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नशा, नफरत और मर्डर: बेटे का कत्ल कर मंदिर पहुंचा था कातिल बाप, फिर लाश के टुकड़े कर शहर में फेंके

अहमदाबाद पुलिस के हाथ सीसीटीवी की कुछ तस्वीरें लगी. उन तस्वीरों को देख कर ऐसा अंदाज़ा लगाया जा रहा था कि कोई बुजुर्ग किसी भारी चीज को पोटली में बांध कर उसे कहीं पहुंचाने जा रहा है या फिर जैसे कोई किराये का मकान बदल रहा हो. मगर कहानी तो कुछ और ही थी..

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पुलिस ने स्वंय जोशी की लाश के टुकड़े शहर के अलग-अलग इलाकों से बरामद किए
पुलिस ने स्वंय जोशी की लाश के टुकड़े शहर के अलग-अलग इलाकों से बरामद किए
स्टोरी हाइलाइट्स
  • शहर के अलग-अलग हिस्सों में मिले थे लाश के टुकड़े
  • पॉलीथीन की थैलियों में पैक थे सिर, धड़, हाथ और पांव
  • चलती ट्रेन में पुलिस के हत्थे चढ़ा कातिल बाप

अहमदाबाद के वासणा इलाके में चार अलग-अलग जगहों पर पुलिस को चार पॉलीथीन के पैकेट मिले, जो किसी पोटली जैसे नजर आ रहे थे. मगर जांच करने पर उन पॉलीथीन की थैलियों से पुलिस को एक ही लाश के चार अलग-अलग टुकड़े बरामद होते हैं. अब पुलिस के सामने सवाल था कि कातिल की मरने वाले से ऐसी क्या दुश्मनी थी कि वो उसकी लाश के टुकड़ों को ऐसे शहर में फेंकता चला गया. पुलिस तफ्तीश को आगे बढ़ाती है और कातिल तक पहुंच जाती है. लेकिन जब कातिल का चेहरा सामने आता है तो हर कोई हैरान रह जाता है.

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अहमदाबाद पुलिस के हाथ सीसीटीवी की कुछ तस्वीरें लगी. उन तस्वीरों को देख कर ऐसा अंदाज़ा लगाया जा रहा था कि कोई बुजुर्ग किसी भारी चीज को पोटली में बांध कर उसे कहीं पहुंचाने जा रहा है या फिर जैसे कोई किराये का मकान बदल रहा हो. मगर आपको पता चले कि उस पोटली में एक लाश थी और वो बुजुर्ग उसे कहीं ठिकाने लगाने जा रहा था, तो शायद आप इस पर यकीन ना करें. 

दूसरी सीसीटीवी फुटेज में वही बुजुर्ग उसी स्कूटी पर नज़र आता है. लेकिन इस बार उसके पास वो बड़ी सी पोटली नहीं है, बल्कि एक पैकेट है, जिसे वो एक फुटपाथ पर बड़े आराम से रखता हुआ दिखाई देता है. वो स्कूटी में बैठे-बैठे ही पैकेट नीचे रखता है और फिर चुपचाप स्कूटी लेकर आगे निकल जाता है. इन तस्वीरों में भी कोई बहुत हैरान करनेवाली बात नज़र नहीं आती, लेकिन अगर ठीक पहली तस्वीर की तरह अगर आपको ये पता चले कि इस पैकेट में भी लाश के टुकडे हैं, जिन्हें ये बुजुर्ग निपटाने की कोशिश में जुटा है, तो शायद आपके लिए इस पर भी यकीन करना मुश्किल हो.

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जवान बेटे की लाश के टुकड़े
दरअसल, जुर्म के कुछ मामले ऐसे होते हैं, जिन पर मुश्किल होने के बावजूद यकीन करना ही पड़ता है और ये मामला ठीक वैसा ही है. और ये बुजुर्ग टुकड़ों में बंटी जिस लाश को निपटाने की कोशिश में लगा है, वो लाश भी किसी और की नहीं बल्कि खुद उसके जवान बेटे की है. जिसका कत्ल खुद इस बुजुर्ग ने अपने हाथों से किया है. गुजरात की राजधानी अहमदाबाद से जब एक बाप के हाथों बेटे के कत्ल की ये दहलानेवाली कहानी सामने आई तो सुन कर हर कोई हैरत में पड़ गया.

