बच्चे की मां सूचना सेठ को भी गिरफ्तार कर लिया. मगर हक़ीकत यही है कि इस वारदात का खुलासा हुए 11 दिनों का वक़्त गुजर जाने के बावजूद फिलहाल इस क़त्ल को लेकर बेशुमार सवाल हैं. यहां तक कि क़त्ल का मोटिव भी पूरी तरह साफ नहीं है. 

सूचना की साइकोलॉजिकल काउंसिंग
इसकी सबसे बड़ी वजह यही है कि पूरे वारदात को लेकर सूचना सेठ ने अपना मुंह सी रखा है. वो कुछ भी बोलने को राज़ी नहीं. और यही वजह है कि अब गोवा पुलिस ने सूचना से सीधी पूछताछ करने की जगह उसकी साइकोलॉजिकल काउंसिंग करने की शुरुआत की है, ताकि वो उसे सीने में दफ़्न राज़ को बाहर निकाल सके.

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मनोवैज्ञानिक की मौजूदगी में पूछताछ
गोवा पुलिस ने बीते मंगलवार यानी 16 जनवरी को एक साइकोलॉजिस्ट यानी मनोवैज्ञानिक की मदद से सूचना सेठ से नए सिरे से बातचीत करने की कोशिश की. लेकिन कहानी में मनोवैज्ञानिक की एंट्री के बावजूद सूचना ने खुल कर किसी भी बात का जवाब नहीं दिया. और तब मनोवैज्ञानिक ने अपना सेशन पूरा होने के बाद गोवा पुलिस को ये सुझाव दिया कि वो सूचना से कत्ल के राज़ उगलवाने में कोई जल्दी ना करे, बल्कि सूचना के थोड़ा और नॉर्मल होने और खुलने का इंतज़ार करें, ताकि वो खुल कर अपने दिल की बात कह सके. 

'अदृश्य खोल' की थ्योरी
मनोवैज्ञानिक ने गोवा पुलिस से ये भी कहा कि अगर सूचना के साथ पूछताछ के मामले में जल्दबाज़ी दिखाई गई तो बहुत मुमकिन है कि सूचना अपने-आप किसी 'अदृश्य खोल' में बंद कर ले और तब उससे क़त्ल से जुड़ा कोई भी नया राज़ जानना और भी मुश्किल हो जाए. यही वजह है कि अब पुलिस उसकी साइकोलॉजिकल काउंसिलिंग भी किसी पुलिस स्टेशन में करने की बजाय गोवा के ही बंबोलिम इलाके में मौजूद इंस्टीट्यूट ऑफ सायकोलॉजिकल हेल्थ एंड हम्यूमन बिहेवियर में कर रही है, ताकि उसे एक नया और अलग सा माहौल दिया जा सके.

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सूचना की नॉर्मल करने की कोशिश
मनोवैज्ञानिक के इस नए सुझाव के बाद अब गोवा पुलिस ने सूचना से पूछताछ के मामले में फूंक-फूंक कर क़दम रखने का फ़ैसला किया है. वो बंद कमरे हुए इस क़त्ल का राज़ इस मामले के इकलौते चश्मदीद और संदिग्ध का़तिल यानी सूचना से ही जानना चाहती है, ताकि मामले की तफ्तीश आगे बढ़ाई जा सके और उसके खिलाफ़ एक मज़बूत केस तैयार हो. कुछ इसी इरादे से गोवा पुलिस अभी आने वाले दिनों में मनोवैज्ञानिक के सहारे से सूचना से संवाद स्थापित करने यानी बातचीत करने की कोशिश करेगी. इसी कड़ी में पुलिस ने लगातार दूसरे दिन यानी गुरुवार को भी सूचना की साइकोलॉजिकल काउंसिलिंग करवाई, ताकि उसे और नॉर्मल किया जा सके.

सूचना के खिलाफ हैं सारे सुबूत
असल में गोवा पुलिस का ये मानना है कि इस मामले में सूचना के खिलाफ़ उसके पास सारे पुख्ता सबूत हैं. क़त्ल बंद कमरे में हुआ है. और उस कमरे में विक्टिम यानी पीड़ित बच्चे के अलावा सिर्फ एक और शख्स यानी सूचना के होने के प्रमाण हैं. पुलिस के पास इसे जुड़े इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस तो हैं ही, डॉक्यूमेंटेटिव यानी दस्तावेज़ी और सरकम्सटैंशियल एविडेंस यानी परिस्थिजन्य साक्ष्य भी हैं. कमरे से लाश के गायब होने के बाद से लेकर उसके कर्नाटक के चित्रदुर्ग में बरामद होने का पूरा सिक्वेंस है, साथ ही क़त्ल की तरीके के तौर पर बच्चे की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट है, जिसमें स्मॉदरिंग यानी दम घोंट कर या फिर स्ट्रैंगुलेशन यानी गला घोंट कर हत्या करने के फॉरेंसिक एविडेंस भी हैं. 

