जेल में बंद डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को 19 साल पुराने रंजीत सिंह मर्डर केस में उम्रकैद की सजा सुना दी गई है. इस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने गुरमीत राम रहीम समेत पांच अन्य आरोपियों को दोषी करार दिया था. इन सभी को उम्रकैद की सजा मिली है. आइए आपको बताते हैं कि आखिर रंजीत सिंह की हत्या क्यों की गई थी.
बात साल 2002 की है. उस वक्त रंजीत सिंह डेरा सच्चा सौदा के मैनेजर हुआ करते थे. रंजीत सिंह कुरुक्षेत्र के रहने वाले थे. उनका परिवार भी डेरे से जुड़ा हुआ था. सब कुछ ठीक चल रहा था कि अचानक एक गुमनाम चिठ्ठी की वजह से डेरा सच्चा सौदा में हंगामा खड़ा हो गया था. उस गुमनाम खत में एक साध्वी का यौन शोषण किए जाने का खुलासा था. वो चिठ्ठी सरकार के कई बड़े कारिंदों और पुलिस के अधिकारियों को लिखी गई थी. चिठ्ठी सामने आते ही डेरा सच्चा सौदा पर सवाल उठने लगे.
डेरे में रेप और यौन शोषण का मामला सामने आने के बाद रंजीत सिंह बहुत आहत थे. इसी बात को लेकर उन्होंने डेरे के मैनेजर पद से इस्तीफा दे दिया था. अब वो डेरे से अलग हो चुके थे. उनके परिवार को लोग भी डेरे का मोह छोड़ चुके थे. लेकिन इसी दौरान अचानक 10 जुलाई 2002 को अज्ञात बदमाशों ने रंजीत सिंह की हत्या कर दी. उस वक्त डेरा प्रमुख को शक था कि रेप और यौन शोषण का खुलासा करने वाली चिठ्ठी रंजीत ने अपनी बहन से लिखवाई थी. उसी की वजह से रंजीत के कत्ल शक डेरा प्रमुख पर जा रहा था. बाद में सीबीआई जांच में शक हकीकत में तब्दील हो गया था.
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इसी बात को रंजीत के घरवाले भी पहले दिन से कहते रहे. वे रंजीत की मौत को लेकर टूट गए थे. लेकिन उन्होंने इंसाफ पाने के लिए हार नहीं मानी. इस मामले की जांच राज्य पुलिस कर रही थी. लेकिन रंजीत के परिजन इस जांच से खुश नहीं थे. उन्होंने साल 2003 में रंजीत सिंह मर्डर केस की जांच सीबीआई कराने की मांग की. लेकिन सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी. निराश होकर रंजीत सिंह घरवाले पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गए और वहां इस हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने की गुहार लगाई.
तब हाई कोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी. साल 2007 में सीबीआई की विशेष अदालत ने आरोपियों के खिलाफ धाराएं तय की थी. सीबीआई ने आरोपियों पर केस दर्ज करते हुए कार्रवाई की और 2007 में चार्जशीट भी दाखिल कर दी थी. तभी से इस मामले में तब से लगातार सुनवाई चल रही थी. अभी हाल ही में सीबीआई की विशेष अदालत के जज डॉ. सुशील कुमार गर्ग ने इस मामले में गुरमीत राम रहीम समेत सभी पांचों आरोपियों को दोषी करार दिया था.
सीबीआई कोर्ट ने सभी आरोपियों को पहले 12 अक्टूबर को सजा सुनाने का ऐलान किया था. जिसके मद्देनजर पंचकूला में अदालत के आस-पास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. लेकिन उस दिन अदालत ने फैसले की तारीख आगे बढ़ा दी थी. जिसके चलते दोषियों को सोमवार को सजा सुनाई गई.
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बता दें कि गुरमीत राम रहीम इंसा को पहले ही डेरे की साध्वियों का यौन शोषण करने के आरोप में दोषी करार दिया जा चुका है. उस मामले में राम रहीम को 20 साल कैद की सजा सुनाई जा चुकी है. इसके साथ ही एक पत्रकार की हत्या के मामले में भी उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. इस वक्त गुरमीत राम रहीम हरियाणा की सुनारिया जेल में सजा काट रहा है.