22 जुलाई 2022, दोपहर 2 बजे 
अहमदाबाद के वासणा इलाके में खुली सड़क के किनारे कचरे के ढेर पर पॉलीथिन के एक पैकेट में लोगों को एक सिर कटी लाश मिली. ये सिर कटी लाश क्या थी, सिर्फ़ एक धड़ था. उस धड़ पर ना तो कपड़े थे और ना ही कोई ऐसी चीज़ जिससे मरनेवाले की पहचान हो सकती थी. लेकिन जिस तरह से एक इंसानी धड़ को यहां कूडे के ढेर में फेंका गया था, उसे देख कर साफ था कि मामला कत्ल का है. 

अलग-अलग इलाकों से मिले लाश के टुकड़े
लिहाज़ा पुलिस फौरन इस सिलसिले में मर्डर का केस दर्ज कर मामले की छानबीन शुरू कर देती है. अभी तफ्तीश में एक ही रोज़ गुज़रते हैं कि पुलिस को शहर के ही एक दूसरे इलाके से एक पैकेट में दो कटी हुई इंसानी कांटे नज़र आती हैं. पुलिस ये टांगें बरामद करती हैं और कटे हुए धड़ की तरह उन्हें भी फॉरेंसिक जांच के लिए भिजवा देती है. पुलिस दोनों का डीएनए सैंपल भी कलेक्ट करती है, ताकि दोनों के मिलान से पता चल सके कि ये दोनों ही टुकडे एक ही इंसान के हैं या नहीं. लेकिन डीएनए रिपोर्ट आने से पहले ऊपरी तौर पर तो ऐसा ही लगता है कि इंसानी जिस्म के ये टुकड़े एक ही इंसान के हैं. 

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सीसीटीवी में दिखाई दिया कातिल
बहरहाल, पुलिस छानबीन आगे बढ़ाती है और लाशों के टुकड़े मिलनेवाली जगहों की सीसीटीवी तस्वीरें खंगालती है. इसी कोशिश में पुलिस को शहर के डॉक्टर हाउस के पास पॉलीथीन के पैकेट में कटी हुई टांगें रखते हुए इस बुजुर्ग की तस्वीरें नज़र आती हैं. पुलिस सीसीटीवी फुटेज और स्कूटी के नंबर के सहारे बुजुर्ग की तलाश शुरू करती है. और जल्द ही उसे पता चलता है कि ये स्कूटी शहर के अंबावाडी इलाके में रहनेवाले 65 साल के बुजुर्ग नीलेश जोशी की है. लेकिन पुलिस का शक तब और गहरा जाता है, जब उसे इस बुजुर्ग के घर में ताला बंद मिलता है. छानबीन के दौरान पुलिस को उसके मकान से ये सीसीटीवी फुटेज हाथ लगता है, जिसमें बुजुर्ग धड़ को निपटाने के लिए उसे स्कूटी पर ले जाता हुआ दिखता है.

चलती ट्रेन से गिरफ्तारी
घर में ताला लगा होने की वजह से पुलिस कुछ देर के लिए तो उलझन में पड़ जाती है, लेकिन फिर वो मोबाइल नंबर के सहारे बुजुर्ग को टैक करने की कोशिश करती है. पता चलता है कि बुजुर्ग अहमदाबाद से सूरत जा चुका है और वहां से अवध एक्सपेस में बैठ कर गोरखपुर की ओर जा रहा है. अब पुलिस की टीम उसका पीछा करने लगती है और आखिरकार नीलेश जोशी को राजस्थान के सवाई माधोपुर से चलती ट्रेन से उतार कर गिरफ्तार कर लिया जाता है. 