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तफ्तीश के लिए मनोवैज्ञानिक की मदद
ऐसे में अब अगर पुलिस को किसी चीज़ की दरकार है, तो वो है इस वारदात के पीछे का मोटिव, क़ातिल का कबूलनामा और इस क़त्ल से जुड़े वैसे सवालों का जवाब ढूंढना, जो अब भी रहस्य हैं. और यही वजह है कि पुलिस सूचना से लगातार सवाल जवाब कर रही है. पुलिस सूत्रों की मानें तो उसके पास मौजूद सबूत सूचना को सज़ा दिलाने के लिए काफी हैं, बशर्ते वो अदालत में खुद को मेंटली अनस्टेबल यानी दिमागी तौर पर अस्थिर साबित करने की कोशिश ना करे और यही वजह है कि पुलिस इस मामले में अब तफ्तीश के लिए मनोवैज्ञानिक की मदद ले रही है, ताकि सूचना से क़त्ल का सच उगलवाया जा सके. जाहिर है अब पुलिस सीधे तो सूचना से सवाल जवाब नहीं कर रही, लेकिन मनोवैज्ञानिक के सहारे वो सूचना से ऐसे कई सवालों के जवाब जानना चाहती है, जो इस केस के राज़ से पर्दा हटा सकते हैं. 

बहुत से सवालों के जवाब तलाश रही है पुलिस
गोवा पुलिस के सूत्रों की मानें तो वो सूचना सेठ से ये सवाल पहले दिन से ही पूछ रही है, मसलन, पुलिस सूचना से पूछ रही है कि तुमने अपने ही बच्चे का क़त्ल क्यों कर दिया? इस वारदात के पीछे तुम्हारा मक़सद क्या था? आख़िर ऐसा क्या हुआ कि तुमने इतना भयानक क़दम उठा लिया? आख़िर ऐसी क्या बात थी कि तुम्हें लगा कि बच्चे को मार देना ही इकलौता रास्ता बचा है? तुमने होटल के कमरे में देर तक लाश क्यों छुपाए रखी? तुम बच्चे की लाश को सूटकेस में भर कर बेंगलुरु क्यों ले जाना चाहती थी? अगर तुम लाश के साथ बेंगलुरु पहुंचने में कामयाब हो जाती, तो वहां लाश के साथ क्या करती? लाश को ठिकाने लगाने की तुम्हारी क्या प्लानिंग थी? क्या तुम इसे एक नैचुरल डेथ बता कर उसका अंतिम संस्कार करती? तुमने अपनी कलाई क्यों काट ली? अगर ये ख़ुदकुशी की कोशिश थी तो फिर किन हालात में तुम पीछे हट गई? बेंगलुरु वापस जाने के सिर्फ दो दिन बात तुम क्यों वापस लौट आई? क्या तुमने क़त्ल के लिए ही गोवा को चुना था? अगर हां, तो तुमने 7 जनवरी को वेंकट को बच्चे से मिलने के लिए क्यों बुलाया? 

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कत्ल के मोटिव पर सवाल
ये सब पूछने के बावजूद भी सूचना ने किसी भी सवाल का खुल कर जवाब नहीं दिया. लेकिन अब वो मनोवैज्ञानिक के ज़रिए उसके दिमाग में घुसना चाहती है. और तो और वारदात को सामने आए लंबा वक्त गुजरने के बावजूद मोटिव क्लियर नहीं है. अगर एक वक़्त के लिए एक मान भी लिया जाए कि वो अपने बच्चे को लेकर इनसिक्योर थी. वो नहीं चाहती थी कि उसका पति उसके बेटे से मिले. कहीं इस मिलने-मिलाने के चक्कर में बेटा उसके पति के पास ही ना चला जाए. यानी वो बेटे को किसी कीमत पर खुद से अलग नहीं करना चाहती थी, तो फिर सवाल ये उठता है कि आखिर इस मानसिक हालत में उसने बेटे की जान क्यों ले ली? क्योंकि जान लेने पर भी बेटे को तो उससे दूर ही चले जाना था. बल्कि हमेशा-हमेशा के लिए दूर चले जाना था. और सूचना ने कुछ ऐसा ही किया. यानी मोटिव पर सवाल है.

