सूरत के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती 6 साल की मासूम के दर्द से किसी का भी कलेजा मुंह को आ जाएगा. बीते दो साल से बच्ची अस्पताल के बेड पर है और इसकी छह बड़ी सर्जरी हो चुकी हैं. बच्ची को इस हालत में पहुंचाने के लिए घर के पड़ोस में रहने वाला ही एक हैवान जिम्मेदार है. इंसान की शक्ल में वो हैवान है जिसे बच्ची अंकल कह कर बुलाती थी.
1 अक्टूबर 2018 की तारीख को जो बच्ची के साथ हुआ, वो पूरी इंसानियत को शर्मसार करने वाला था. उस वक्त बच्ची की उम्र महज 4 साल की थी. उसे घर के पड़ोस में रहने वाला 25 साल का रोशन भुमियार चाकलेट दिलाने के बहाने वीरान इलाके में ले गया. बच्ची के साथ वहां उसने जो दरिंदगी की, उसे जानकार किसी का भी खून खौल जाए. बच्ची की हालत देखकर डॉक्टर भी दंग रह गए थे. पिछले दो साल में बच्ची के 6 ऑपरेशन हो चुके हैं. जो उम्र गुड्डे-गुड़ियों के साथ खेलने की थी, उस उम्र मे ये बच्ची अस्पताल के बेड पर रहने को मजबूर है.
जिस वक्त उसे अस्पताल में लाया गया था, उस वक्त उसके चेहरे पर कई जगह बुरी तरह काटे जाने के निशान थे. प्राइवेट पार्ट समेत शऱीर का ऐसा कोई भी हिस्सा नहीं था, जहां वहशी ने अपनी दरिंदगी के निशान नहीं छोड़े. डॉक्टरों को उस वक्त बच्ची का ऑपरेशन कर उसकी आंत के हिस्से को निकालना पड़ा था. दो साल बाद अब फिर ऑपरेशन के जरिए आंत को वापस शरीर के अंदर डाला गया.
बच्ची का अभी इलाज कर रहीं डॉ दीप्ति पटेल का कहना है कि बच्ची के दो ऑपरेशन और होने हैं जिसमें उसके बुरी तरह क्षतिग्रस्त चेहरे की सर्जरी की जाएगी. बच्ची की वजाइना रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी भी होगी लेकिन इसके लिए डॉक्टरों को उसके 14 से 15 साल का होने का इंतजार करना होगा. डॉ दीप्ति पटेल का कहना है कि बच्ची के पेट,पैर, मुंह और शरीर के अंदरुनी हिस्सों में 500 से ज्यादा स्टिच लगाने पड़े हैं.
दो साल पहले बच्ची से हैवानियत की इस घटना पर गुजरात सरकार ने सूरत की स्पेशल कोर्ट में फास्टट्रेक ट्रायल शुरू कराया. स्पेशल कोर्ट ने 21 नवंबर 2019 को रोशन भूमियार को दोषी करार देते हुए उम्र भर आखिरी सांस तक जेल की सलाखों के पीछे रहने की सजा सुनाई. भूमियार अब सूरत की जेल में अपने किए की सजा भुगत रहा है. लेकिन बच्ची की मां समेत परिवार को ये इंसाफ अधूरा लगता है. मां की आंखों से आंसू कभी खत्म होने का नाम नहीं लेते. मां का कहना है कि बच्ची को इस हाल में पहुंचाने वाले दरिंदे की सजा मौत और सिर्फ मौत होनी चाहिए थी.
सूरत के प्राइवेट लव एंड केयर अस्पताल में बच्ची का छठा ऑपरेशन हुआ. एक ऑपरेशन पहले भी यहां हुआ. इसके अलावा तीन ऑपरेशन सूरत के नगर पालिका के संचालित स्मीमेर अस्पताल में और एक अहमदाबाद के अस्पताल में हो चुके हैं.
बच्ची के लिए इंसाफ की लड़ाई और इलाज में जिन लोगों ने कदम-कदम पर साथ दिया, उनमें प्रतिभा देसाई का नाम प्रमुख है. उन्होंने न सिर्फ अदालत में मजबूती से केस लड़ा, बल्कि बच्ची के इलाज में भी हर मुमकिन मदद की. प्रतिभा देसाई का कहना है कि जब तक बच्ची पूरी तरह ठीक नहीं हो जाएगी, वो अपनी यह जिम्मेदारी निभाती रहेंगी. प्रतिभा देसाई के मुताबिक भगवान से यही प्रार्थना है कि बच्ची को जल्दी से जल्दी ठीक करे, जिससे वो और बच्चों की तरह खेल-कूद सके.
निर्भया हो या सूरत की बच्ची, देश में जब तक दरिंदगी की ऐसी घटनाएं सामने आती रहेंगी, ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा सही मायने में सार्थक नहीं हो सकता.