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कातिल का कबूलनामा, हैरतअंगेज खुलासा
पूछताछ में बगैर किसी हिला-हवाली के बुजुर्ग ना सिर्फ़ अपने बेटे स्वयं जोशी के कत्ल की बात कबूल कर लेता है, बल्कि कत्ल के पीछे ऐसी दर्दनाक कहानी सुनाता है कि पुलिस वाले भी सन्न रह जाते हैं. नीलेश जोशी बताता है कि वो कबी गुजरात सरकार में क्लास टू अफसर हुआ करता था. लेकिन एक तरफ उसकी अपनी बीवी से अनबन हो गई और वो अपने बेटे स्वयं जोशी के साथ अलग रहने पर मजबूर हो गया. दूसरी ओर उसका बेटा नीलेश, जो कभी पढने लिखने में काफी तेज था, वो भी गलत संगत में पड गया. वो रोज़ शराब पीने और डग्स लेने लगा और इसके लिए रोज-रोज उससे पैसे भी मांगने लगा. चूंकि रिटायरमेंट के बाद जमा किए हुए पैसों से उसे अपने बेटे को रोज नशे के लिए पैसे देना मुमकिन नहीं था, तो अब इसी बात पर बाप-बेटे के बीच अक्सर ही घर में झगडे होने लगा. इन झगड़ों के दौरान नीलेश का बेटा स्वयं अकसर उसे काट डालने की धमकी देता था.

18 जुलाई 2022 सुबह 5 बजे, अंबावाडी, अहमदाबाद
17 और 18 जुलाई की दरम्यानी रात स्वयं जोशी घर से बाहर था. अगले दिन सुबह-सुबह वो नशा करके घर लौटा था. घर आते ही उसने अपने पिता से पैसों की मांग शुरू कर दी. इसी बात पर दोनों में झगड़ा शुरू हुआ और पहले से खार खाए बैठे नीलेश जोशी ने नशे में धुत्त अपने बेटे पर मसाला कूटनेवाले पत्थर से एक के बाद एक कई जोरदार वार किए, जिससे कुछ ही पल में उसकी मौत हो गई. 

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कत्ल के बाद मांगी भगवान से माफी
आपको जानकर हैरान होगी कि हत्या करने के बाद बुजुर्ग नीलेश जोशी अपने घर से निकलकर पहले सीधा मंदिर गया, वहां आधे घंटे बैठ कर उसने ऊपरवाले से अपने गुनाहों के लिए माफी मांगी. इसके बाद वो मंदिर से निकलकर बाजार की तरफ गया और वहां रास्ते से उसने इलेक्ट्रिक कटर और पॉलीथीन के बड़े पैकेट्स खरीद कर लाया. घर लौट कर उसने बाथरूम में अपने बेटे की लाश के कई टुकड़े किए और उन टुकड़ों को चार हिस्सों में बांट कर अलग-अलग पॉलीथीन के चार पैकेट बनाए. फिर वो अपनी स्कूटी से उन पैकेट को शहर के अलग-अलग हिस्सों में फेंकने निकल गया. उसने लाश के टुकड़ों को कुछ इस तरह से फेंका-

  •  कटा हुआ सिर -        जीएनडीपी ग्राउंड के पास फेंका
  • दोनों कटे हुए हाथ -   जीवराज नगर में ऱख आया
  • दोनों कटे हुए पैर -     एलिसब्रिज इलाके में डॉक्टर हाउस के पास
  • लाश का धड़ -          वासणा इलाके में कूड़े के ढेर पर

नीलेश जोशी को उम्मीद थी कि लाश के टुकड़े अलग-अलग हिस्सों में पडे होने से उसकी पहचान नहीं हो सकेगी और वो बच जाएगा. लेकिन उसकी उम्मीद के उलट तीन से चार दिन गुजरते-गुजरते ही लाश के टुकड़े मिलने लगे. पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू कर दी. उसे जब इस बात का पता चला तो उसने अहमदाबाद छोड़ कर नेपाल भागने का फैसला कर लिया. कुछ इसी इरादे से वो पहले सूरत गया और वहां से टेन में बैठ कर गोरखपुर जाने लगा. लेकिन पुलिस तब तक कातिल की पहचान कर उसके मोबाइल नंबर के जरिए उसका पीछा शुरू कर चुकी थी. और आखिरकार पुलिस ने कातिल बाप नीलेश जोशी को राजस्थान के सवाई माधोपुर में ट्रेन से गिरफ्तार कर लिया. इस तरह से कत्ल की ये पहेली पुलिस ने महज चंद दिनों में ही सुलझा ली.

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