एक सप्ताह में दो बार गोवा ट्रिप
इस बीच पुलिस की तफ्तीश में साफ हुआ है कि सूचना सेठ किसी भी कीमत पर अपने बेटे को उसके पापा यानी अपने पति वेंकट से नहीं मिलने देना चाहती थी और इसीलिए वो बार-बार बेंगलुरु से भाग रही थी. उसने एक हफ्ते में दो बार गोवा का ट्रिप किया और दूसरी ट्रिप में उसने अपने बेटे की हत्या कर दी. पुलिस की मानें तो सूचना पिछली बार रविवार, 31 दिसंबर 2023 को बेंगलुरु से अपने बेटे के साथ गोवा आई और नए साल पर वो गोवा में ही रुकी. उसने अपने लिए साउथ गोवा में एक फाइव स्टार होटल का कमरा बुक करवाया था. और 5 दिन रुकने के बाद उसने 4 जनवरी को उस होटल से चेकआउट किया और फिर बच्चे के साथ ही बेंगलुरु लौट गई थी. 

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6 जनवरी को दोबारा गोवा पहुंची थी सूचना
एक खास बात ये भी रही कि 31 दिसंबर को जब सूचना अपने बच्चे को लेकर पहली बार गोवा आई, तब उसने अपने पति वेंकट से कहा कि उनके बेटे की तबीयत खराब है, इसलिए इस संडे उसके बेटे की उससे मुलाकात नहीं हो सकेगी. हालांकि बेंगलुरु पहुंचने के बाद वो सिर्फ दो दिन तक वहां रही और इससे पहले कि रविवार यानी संडे का दिन आता, वो 6 जनवरी शनिवार को फिर से अपने बेटे को लेकर गोवा चली आई. और इस बार उसने नॉर्थ गोवा के कैंडोलिम इलाके में द सोल बनयान ग्रैंडे होटल में कमरा लिया और अपने बेटे के साथ चेक इन कर लिया था.

वेंकट को बेटे से नहीं मिलवाना चाहती थी सूचना
सूचना खुद तो गोवा में थी, लेकिन वो अपने पति वेंकट को बेटे से मिलवाने को लेकर झूठ बोल रही थी. अपने पति के साथ बच्चे की मीटिंग कन्फर्म करने के साथ-साथ सूचना ने इसके लिए वेंकट को बेंगलुरु का ही एक लोकेशन मीटिंग प्वाइंट के तौर पर ही बताया था. लेकिन वो बच्चे को लेकर बेंगलुरु से गोवा चली गई थी. ऐसे में उसका पति देर तक सूचना की बताई गई जगह पर अपने बेटे का इंतजार कर रहा और आखिर में उसे निराश हो कर लौटना पड़ा. इस पूरे सिक्वेंस को देख कर और सूचना के रवैये पर गौर करने के बाद गोवा पुलिस सूत्रों का मानना है कि वो किसी भी कीमत पर अपने बेटे को अपने पति से मिलने नहीं देना चाहती थी. 

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वेंकट से लगातार झूठ बोल रही थी सूचना
7 जनवरी को बेटे से मिलने को लेकर पति से कहा गया झूठ अपनी तरह का पहला झूठ नहीं था, बल्कि इससे पहले भी सूचना ने कई बार अपने पति को बेटे से मिलवाने के मामले पर धोखा दिया. इससे पहले पहले रविवार को भी अपने पति वेंकट को बेटे चिन्मय से ना मिलने देने के लिए टाल-मटोल करती रही. और सिर्फ इसी वजह से उसने एक हफ्ते में दो बार गोवा का रुख किया और दोनों ही बार वो रविवार को गोवा में रही, ताकि वो खुद को और बेटे चिन्मय को वेकंट से दूर रख सके.

होटल के कमरे में किया था बेटे का कत्ल
इधर, 6 जनवरी को सूचना ने गोवा में जो कमरा बुक करवाया था, वो 10 जनवरी तक के लिए था, लेकिन इससे पहले 7 जनवरी रविवार की रात करीब 9 बजे ही उसने फिर से बेंगलुरु लौटने की तैयारी कर ली थी. और रात के साढ़े बारह-पौने एक बजते-बजते वो कैब लेकर सड़क के रास्ते अपने बेटे की लाश को सूटकेस में छुपा कर बेंगलुरु के लिए निकल गई. जाहिर इससे पहले वो होटल के कमरे में ही अपने बेट चिन्मय का क़त्ल कर चुकी थी.

फिर से पांच दिनों की पुलिस रिमांड पर है कातिल मां
फिलहाल, सूचना पांच दिनों के लिए गोवा पुलिस के पास है. पुलिस ने उसे सोमवार को चिल्ड्रेंस कोर्ट में पेश किया था और उसकी रिमांड मांगी थी. जिस पर अदालत ने सूचना को पांच दिनों के लिए पुलिस की रिमांड में सौंप दिया. लेकिन दिक्कत ये कि सूचना अपना मुंह नहीं खोल रही और ऐसे में पुलिस को उससे सच जानने के लिए मनोवैज्ञानिकों की मदद लेनी पड़ रही है. ऐसे में बहुत मुमकिन है कि पुलिस शायद फिर से सूचना की पुलिस रिमांड भी मांगे.

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